Parliament Diary: रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत के लिए उपजी चिंताओं पर सरकार ने संसद में दिया बयान

Parliament Diary: रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत के लिए उपजी चिंताओं पर सरकार ने संसद में दिया बयान

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 के बीच पाकिस्तान को 20.36 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के दवा उत्पादों का निर्यात किया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख को आज विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में काफी हद तक स्पष्ट किया और सांसदों के मन की शंकाओं का निवारण भी किया। साथ ही आज दोनों सदनों में लोक महत्व के कई मुद्दे उठाये गये और विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर भी चर्चा की गयी। आइये डालते हैं एक नजर दोनों सदनों की कार्यवाही की आज की बड़ी बातों पर।

विदेश मंत्री का बयान

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज राज्यसभा में कहा कि रूस से भारत द्वारा आयातित कच्चे तेल की मात्रा काफी कम है और सरकार रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर भुगतान सहित व्यापार संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गौर कर रही है। जयशंकर ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में कहा कि रूस से व्यापार में उभरती समस्या के कारण सरकार भुगतान पहलू सहित विभिन्न मुद्दों पर गौर कर रही है। उन्होंने कहा कि इन मामलों पर गौर करने के लिए वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों का एक समूह है। रूस के साथ तेल व्यापार के संबंध में उन्होंने कहा, "हम रूस से बहुत कम (कच्चा) तेल आयात करते हैं। यह हमारे आयात का एक प्रतिशत से भी कम है। कई देश हमसे 20 गुना अधिक तेल (रूस से) आयात करते हैं।" रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद भारत के पड़ोस में विभिन्न घटनाक्रम के संबंध में उन्होंने कहा, "हमारे पड़ोस में कई घटनाक्रम हुए हैं और हम उन पर सावधानी से नजर रख रहे हैं।’’

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रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख के बारे में उन्होंने कहा, "... हमारा रूख यह है कि हम शांति चाहते हैं। जब प्रधानमंत्री ने (रूस और यूक्रेन के) राष्ट्रपतियों से बात की, तो उस समय स्पष्ट इरादा था-छात्रों की निकासी... लेकिन इस विषय पर व्यापक बातचीत हुई कि हम क्या कर सकते हैं जिससे शत्रुता समाप्त हो गई और वार्ता और कूटनीति बहाल हो। मुझे लगता है कि आज यह भावना कई देशों द्वारा व्यापक रूप से साझा की जाती है। हमने इसे बहुत मजबूती से व्यक्त किया है।’’ रूस-यूक्रेन संकट के बीच व्यापार के संबंध में उन्होंने कहा, "भारतीय विदेश नीति के फैसले भारत के राष्ट्रीय हित में किए जाते हैं और हम अपनी सोच, विचारों और हितों से निर्देशित होते हैं। इसलिए, यूक्रेन की स्थिति को व्यापार के मुद्दों से जोड़ने का कोई सवाल नहीं है।"

जयशंकर ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 के बीच पाकिस्तान को 20.36 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के दवा उत्पादों का निर्यात किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी आयातकों द्वारा भारतीय दवा निर्यातकों को देय राशि का भुगतान नहीं करने के कुछ उदाहरण हमारे संज्ञान में आए हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारतीय निर्यातकों की कुल बकाया राशि लगभग 4,30,000 अमेरिकी डॉलर है। विदेश मंत्री ने कहा कि बकाया राशि का मामला इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान में संबंधित अधिकारियों के साथ उठाया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय के कार्य पर चर्चा

इसके अलावा कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट को लेकर सरकार पर कटाक्ष करते हुए लोकसभा में कहा कि इस मंत्रालय को बंद क्यों नहीं कर देते। इसके जवाब में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ‘आपका सुझाव आपको मुबारक हो।’ नकवी ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पूर्व की कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की विरासत ढो रही है। बिहार के किशनगंज से लोकसभा सदस्य मोहम्मद जावेद ने प्रश्नकाल के दौरान अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछने के दौरान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों के बारे में सिर्फ बोलती है, करती कुछ नहीं है। जवाब में नकवी ने कहा कि मोदी सरकार ''सम्मान के साथ विकास एवं बिना तुष्टीकरण के सशक्तीकरण’’ की नीति पर काम कर रही है और पूरे देश में जारी मंत्रालयों की कल्याण योजनाओं का लाभ सभी वर्गों के साथ अल्पसंख्यक समाज के लोगों को बराबर मिल रहा है।

