प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश, सख्त सजा का प्रस्ताव

सरकार ने प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए लोकसभा में एक नया संशोधन विधेयक पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और त्वरित अदालतें गठित करने का भी प्रस्ताव है।
नयी दिल्ली, 27 जुलाई सरकार ने प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े अपराधों के खिलाफ सख्त प्रावधान वाला विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। विपक्षी सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर जवाबदेही तय करने और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग करते हुए हंगाामा कर रहे थे।
लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन से संबंधित इस विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।
विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी। नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन और फिर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार यह विधेयक लेकर आई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा भी की है।
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