West Bengal में सियासी भूचाल! Mamata Banerjee की सीट से 47 हजार वोटर हटे, चुनाव से पहले टेंशन

Mamata Banerjee
ANI

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर की मतदाता सूची से 47,000 से अधिक नाम हटाने से 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विशेष पुनरीक्षण को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं, जहाँ बीजेपी इसे फर्जी मतदाताओं की छंटनी बता रही है, वहीं टीएमसी ने इसे चुनाव आयोग और बीजेपी का खेल करार दिया है।

पश्चिम बंगाल में शनिवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूचियों के प्रकाशन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में नए सिरे से राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जहां 47,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं और 14,000 से अधिक नामों को ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में रखा गया। बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर के मुद्दे पर राजनीतिक गहमागहमी जारी है। दक्षिण कोलकाता का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, जिसे व्यापक रूप से बनर्जी का गढ़ माना जाता है, में पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर 2,06,295 मतदाता थे।

 14,154 मतदाताओं को ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में रखा गया 

पिछले साल 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा सूची में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 44,786 नामों को हटाए जाने की जानकारी दी गई थी। शनिवार को जारी अंतिम सूची में 2,324 और नाम हटा दिए गए, जिससे हटाए गए नामों की कुल संख्या 47,094 हो गई। यह संख्या 2021 के भवानीपुर उपचुनाव में बनर्जी द्वारा हासिल किए गए 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से लगभग 11,000 कम है। हटाए गए नामों के अलावा, 14,154 मतदाताओं को ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में रखा गया है, जिन पर अंतिम निर्णय दस्तावेज सत्यापन पर निर्भर है। यदि अंततः इन नामों को सूची से हटा दिया जाता है, तो निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की कुल संख्या में काफी कमी आ सकती है। इस घटनाक्रम ने विधानसभा चुनाव से पहले तीव्र अटकलों को जन्म दे दिया है।

भवानीपुर सीट पर हटाए गए मतों की संख्या राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह निर्वाचन क्षेत्र हाल के वर्षों में कड़े मुकाबलों का गवाह बन चुका है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने 28,000 से अधिक वोटों के अंतर से भवानीपुर सीट जीती थी। नंदीग्राम में हार के बाद बनर्जी के लिए उपचुनाव लड़ने का रास्ता साफ करने के लिए चट्टोपाध्याय ने कुछ महीनों बाद यह सीट खाली कर दी थी। उस समय उपचुनाव में, बनर्जी ने 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की और भवानीपुर पर अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली।

हालांकि, भाजपा बार-बार दावा करती रही है कि 2026 में पार्टी इस निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज करेगी। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने हाल के महीनों में भवानीपुर क्षेत्र का लगातार दौरा किया है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों में प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में पेश किया है। मतदाता सूची में संशोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए मजूमदार ने शनिवार को कहा कि हटाए गए नाम दोहराव वाले मतदाताओं या मृत मतदाताओं से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सूची प्रकाशित होने के बाद भी, अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करने का अवसर है।

 गलत तरीके से हटाएं गए नाम

अब तक लगभग 47,000 नाम हटाए जा चुके हैं। लेकिन चाहे जो भी हो, मुझे नहीं लगता कि ममता बनर्जी इस बार भवानीपुर से चुनाव लड़ने का साहस दिखाएंगी।’’ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के दावों को राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम ‘‘गलत तरीके से’’ हटाए गए हैं, वे अब भी अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता ने दावा किया, ‘‘पुनः आवेदन करने का अवसर है। इसे अंतिम निर्णय मानना ​​गलत होगा। हम सभी निर्वाचन आयोग और भाजपा के गंदे खेल को जानते हैं, लेकिन इससे कोई उन्हें फायदा नहीं मिलेगा।

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