सरकार पर विपक्ष का आरोप

इसके अलावा विपक्ष ने लोकसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख बंदरगाहों को कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के हाथों में सौंप दिया है और मछुआरों के हितों की भी अनदेखी की जा रही है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए कदमों और संबंधित कानूनों में जरूरी संशोधन करने से पोत परिवहन क्षेत्र में चौतरफा विकास हुआ है। लोकसभा में ‘वर्ष 2022-23 के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा’ की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने सरकार पर निशाना साधा तो भाजपा के दिलीप सैकिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पोत परिवहन क्षेत्र में चौतरफा विकास हो रहा है।

बंगाल का मुद्दा उठा

इसके अलावा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपनी पार्टी के सांसद अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में हिंसा पीड़ितों से नहीं मिलने देने का विषय बृहस्पतिवार को लोकसभा में उठाया और इसे ‘लोकतंत्र पर प्रहार’ करार दिया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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केरल के सांसदों की नाराजगी

इसके अलावा कांग्रेस सदस्य के.सी. वेणुगोपाल ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि विजय चौक पर प्रदर्शन करने के बाद संसद की ओर लौट रहे विपक्षी सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने ‘‘धक्कामुक्की’’ की। राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने वेणुगोपाल से कहा कि वह इस घटना की विस्तृत जानकारी उन्हें भेजें ताकि वह आवश्यक कार्रवाई कर सकें। शून्य काल में इस मामले को उठाते हुए वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘आज सुबह विजय चौक पर एक घटना हुई। सांसद वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे... हमने वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उसके बाद जब सभी सांसद वहां से पैदल संसद की ओर लौट रहे थे तब दिल्ली पुलिस ने सांसदों को रोका और धक्कामुक्की की। उनमें महिला सांसद भी थीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत गलत हुआ है। हम क्या संदेश देश को देना चाह रहे हैं? सांसदों के साथ ऐसा बर्ताव?’’ इस पर नायडू ने कहा, ‘‘आप घटना के बारे में विस्तार से लिखित में जानकारी मुझे भेजिए। मैं गृह मंत्रालय से पता करूंगा और आवश्यक हुआ तो हम चर्चा भी करेंगे।’’

वाणिज्य मंत्री का बयान

इसके अलावा वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि विरासत में मिली ‘कमजोर मुद्रा एवं अर्थव्यवस्था’ को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने सात वर्ष में पारदर्शी व्यवस्था, परिणामोन्मुखी प्रशासन, भेदभाव रहित कार्यक्रमों तथा नवोन्मेषी वित्त पोषण का मॉडल तैयार किया है जिससे दुनिया में भारत एक ‘मजबूत आर्थिक एवं निवेश स्थल’ के रूप में उभरा है। लोकसभा में ‘वर्ष 2022-23 के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा’ का जवाब देते हुए वाणिज्य मंत्री गोयल ने कहा कि वर्ष 2014 में जब सरकार आई तो अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही थी, विदेशी मुद्रा की स्थिति गंभीर थी, लोग निवेश करने में संकोच करते थे तथा छोटे बड़े उद्यमियों को कारोबार को लेकर शंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में आधारभूत सुधारों की बात कही और इस बात पर जोर दिया कि विकास कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रहे, पूरे देश में समान रूप से होना चाहिए।

लोक महत्व के मुद्दे

इसके अलावा राज्यसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दे उठाये जिनमें ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’’, ओडिशा में विधान परिषद के गठन, प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाने और बेघर बच्चों (स्ट्रीट चिल्ड्रेन) के पुनर्वास के मुद्दे शामिल थे। शून्य काल में भारतीय जनता पार्टी के डॉ. डीपी वत्स ने ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’’ का मुद्दा उठाया और कहा कि 1967 के बाद संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त विधायक दल की सरकारों को कार्यकाल के बीच में ही बर्खास्त किया गया तथा इसके बाद देश में ‘एक राष्ट्र, लगातार’ चुनाव की स्थिति हो गई। अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों को देश के संसाधनों पर बड़ा भार बताते हुए वत्स ने कहा, ‘‘राष्ट्र हित को मद्देनजर रखते हुए मैं सभी राजनीतिक दलों, वह चाहें सरकार में हों या विपक्ष में, से आग्रह करूंगा कि दस विषय पर एक आम सहमति बनाई जाए। इसके लिए कोई रास्ता निकाला जाए ताकि देश के संसाधनों पर भार कम हो और पांच साल में एक बार विधानसभा, लोकसभा और शहरी निकायों के चुनाव हों। ऐसा होता है तो देश हित में बहुत अच्छा होगा।’’

