Kerala में Onam का मुख्य पर्व Thiruvonam धूमधाम से मना, सद्या और पुक्कलम की रही धूम

केरल में 10 दिवसीय ओणम उत्सव के सबसे प्रमुख दिन तिरुवोनम पर पूरे राज्य में पारंपरिक उल्लास और पारिवारिक मिलन का माहौल रहा। देश-विदेश से घर लौटे परिजनों ने पारंपरिक परिधान पहनकर मंदिरों में पूजा-अर्चना की और केले के पत्ते पर खास सद्या भोज का आनंद लिया। इस अवसर पर घरों में रंग-बिरंगे फूलों के पुक्कलम सजाए गए और कई सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।
केरल में बुधवार को हर कहीं ओणम की रौनक दिखाई दी और लोग 10 दिवसीय इस उत्सव के समापन और सबसे महत्वपूर्ण दिन तिरुवोनम को पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं। इस मौके पर अलग-अलग जगहों पर रहने वाले परिवार के सदस्य घर लौटे और कई पीढ़ियां एक साथ जुटकर खुशियां साझा करती नजर आईं। बच्चों की फूलों की रंगोली के बीच खिलखिलाहट से लेकर विदेशों में रहने वाले परिजनों की घर वापसी तक, केरल में ओणम का उल्लास नजर आया।
कई परिवारों के लिए यह केवल पारंपरिक भोजन और नए कपड़े पहनने का त्योहार नहीं, बल्कि लंबे समय से प्रतीक्षित घर वापसी का अवसर भी था। बेटे-बेटियां और पोते-पोतियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लौटकर परिवार के साथ ओणम की खास सद्या (पारंपरिक भोज) में शामिल हुए। पत्तनमथिट्ठा के पंडालम की सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी सुशीला देवी ने कहा, ‘‘जब पूरा परिवार एक साथ होता है, तभी ओणम वास्तव में पूरा लगता है।
हम अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आज उनका हमारे साथ होना सबसे अनमोल उपहार है।’’ सुबह महिलाओं ने पारंपरिक कसावु साड़ी और पुरुषों ने मुंडू पहनकर मंदिरों का रुख किया। गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
कई इलाकों में रुक-रुककर हुई बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। घरों में बच्चों और युवाओं ने रंग-बिरंगे पुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाए। आंगनों में पारंपरिक ऊंजल (झूले) लगाए गए।
बच्चों के लिए नए कपड़े, झूला और स्वादिष्ट भोजन त्योहार के खास आकर्षण रहे। ओणम का मुख्य आकर्षण सद्या रहा, जिसमें केले के पत्ते पर अवियल, ओलन, थोरन, एरिशेरी, सांभर, दाल, पचड़ी, किचड़ी, अचार, पापड़ और पायसम जैसे पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। स्थानीय क्लबों और सामुदायिक संगठनों ने वडमवली, उरियाडी, पुलिकली, तिरुवातिरा और थेय्यम जैसी प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उत्सव का रंग और गहरा किया।
ओणम का संबंध पौराणिक राजा महाबली से माना जाता है, जिनका शासन समृद्धि, समानता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेजा, लेकिन वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दी। यही अवसर तिरुवोनम के रूप में मनाया जाता है।
समय के साथ ओणम धार्मिक सीमाओं से आगे बढ़कर केरल की साझा सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक एकजुटता का पर्व बन गया है।
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