Kasaragod Court ने SDPI कार्यकर्ता जैनुल आबिद मर्डर केस में सभी 21 आरोपियों को किया बरी

कासरगोड की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित न कर पाने के कारण 2014 के हत्या मामले में फैसला सुनाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अचिंत्जय राज उन्नी ने भाजपा और आरएसएस से जुड़े सभी आरोपियों को राहत दी। अदालत ने मामले की सुनवाई में 81 गवाहों, 20 भौतिक साक्ष्यों और 150 दस्तावेजों की जांच की थी।
कासरगोड की एक अदालत ने 2014 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यकर्ता जैनुल आबिद की हत्या के मामले में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 21 कार्यकर्ताओं को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अचिंत्जय राज उन्नी ने फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। बरी किए गए लोगों में भाजपा के स्थानीय नेता महेश के., उदयन, प्रशांत, प्रताप और हरीश बी. शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने 81 गवाहों से सवाल-जवाब किए और 20 भौतिक साक्ष्यों तथा 150 दस्तावेजों पर विचार किया। आबिद की हत्या 22 दिसंबर 2014 की रात कासरगोड में पुराने बस अड्डे के पास हुई थी। तलंगरे कुन्निल निवासी 24 वर्षीय आबिद एसडीपीआई समर्थक थे।
घटना की रात करीब साढ़े नौ बजे वह अपने पिता के. ए. मोहम्मद कुन्ही की गद्दों की दुकान बंद करने में मदद कर रहे थे। तभी धारदार हथियारों से लैस हमलावरों के एक समूह ने कथित तौर पर दुकान में घुसकर उन पर हमला कर दिया। आबिद की चीखें सुनकर आसपास के दुकानदार मौके पर पहुंचे, लेकिन हमलावर फरार हो गए।
आबिद को पहले कासरगोड के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें मंगलुरु भेज दिया गया, जहां 23 दिसंबर 2014 को चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद मामला दर्ज कर भाजपा तथा आरएसएस के 21 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
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