ओडिशा से बीजू जनता दल के सदस्य मुजीबुल्लाह खान ने राज्य में विधान परिषद के गठन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ओडिशा की विधान सभा ने इस आशय का संकल्प 2018 में सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों राज्यसभा में एक लिखित सवाल के माध्यम से इस प्रस्ताव की स्थिति की जानकारी मांगी गई तो सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि उसे इस संकल्प का कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘विधान सभा से संकल्प पारित होने के बाद भारत सरकार के पास कागज आया था। मंत्री महोदय कह रहे हैं कि वह कागज मिल नहीं रहा है।...मतलब कहीं गुमा दिये होंगे? यह तो बड़ी अजीब बात है। हम सब स्कूलों में पढ़ते थे तब कागज गुम हो जाया करते थे...यहां तो संसद में कागज गुम हो रहा है...सरकार में भी कागज गुम हो रहा है।’’ खान ने कहा कि इसके बाद विधान सभा के अध्यक्ष ने फिर से संकल्प संबंधी आवश्यक दस्तावेज की प्रति केंद्र सरकार को भेजी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अनुराध है कि विधान परिषद गठन करने का जो संकल्प विधान सभा से पारित हुआ है, उसका सम्मान करते हुए आवश्यक कदम उठाइए।’’

छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की छाया वर्मा ने प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत मिलने वाले लाभ के लिए आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाने और इसके लाभ का दायरा बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत गर्भवती महिला को 5000 रुपये तक का लाभ मिलता है लेकिन सिर्फ 58 प्रतिशत जरूरतमंद ही इसका फायदा ले पा रहे हैं क्योंकि इसके आवेदन की प्रक्रिया बहुत कठिन है। उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए और गर्भपात के बाद दूसरे बच्चे की स्थिति में इस योजना फायदा दिया जाना चाहिए, जो अभी नहीं मिलता है।’’

कांग्रेस की अमी याग्निक ने बेघर बच्चों का मामला उठाते हुए कहा कि सरकार को इनके आंकड़े इक्ट्ठे कर इनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने सदन के सदस्यों से भी अनुरोध किया कि वे आगे आएं और ऐसे बच्चों के पुनर्वास में योगदान दें। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक के गुलबर्गा में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल (ईएसआईसी) की जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाते हुए इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रूप में विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘इस अस्पताल के प्रबंधन के लिए पैसे नहीं है। इसकी स्थिति दिन प्रतिदिन जर्जर होती जा रही है। आप हर राज्य में एम्स खोल रहे हैं। इस ईएसआईसी अस्पताल के पास 50 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसे एम्स में शामिल कर लेंगे तो करोड़ों लोगों को इसका फायदा मिलेगा।’’

तृणमूल कांग्रेस के लुइझिनो फ्लेरियो ने प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण कानून को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से गोवा की नदियों व वहां के पर्यावरण का बहुत नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस कानून को समाप्त करना गोवा के हित में है।’’ राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करने के संबंध में समीक्षा करने और उसकी पद्धति सुझाने के लिए बनी सत्पथी समिति का उल्लेख किया और कहा कि इसकी रिपोर्ट पर आज तक चर्चा नहीं हुई और फिर एक विशेषज्ञ समिति बना दी गयी। उन्होंने हैरत जताते हुए कहा, ‘‘ना जाने कब उस विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आएगी...आज हर कोई महंगाई से परेशान है लिहाजा इसे भी केंद्र में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी तय हो।’’ शून्यकाल में बीजू जनता दल की ममता मोहंता ने मयूरभंज जिले में इस्पात कारखाना खोले जाने, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम ने मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ में बकाया राशि को जारी करने और मनोनीत सदस्य नरेंद्र जाधव ने विभिन्न जेलों में बंद महिला कैदियों व उनके बच्चों की स्थिति का मुद्दा उठाया।

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प्रधानमंत्री का स्वागत

इसके अलावा राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए तो कई केंद्रीय मंत्रियों सहित सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने मेजें थप-थपा कर उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी प्रश्नकाल के दौरान सदन में जब आए और उस समय विदेश मंत्री एस जयशंकर पूरक सवालों का जवाब दे रहे थे। प्रधानमंत्री को सदन में आते देख भाजपा सदस्य अपने स्थानों पर खड़े हो गए और मेजें थप-थपा कर उनका स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सवाल भी सूचीबद्ध होते हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों में विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद, प्रधानमंत्री के लोकसभा में आने पर भी सत्तारुढ़ दल के सदस्यों ने काफी देर तक मेजें थपथपा कर उनका स्वागत किया था।

