Jagannath Rath Yatra 2026 | पुरी रथयात्रा में बिना 'ताहिया' के निकले महाप्रभु जगन्नाथ, ओडिशा में सियासी बवाल, बीजद और कांग्रेस ने सरकार को घेरा

पुरी रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक पुष्प मुकुट पहनाए बिना मंदिर से बाहर रथ तक लाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है तथा विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने इस चूक को लेकर ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा है यह घटना बृहस्पतिवार को उस समय हुई।
विश्व प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा के दौरान एक अभूतपूर्व घटना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भगवान जगन्नाथ को उनके पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' पहनाए बिना ही मंदिर से बाहर रथ तक लाया गया। इस चूक को लेकर ओडिशा की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों—बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस—ने राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। यह विवादित घटना बृहस्पतिवार को उस समय हुई, जब भगवान जगन्नाथ को 12वीं सदी के ऐतिहासिक मंदिर से 'पहंडी' रस्म के तहत बाहर लाया जा रहा था। आमतौर पर इस रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा भव्य पुष्प मुकुट 'ताहिया' धारण करते हैं। हालांकि, इस बार भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों पर तो 'ताहिया' मौजूद था, लेकिन महाप्रभु जगन्नाथ का विग्रह बिना मुकुट के ही नजर आया।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने कहा कि सेवकों ने विग्रह के खुले स्थान पर पहुंचने से कुछ देर पहले बारिश के कारण ‘ताहिया’ उतार दिया था। विपक्षी दलों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि रथयात्रा हर वर्ष बारिश के मौसम में होती है, लेकिन सदियों पुरानी परंपरा को पहले कभी ऐसे दरकिनार नहीं किया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘इस बार भगवान के ‘ताहिया’ के बिना श्रद्धालुओं के सामने आने से लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।’’ बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने कहा कि राज्य सरकार को इस चूक के लिए करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से माफी मांगनी चाहिए। पुरी का जगन्नाथ मंदिर ओडिशा सरकार के विधि विभाग के अधीन आता है।
वहीं, बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने सीधे राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर ओडिशा सरकार के विधि विभाग के अधीन आता है, इसलिए इस बड़ी चूक के लिए राज्य सरकार को करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इस पारंपरिक चूक ने न केवल भक्तों को निराश किया है, बल्कि राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है।
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