Maharashtra FDA ने कहा- खुले खाद्य तेल पर रोक नया फैसला नहीं, 2011 से है नियम

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि मिलावट रोकने के लिए उपभोक्ताओं को केवल सीलबंद और लेबल लगे पैकेट में ही खाद्य तेल बेचना अनिवार्य है। प्राधिकरण के अनुसार खुले तेल पर पाबंदी का कानूनी प्रावधान वर्ष 2011 से प्रभावी है और राज्य में दी गई आखिरी अस्थायी छूट 2020 में ही समाप्त हो चुकी है। विभाग ने इस वित्त वर्ष में नियमों के उल्लंघन पर 5.31 करोड़ रुपये मूल्य का 3.20 लाख लीटर से अधिक तेल जब्त किया है।
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (एफडीए) ने खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने के अपने फैसले को लेकर व्यापारियों की चिंताओं के बीच मंगलवार को कहा कि यह कोई नया कदम नहीं है और मिलावट पर लगाम लगाने तथा लोगों की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में इस संबंध में कानूनी प्रावधान 2011 से ही लागू है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा था कि खाद्य तेल में मिलावट पर लगाम लगाने के लिए एफडीए से ऐसी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए कहा जाएगा, जिससे पारंपरिक तेल कारोबारियों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। एफडीए ने एक बयान में कहा कि उसने मौजूदा नियमों को समान रूप से लागू करने के लिए पूरे राज्य में अनुपालन आदेश जारी किया था।
उसने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार खाद्य तेल की बिक्री उपभोक्ताओं को निर्धारित गुणवत्ता वाले, सीलबंद, छेड़छाड़ से सुरक्षित और पूरी तरह लेबल लगे पैकेट में ही की जानी चाहिए। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि इस पाबंदी का मकसद पूरी आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही सुनिश्चित करना और ग्राहकों को तेल के स्रोत, बैच नंबर और उपभोक्ताओं को उसकी निर्माण अवधि के बारे में जानने में सक्षम बनाना था। विभाग ने कहा कि ड्रम, टैंक, कनस्तर या टैंकर से सीधे उपभोक्ताओं की ओर से लाए गए बर्तन में तेल बेचना या मूल सील खोलने के बाद छोटे कंटेनर में तेल बेचना, खुले में बिकने वाले या अनधिकृत रूप से दोबारा पैक किए गए तेल की श्रेणी में आता है।
एफडीए ने खाद्य तेल के थोक परिवहन/आवागमन और उपभोक्ताओं को खुदरा बिक्री के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। विभाग ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों की ओर से उत्पादन या परिवहन के लिए खाद्य तेल का थोक परिवहन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन अंतिम उपभोक्ता को बेचा जाने वाला तेल सीलबंद और लेबल लगे पैकेट में ही होना चाहिए। एफडीए ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने खुले खाद्य तेल की बिक्री के लिए अस्थायी और समय-सीमा वाली छूट दी थी।
उसने बताया कि ऐसी आखिरी छूट 2020 तक ही सीमित थी और इसे स्थायी अनुमति नहीं माना जा सकता। एफडीए के मुताबिक, उसने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में खाद्य तेल के 1,247 नमूने इकट्ठा किए, जिनमें से 1,142 नमूने जांच में तय मानकों के अनुसार पाए गए, जबकि 77 खराब गुणवत्ता के, 13 असुरक्षित और 15 गलत लेबल वाले मिले। विभाग ने बताया कि उसने इस अवधि में लगभग 5.31 करोड़ रुपये मूल्य का 3,20,781 लीटर खाद्य तेल जब्त किया।
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