सीबीआई की राह में रोड़े

इसके अलावा केंद्र सरकार ने बताया कि सीबीआई पिछले तीन वर्ष में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित पांच गैर-भाजपा शासित राज्यों की अनुमति के अभाव में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच शुरू नहीं कर पायी है। कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के लखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 21,074.43 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी से जुड़े कुल 128 अनुरोधों में से, वर्ष 2019 से वर्ष 2022 के दौरान (28 फरवरी 2022 तक) सर्वाधिक 101 अनुरोध (28 फरवरी, 2022 तक) महाराष्ट्र (20,312.53 करोड़ रुपये की राशि के लिए) के पास लंबित थे। सिंह ने कहा कि इस तरह के 12 अनुरोध पंजाब के पास (298.94 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए), आठ छत्तीसगढ़ (157.26 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए), छह पश्चिम बंगाल (293.64 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए) और एक राजस्थान (12.06 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए) के पास लंबित थे। उन्होंने कहा कि नौ राज्यों- मिजोरम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, झारखंड, पंजाब और मेघालय ने मामलों की जांच के लिए सीबीआई से आम सहमति वापस ले ली है। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के लिए इनमें से सात राज्यों में कुल 173 अनुरोध लंबित थे, जिनमें से सबसे अधिक 132 महाराष्ट्र, 16 पंजाब, आठ छत्तीसगढ़, सात झारखंड, छह पश्चिम बंगाल और केरल और राजस्थान के दो-दो अनुरोध शामिल हैं।

रेलवे पर चर्चा

इसके अलावा राज्यसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने रेल यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को आम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने कहा कि सरकार को बुलेट ट्रेन के साथ देश में ‘‘फ्रेट कॉरिडोर’’ बनाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। संसद के उच्च सदन में रेल मंत्रालय के कामकाज पर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने नीतीश कुमार जैसे पूर्व रेल मंत्रियों द्वारा तत्काल टिकट योजना, लालू प्रसाद द्वारा गरीब रथ ट्रेन की पहल और ममता बनर्जी द्वारा ‘‘विजन 2020’’ दस्तावेज एवं दुरंतो एक्सप्रेस की पहल करने का उल्लेख करते हुए सरकार से जानना चाहा कि उसने 2014 से 2021 के बीच रेलवे को ऐसा कौन-सा बड़ा विचार दिया, जो अगले 15 या 20 वर्ष तक प्रासंगिक बना रहे? उन्होंने कहा कि सरकार ने वंदे भारत एक्सप्रेस की घोषणा की है, किंतु इसका टिकट करीब 1500 रूपये से तीन हजार रुपये के बीच होगा। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या आम आदमी इसे वहन कर सकेगा? उन्होंने कहा कि रेलवे के बारे में सत्तारूढ़ दल का दृष्टिकोण तृणमूल कांग्रेस एवं अन्य कई दलों के नजरिये से बहुत अलग है। तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘हमारे लिए रेलवे एक ऐसा आधारभूत ढांचा है, जो प्रत्येक देशवासी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का मूलभूत अधिकार है।...आप इसे अलग तरह से देख सकते हैं किंतु हम नहीं।’’ उन्होंने कहा कि 2017 में आपने रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया था जिसका उनकी पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) ने तब भी विरोध किया था और वह अभी भी इसका विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन की योजना ‘‘फिजूलखर्ची’’ वाली योजना है और इसके बजाय फ्रेट कॉरिडोर पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बुलेट ट्रेन की विरोधी नहीं है। डेरेक ने कहा कि बुलेट ट्रेन बनाने पर प्रति किलोमीटर 200 करोड़ रूपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि दाल, चावल, सब्जी आदि जरूरी वस्तुओं का परिवहन करने के लिए फ्रेट कॉरिडोर बनाने पर 25 करोड़ रूपये प्रति किलोमीटर की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2022 के लिए कई घोषणाएं की थीं जिनमें किसानों की आय दोगुनी करने और बुलेट ट्रेन, अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डालर का बनाने की घोषणा शामिल थी। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि उसे किसने यह सुझाव दिया कि कोविड महामारी के कारण लगाये गये लॉकडाउन से चार घंटे पहले ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उस समय पांच दिन भी ट्रेनों को चला दिया गया होता तो विस्थापितों का संकट उत्पन्न नहीं होता। डेरेक ने आरोप लगाया कि केंद्र पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के लिए रेल परियोजनाओं के लिए कम धन आवंटित करता है और जब इन परियोजनाओं की प्रगति के बारे में पूछा जाता है तो उसके पास एक ही बहाना रहता है कि भूमि अधिग्रहण में अड़चनें आ रही हैं।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के नीरज शेखर ने कहा कि ट्रेनों, पटरियों और रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता में पिछले दिनों इस तरह का सुधार आया है जिसे आम आदमी भी महसूस कर रहा है। उन्होंने ट्रेनों में दो के स्थान पर चार सामान्य श्रेणी की बोगी (डिब्बे) लगाने के लिए सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बलिया सहित तीन जिले 1942 में तीन दिनों के लिए आजाद हो गये थे। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए बलिया में रेलवे को विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और बलिया के स्टेशन का सौंदर्यीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व सांसदों को ऐसी सुविधा देने को कहा जिससे उन्हें ट्रेन आरक्षण में कोई कठिनाई नहीं आये। शेखर ने कहा कि ‘‘1975 के महानायक’’ जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली के समीप बकुलाह स्टेशन का नाम दिवंगत नेता के नाम पर किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व में इस पूरे सिताब दियारा क्षेत्र और इस स्टेशन का विकास करने की घोषणा की थी।

