विधायक राहुल सिंह लोधी ने छोड़ा कांग्रेस का साथ, भाजपा में शामिल हुए

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भाजपा को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र नौ सीट जीतने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को पूरी 28 सीटों की। इनके नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन नवंबर को 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले प्रदेश के दमोह विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी रविवार को पार्टी छोड़ कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये। इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया, जो रविवार को मंजूर हो गया। मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि लोधी आज भाजपा में शामिल हो गये। इसके साथ ही विधानसभा की सदस्यता छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेस नेताओं की संख्या अब 26 हो गयी है। 

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प्रदेश विधानसभा के अस्थाई अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने बताया, ‘‘दमोह जिले के दमोह विधानसभा क्षेत्र के विधायक राहुल सिंह लोधी ने विधानसभा की सदस्यता से शुक्रवार को इस्तीफे की पेशकश की थी, मैंने उन्हें अपने इस्तीफे पर दोबारा विचार करने के लिए कहा था। लेकिन कल रात को उन्होंने फिर विशेष रूप से आग्रह किया कि इस्तीफा स्वीकार करें, जिस पर मैंने राहुल सिंह लोधी का आज सुबह इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।’’ कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए लोधी ने कहा कि कमलनाथ की तत्कालीन सरकार के दौरान काम नहीं हो रहे थे और भाजपा सरकार में तेजी से काम हुए हैं। इसलिए भाजपा में शामिल हो रहा हूं। उल्लेखनीय है कि इस साल मार्च में कांग्रेस के 22 विधायकों के त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होने के कारण प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी, जिसके कारण कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। फिर 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनी।

इसके बाद कांग्रेस के तीन अन्य विधायक भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गये। लोधी के इस्तीफे के बाद प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में काग्रेस के 87 विधायक रह गये हैं, जबकि भाजपा के 107 विधायक हैं और चार निर्दलीय, दो बसपा एवं एक सपा का विधायक है। शेष 29 सीटें रिक्त हैं। इनमें से तीन नवंबर को 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिनमें से 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देकर भाजपा में आने से खाली हुए हैं, जबकि दो सीटें कांग्रेस के विधायकों के निधन से और एक सीट भाजपा विधायक के निधन से रिक्त है। भाजपा को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र नौ सीट जीतने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को पूरी 28 सीटों की। इनके नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

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