Mayawati ने GDP आंकड़ों पर उठाए सवाल, केंद्र से संदेह दूर करने की मांग की

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहली तिमाही के आर्थिक विकास दर के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों के मन में विकास दर की प्रामाणिकता को लेकर संदेह है। पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि वास्तविक विकास वही है जिससे देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को सीधा लाभ मिले।
लखनऊ,चार सितंबर बहुजन समाज पार्टी (सपा) प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को लेकर जारी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेन्द्र मोदी सरकार से आग्रह किया कि वह इन आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर लोगों के संदेह को दूर करे। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत रहने को लेकर संदेह है, और अत्यधिक महंगाई, भारी गरीबी और बेरोजगारी की मार झेल रहे लोग चकित हैं और नहीं समझ पा रहे कि आखिर किस पर भरोसा करें।’ भारत के जीडीपी आंकड़ों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि मौजूदा आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर दिखाने के लिए अधिकारियों ने पिछले आंकड़ों में बदलाव किया है। इसके बाद कांग्रेस ने गर्ग के दावों को प्रमुखता से उठाया और आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए पिछले वर्ष के जीडीपी आंकड़ों को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वृद्धि दर नए अपनाए गए सांख्यिकीय ढांचे को दर्शाती है। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने हिंदी में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अगर हम इस मामले में सरकार के आसमान छूते दावों को सही मान लें, तो प्रथम दृष्टया यह अच्छी बात होगी। हालांकि, अगर ये आंकड़े गढ़े हुए हैं, तो यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
इसलिए लोगों में उम्मीद जगाने के लिए सरकार को विश्वसनीय तरीके से यह बताना चाहिए कि इस ऊंची विकास दर से देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को क्या लाभ मिला है और भविष्य में क्या लाभ मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि चूंकि यह मुद्दा जनता के कल्याण से जुड़ा है, इसलिए विकास के आंकड़े और दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। मायावती (70) ने कहा, “यही कारण है कि इनका आकलन जमीनी हकीकत के आधार पर अधिक किया जाता है-यानी वही विकास सही और उपयोगी है, जो लोगों को प्रभावित करे, उनके जीवन में समानता आधारित बदलाव लाए और उन्हें खुशहाल एवं समृद्ध बनाए।” उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए जीडीपी में वृद्धि के आंकड़ों और दावों का अपना स्थान है, लेकिन विकास के वास्तविक लाभार्थियों (देश के करोड़ों मेहनतकश लोगों) को इसका लाभ मिलना और उसका वास्तविक अनुभव होना भी देश और जनता के कल्याण के लिए जरूरी है। अन्यथा, यहां के लगभग 140 करोड़ लोग ‘धनवान सरकार की गरीब जनता’ होने का बोझ लगातार उठाते रहेंगे।’’ बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि देश का विकास तभी ‘अच्छे दिन’ लाएगा, जब इसके करोड़ों मेहनतकश लोग गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से मुक्त जीवन जीने में सक्षम होंगे।
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का ‘आउटसोर्स’ कर्मचारियों का पारिश्रमिक दोगुना करने और ‘उप्र आउटसोर्सिंग सर्विसेज कॉरपोरेशन’ की स्थापना के जरिए 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के निर्णय से बेहतर यह होता कि लोगों को सीधे सरकारी नौकरियां प्रदान की जाएं, ताकि ‘यह व्यवस्था नौकरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार और शोषण के जंजाल से मुक्त रहे’। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने दो सितंबर को जीडीपी आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा था कि पिछले साल के जीडीपी आंकड़ों में संशोधन और अलग-अलग मूल्य मापों के बीच अंतर, अद्यतन आंकड़ों और अनुमान लगाने की तकनीकों में हुए बदलावों को दर्शाता है, न कि मुख्य वृद्धि दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के किसी प्रयास को। यह स्पष्टीकरण सरकार द्वारा वार्षिक और तिमाही जीडीपी अनुमानों की नई श्रृंखला जारी किये जाने के दो दिन बाद आया था।
इसमें 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है और नए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई), बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक तथा अतिरिक्त प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया गया है।
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