Kharage Panel Report का खुलासा: Pune Land Scam में पार्थ पवार सेफ, दो अधिकारियों पर एक्शन तय

Parth Pawar
ANI
अंकित सिंह । Feb 17 2026 2:13PM

पुणे के 1,800 करोड़ रुपये के विवादित भूमि सौदे में खारगे पैनल की जांच रिपोर्ट ने पार्थ पवार को क्लीन चिट दे दी है, जबकि प्रक्रियात्मक चूक के लिए दो सरकारी अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

पुणे में हुए विवादित भूमि सौदे में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। इस सौदे में एक भूखंड की कीमत कथित तौर पर 1,800 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन इसे मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। सूत्रों के अनुसार, लगभग 1,000 पृष्ठों की सरकारी जांच रिपोर्ट ने दिवंगत एनसीपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को क्लीन चिट दे दी है, जबकि कथित प्रक्रियात्मक चूक के लिए दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

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आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे (जो अब अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के पद पर तैनात हैं) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट चंद्रशेखर बावनकुले के नेतृत्व वाले राजस्व विभाग को सौंप दी गई है और आगे के निर्देशों के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखे जाने की उम्मीद है। यह समिति एमएस अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी से जुड़े भूमि विक्रय मामले की जांच के लिए नियुक्त की गई थी। इस फर्म के प्रमुख दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार हैं। पार्थ पवार की माता सुनेत्रा पवार वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं और राज्य उत्पाद शुल्क, अल्पसंख्यक विकास, खेल एवं युवा मामलों के विभागों की प्रमुख हैं।

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यह विवाद मुंधवा स्थित 44 एकड़ भूमि के अवैध हस्तांतरण से संबंधित है, जो वर्तमान में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) को पट्टे पर दी गई है। भूमि के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी रखने वाली शीतल तेजवानी और दिग्विजय पाटिल पर अभिलेखों में हेराफेरी करने और अवैध रूप से स्वामित्व अधिकार अमेडिया एंटरप्राइजेज को हस्तांतरित करने का आरोप है। पाटिल, पार्थ पवार के चचेरे भाई हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने दो सरकारी अधिकारियों - हवेली रजिस्ट्रार कार्यालय के सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू और तहसीलदार सूर्यकांत येओले - को बर्खास्त करने की सिफारिश की है।

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