भाजपा के अजय प्रताप सिंह ने मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड से जुड़ी विभिन्न रेल परियोजनाओं का मुद्दा उठाया और इन क्षेत्रों की लंबित और प्रगतिशील परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने उम्मीद जतायी कि वे अपने जीवनकाल में सीधी और सिंगरौली के बीच रेल लाइन देख पाएंगे और इस पर चलने वाली ट्रेन पर यात्रा कर पाएंगे। सिंह ने रीवा को चारों महानगर से जोड़ने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा हो जाने पर पूरे बघेलखण्ड का विकास हो पाएगा।

तेलुगू देशम पार्टी के के. रवींद्रकुमार ने कहा कि रेलवे में बहुत अधिक पद खाली पड़े हैं जिनमें सुरक्षा से जुड़े पद भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे में सिग्नल सहित विभिन्न पदों पर खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार को फौरन कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आंध्र प्रदेश से जुड़ी विभिन्न रेल परियोजनाओं के बारे में सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने की मांग की। भाजपा के रामभाई हरजीभाई मोकरिया ने गुजराती में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज देश के लगभग हर स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाएं में बहुत वृद्धि हो गई है। तमिल मनीला कांग्रेस (एम) के जीके वासन ने कहा कि भारत का आम आदमी अपनी यात्रा आवश्यकताओं के लिए ट्रेनों पर निर्भर रहता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यात्रियों एवं ट्रेनों की सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक बड़ी ट्रेन में गैर एसी श्रेणी के प्रथम श्रेणी के डिब्बे लगाये जाए। उन्होंने कहा कि श्वास और दमा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए ऐसे डिब्बों की बहुत जरूरत है। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि कोविड महामारी के बाद बहुत संख्या में लोगों को श्वसन संबंधी समस्या हो रही है। भाजपा के शक्तिसिंह डूंगरपुर ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पूर्वात्तर क्षेत्र में आमान परिवर्तन का सारा काम पूरा कर लिया गया है, जो बहुत स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि सीमा पर सेना और टैंकों जैसे उसके हथियारों एवं उपकरणों के आवागमन में ट्रेनों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि आज विश्व में जिस तरह से परिदृश्य बदल रहा है उसमें किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए रेलवे की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो चुकी है।

कश्मीर में बढ़े पयर्टक

इसके अलावा सरकार ने संसद में कहा कि पिछले साल दिसंबर महीने में करीब 1.43 लाख पर्यटकों ने कश्मीर यात्रा की, जो पिछले सात वर्षों में सर्वाधिक संख्या है। पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख सहित देश भर में पर्यटन उद्योग की सहायता के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का परिणाम भी सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने जम्मू के लिए उड़ानों की संख्या 1,280 और श्रीनगर के लिए 2,048 थीं, जो नागरिक उड्डयन बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र के प्रोत्साहन का परिणाम है।

रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू को सबसे अधिक वित्तीय सहायता दी गयी है जिसमें कोविड के दौरान और आपातकालीन ‘क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ के तहत 3,902 ऋण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 1,03,750 लोगों को मदद दी गई है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में कोविड के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के विभिन्न कदमों के परिणामस्वरूप जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख में घरेलू पर्यटन अपने चरम पर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 के लिए जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री द्वारा दिए गए भाषण से भी इसकी पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की संख्या में खासी वृद्धि दर्ज की जा रही है और दिसंबर 2021 में करीब 1.43 लाख पर्यटकों ने कश्मीर की यात्रा की, जो पिछले सात वर्षों में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि सितम्बर 2021 से तीर्थयात्रियों सहित लगभग 72.09 लाख पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है। रेड्डी ने कहा कि सर्दियों के मौसम में श्रीनगर और प्रमुख पर्यटक केंद्रों, विशेष रूप से गुलमर्ग और पहलगाम में होटलों के कमरे 100 प्रतिशत भरे रहे।





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