Kashmir में आतंक के पूरे नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार, ढाई हजार से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में लिये गये, Mehbooba Mufti, Omar Abdullah भड़के

Jammu Kashmir Police
ANI

हम आपको बता दें कि सुरक्षा एजेंसियों ने अनंतनाग और बिजबेहड़ा में लश्कर-ए-तैयबा के दो वांछित आतंकियों आदिल अहमद ठोकर और हारून राशिद गनई के पैतृक घरों को नियंत्रित विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया। दोनों वर्ष 2018 से लश्कर से जुड़े बताए जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग के लाल चौक में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की दिनदहाड़े हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंक के पूरे तंत्र पर अब तक का सबसे व्यापक प्रहार शुरू कर दिया है। घाटी में एक ही रात में ढाई हजार से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, वांछित लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों के दो घर नियंत्रित विस्फोट कर ध्वस्त कर दिए गए और आतंकवाद को खाद-पानी देने वाले नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का अभियान तेज कर दिया गया। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन की संदिग्ध गतिविधियों ने यह भी संकेत दे दिया कि सीमा पार बैठे आकाओं की साजिशें लगातार जारी हैं।

हम आपको बता दें कि सुरक्षा एजेंसियों ने अनंतनाग और बिजबेहड़ा में लश्कर-ए-तैयबा के दो वांछित आतंकियों आदिल अहमद ठोकर और हारून राशिद गनई के पैतृक घरों को नियंत्रित विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया। दोनों वर्ष 2018 से लश्कर से जुड़े बताए जाते हैं। आधी रात के बाद सुरक्षा बल गांवों में पहुंचे, परिवारों को पहले सुरक्षित बाहर निकाला और फिर विस्फोट कर मकानों को गिरा दिया। आदिल ठोकर का घर इससे पहले पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भी ध्वस्त किया जा चुका था।

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इसके समानांतर पूरी घाटी में आतंकियों के मददगारों पर शिकंजा कसते हुए 2500 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार ये वे संदिग्ध हैं जिन पर आतंकियों को ठिकाना, परिवहन, धन, संचार सुविधा और अन्य रसद उपलब्ध कराने का संदेह है। अकेले श्रीनगर में लगभग 700, बारामूला में 178, बडगाम में 200, गांदरबल में 100 और अनंतनाग, शोपियां तथा कुलगाम में सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट संदेश है कि अब केवल बंदूक उठाने वाला आतंकी ही नहीं, बल्कि उसका हर सहयोगी कानून के दायरे में आएगा।

यह पूरी कार्रवाई उस कायराना हमले के बाद शुरू हुई जिसमें 45 वर्षीय हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बडगाम के लालपोरा निवासी कुरैशी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक में उन पर दिनदहाड़े हमला किया गया। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस लक्षित हत्या की जिम्मेदारी ली। हमले के बाद से फरार आतंकी की तलाश लगातार जारी है और सुरक्षा बल व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं।

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने तथा उभरते हर खतरे को तत्काल निष्प्रभावी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। साथ ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा स्वयं बडगाम पहुंचकर शहीद आशिक हुसैन कुरैशी के परिजनों से मिले। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि शहीद के पुत्र को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए पात्र होने तक परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सिन्हा ने कहा कि पूरे देश को इस वीर पुलिसकर्मी की बहादुरी पर गर्व है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शहीद के परिवार से फोन पर बात कर संवेदना व्यक्त की। भाजपा विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा जब शहीद के घर पहुंचे, उसी दौरान शाह ने शहीद के पुत्र से बातचीत कर परिवार को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है और इस बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की इस सख्त कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हजारों लोगों की गिरफ्तारी और मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई को प्रतिकूल बताते हुए कहा कि इससे जनता का गुस्सा आतंकियों के बजाय प्रशासन की ओर मुड़ सकता है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी इसे सामूहिक दंड जैसा कदम बताया। दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवाद की रीढ़ केवल हथियारबंद आतंकी नहीं, बल्कि उनका पूरा सहयोगी तंत्र है और जब तक इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाएगा, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं होगी।

उधर सीमा पार से भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सांबा और कठुआ जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद सेना और अन्य सुरक्षा बलों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। सांबा के विजयपुर क्षेत्र और कठुआ के हीरानगर सेक्टर में ड्रोन गतिविधि के बाद ड्रोन-रोधी प्रणाली तत्काल सक्रिय की गई। आशंका है कि ड्रोन सीमा पार लौट गया, लेकिन उसके जरिए गिराई गई किसी संभावित सामग्री या अन्य सबूत की तलाश जारी है। लगातार बढ़ रही ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और चौकसी भी कई गुना बढ़ा दी गई है।

देखा जाये तो कश्मीर की ताजा तस्वीर यही बताती है कि अब लड़ाई केवल आतंकियों के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाफ है। एक ओर सीमा पार से ड्रोन और आतंकियों के जरिए भारत को अस्थिर करने की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां स्पष्ट कर चुकी हैं कि आतंक का हर चेहरा और उसका हर मददगार अब कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।

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