Kashmir में 36 साल बाद वापस लौटा Kashmiri Pandit परिवार, Restaurant खोलकर शुरू किया नया कारोबार

kashmiri pandit family
Image Source: ChatGPT

रेस्तरां के उद्घाटन के दौरान चंद्रा धर ने स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सहयोग की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों के प्रेम और समर्थन की वजह से ही उनका यह सपना पूरा हो सका। उन्होंने कहा कि रेस्तरां में लोगों को आते देख ऐसा लगता है जैसे बचपन की यादें फिर से लौट आई हों।

उत्तर कश्मीर के हंदवाडा कस्बे में एक कश्मीरी पंडित परिवार की वापसी ने घाटी में उम्मीद, मेलजोल और सहअस्तित्व का नया संदेश दिया है। हम आपको बता दें कि आतंकवाद के चरम दौर में वर्ष 1990 में कश्मीर छोड़ने को मजबूर हुआ यह परिवार 36 वर्षों बाद अपने पुश्तैनी घर लौटा है। परिवार ने हंदवाडा में ‘टेस्ट एंड ट्रीट्स’ नाम से एक रेस्तरां भी शुरू किया है। रेस्तरां की मालकिन चंद्रा धर ने कहा कि अपने शहर और वहां के लोगों से गहरे भावनात्मक जुाव ने उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनके ससुराल वाले लंगेट के हैं, लेकिन उनका बचपन हंदवाडा में बीता है। उन्होंने कहा कि वह कभी भी अपने लोगों से दूर नहीं रहना चाहती थीं, जिनके साथ उन्होंने जीवन के सबसे सुंदर पल बिताए।

रेस्तरां के उद्घाटन के दौरान चंद्रा धर ने स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सहयोग की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों के प्रेम और समर्थन की वजह से ही उनका यह सपना पूरा हो सका। उन्होंने कहा कि रेस्तरां में लोगों को आते देख ऐसा लगता है जैसे बचपन की यादें फिर से लौट आई हों। सुरक्षा को लेकर उठने वाली आशंकाओं को खारिज करते हुए चंद्रा धर ने कहा कि उन्हें कश्मीर में कभी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि वह पहले भी नियमित रूप से यहां आती रही हैं और स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने हमेशा उन्हें अपनी बेटी की तरह अपनाया। उन्होंने कहा कि लोगों ने हर समय उनका सम्मान किया और उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाया। उन्होंने कहा कि हंदवाडा में उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं होता, क्योंकि स्थानीय समुदाय का स्नेह और सहयोग उन्हें अपनेपन का एहसास कराता है।

इसे भी पढ़ें: Operation Sheruwali का 28वां दिन, Rajouri में आतंकियों पर चारों तरफ से वार, सेना ने बनाया अभेद्य चक्रव्यूह

वहीं चंद्रा धर के बेटे आकाश धर ने इस रेस्तरां को संघर्ष, धैर्य और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वह अपने घर से दूर रहे हों। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने इस कारोबार को स्थापित करने में काफी मदद की। उन्होंने बताया कि रेस्तरां में फास्ट फूड, ताजे जूस और शेक परोसे जाएंगे और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

देखा जाये तो इस परिवार की वापसी ऐसे समय में हुई है जब विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में सात सामुदायिक संगठनों ने श्रीनगर में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान ‘प्रागाश प्रस्ताव’ को अपनाया, जिसमें न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण और कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी का रोडमैप पेश किया गया। छह से चौदह जून तक चले इस सम्मेलन को वर्ष 1990 के बाद समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक माना गया।

इसी बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने भी कश्मीरी पंडित पुनर्वास के लिए बनी शीर्ष समिति को फिर से सक्रिय करने की मांग उठाई है। हम आपको बता दें कि यह समिति वर्ष 2009 में गठित की गई थी, लेकिन 2014 में भंग कर दी गई थी। वानी ने कहा कि केवल सम्मेलन आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार और समाज को मिलकर गंभीर बातचीत करनी होगी ताकि कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी का रास्ता तैयार किया जा सके।

वहीं भाजपा की कश्मीर विस्थापित जिला (केडीडी) इकाई ने घाटी के विभिन्न जिलों के प्रशासन के साथ कई बैठक कर कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण हटाने और विस्थापित समुदाय के कर्मचारियों के लिए अलग से शिकायत निवारण शिविर लगाने की मांग की है। जिला प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि ऐसा शिविर जल्द ही लगाया जाएगा। बहरहाल, हंदवाडा लौटे इस परिवार की कहानी केवल एक परिवार की वापसी नहीं, बल्कि कश्मीर में भाईचारे, भरोसे और साझा संस्कृति के पुनर्जीवन की उम्मीद भी मानी जा रही है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़