Jharkhand paper leak: सरकार संग वार्ता बेनतीजा रही, प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान

रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच शनिवार को राज्य सरकार की समिति और प्रदर्शनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। तीन मंत्रियों को शामिल कर बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो और छात्र प्रतिनिधिमंडलों से वार्ता कर मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का भरोसा दिया। इसके बावजूद अभ्यर्थी 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मुख्य मांग पर अड़े हैं।
रांची, आठ अगस्त भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार ने शनिवार को विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। सरकार की पांच सदस्यीय समिति, जिसमें तीन मंत्री शामिल थे, ने सबसे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी गुट से मुलाकात की।
इस मुद्दे को लेकर महतो के अनशन का शनिवार को सातवां दिन है। इसके बाद समिति ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधिमंडलों से भी बातचीत की। इससे पहले शुक्रवार रात को सरकार ने जेपीएससी/जेएसएससी रिफॉर्म मंच के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भी इसी तरह की वार्ता की थी।
सरकार की ओर से गठित समिति के सदस्य और राज्य मंत्री संजय प्रसाद यादव ने लगातार हुई बैठकों के बाद कहा, ‘‘ प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगें जायज हैं। हम इन मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखेंगे।’’ सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) ने सरकार के सामने पांच मांगें रखीं, जिनमें 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग भी शामिल है। एनएसयूआई ने सरकार के समक्ष छह मांगें रखीं।
संगठन के प्रवक्ता संजीव शाह ने बताया कि इनमें संदेह के घेरे में आई सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी (जेटीए) स्थापित करने की मांग शामिल है। सरकार की समिति की पहली बैठक महतो गुट के जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी मंच के साथ हुई, जो करीब दो घंटे तक चली। मंच के एक नेता ने बैठक के बाद कहा, ‘‘सरकार ने हमारी ओर से उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
हालांकि, 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने समेत हमारी सभी मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।’’ राज्य मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और छात्रों की ओर से बताई गई भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों का जल्द समाधान किया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल आईडी जारी की है। पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन का शनिवार को 15वां दिन है।
देवेंद्र नाथ महतो ने ‘पीटीआई-भाषा’ कहा, ‘‘ हम 14वीं झारखंड पीएससी सिविल सेवा परीक्षा और उस एजेंसी की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि छात्र पिछले दो सप्ताह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार को उनकी मांगें तुरंत पूरी करनी चाहिए। महतो ने कहा, ‘‘सरकार को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है, यह देखने वाली बात होगी।
अगर शुक्रवार को 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद ही सरकार मांगें मान लेती तो शनिवार की बैठक की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि हमारी मांगें लगभग समान हैं।’’ उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ मेरी तबीयत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। रक्तचाप और शुगर का स्तर गिर रहा है। डॉक्टर ने छाती में संक्रमण की जानकारी दी है और अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है।
अगर यही स्थिति जारी रही तो यह मेरे लिए खतरनाक हो सकता है। अब मैं केवल धीरे-धीरे सुन, सोच और बोल पा रहा हूं।’’ प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति गठित की जाए।
अन्य न्यूज़













