भारतीय B-Schools ने MBA सिलेबस में किया बड़ा बदलाव, AI और एनालिटिक्स कोर्स हुए शामिल

भारतीय B-Schools ने MBA सिलेबस में किया बड़ा बदलाव, AI और एनालिटिक्स कोर्स हुए शामिल
प्रतिरूप फोटो
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देशभर के प्रमुख प्रबंधन संस्थान अपने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाने के लिए पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा एनालिटिक्स को जोड़ रहे हैं। आईआईएम के साथ-साथ निजी संस्थान भी अब जेनरेटिव एआई और नैतिक उपयोग से जुड़े विशेष मॉड्यूल पढ़ा रहे हैं। उद्योग जगत में बदलती तकनीकी जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

विपणन, वित्त और मानव संसाधन जैसे मुख्य विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण को शामिल करने से लेकर, ‘जेनरेटिव एआई’, डेटा एनालिटिक्स और जिम्मेदार एआई में विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने तक, भारत के कई प्रबंधन (बी) स्कूल अपने पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि विद्यार्थियों को पारंपरिक प्रबंधन सिद्धांत से आगे बढ़ाकर ‘इंटेलिजेंट मशीनों’ के साथ मिलकर काम करने के लिए दक्ष बनाया जा सके। प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) पहले ही अपने कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल कर चुके हैं।

अब कई निजी बी-स्कूल भी अपने पाठ्यक्रम को अद्यतन कर रहे हैं और विद्यार्थियों को एआई से जुड़े पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रहे हैं। ‘जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस’ के निदेशक तपन कुमार नायक के अनुसार, ‘जेनरेटिव एआई’ ने प्रबंधन शिक्षा के मुख्य वादे — यानी अनिश्चितता की स्थिति में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना — को पूरा करना और भी कठिन बना दिया है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने पहले साल के पाठ्यक्रम में कारोबारी नेताओं के लिए उभरती तकनीकें और एआई विषय पर 30 घंटे का एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया है।

कुछ बेहतरीन बी-स्कूलों में मैनेजर्स के लिए एआई की बुनियादी बातें विषय पर 2-3 महीने का अनिवार्य कोर्स पढ़ाया जाता है। हमारे यहां ‘बिज़नेस एनालिटिक्स’ में एक विशेष विशेषज्ञीकरण है, जिसमें एआई अब इसका एक अहम हिस्सा बन गया है।’’ नायक ने कहा कि वैश्विक बदलावों के साथ कदम मिलाने के लिए भारत के ज़्यादातर आईआईएम और यहां तक कि दूसरी श्रेणी के बी-स्कूल भी अब एआई-केंद्रित एमबीए कार्यक्रम पेश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने ‘जवाबदेह एआई’ से जुड़े कोर्स की जरूरत पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘इसे और अधिक नैतिक एवं जिम्मेदार बनाने के लिए, बी-स्कूलों को ‘जवाबदेह एआई’ पर एक पाठ्यक्रम अनिवार्य करना चाहिए, जिसमें एआई सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा एक मॉड्यूल भी शामिल हो। बी-स्कूलों को नए विद्यार्थियों के लिए एक कार्यशाला के साथ सत्र शुरू करना चाहिए, जिसमें उन्हें चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे नए दौर के उभरते उपकरणों और एआई-आधारित सिमुलेशन के बारे में बताया जाए, ताकि सभी विद्यार्थी एक ही स्तर की जानकारी रख सकें।’’ वैश्विक परप्रेक्ष्य सर्वे रिपोर्ट 2026 के अनुसार एआई, नियोक्ताओं की बदलती अपेक्षाएं और एमबीए कार्यक्रमों के लिए बदलती मांग, भारतीय प्रबंधन स्कूलों के सामने प्रमुख चुनौतियों के रूप में उभर रही हैं। यह सर्वेक्षण 22 डीन और शैक्षणिक प्रमुखों के सर्वेक्षण पर आधारित है।

इसी तरह, ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि एआई उपकरणों का इस्तेमाल करना, भविष्य में नियोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल होगा।

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