हिन्दी भाषा के तकनीकी विकास में प्रभासाक्षी के योगदान को मिली अपार सराहना

sanjay dwivedi
वरिष्ठ पत्रकार तरुण विजय ने कहा कि हिन्दी में बोलना ही गलत हो गया है, हिन्दी में लिखना ही गलत हो गया है। इतना ही नहीं हिन्दी भाषा के समाचार पत्र ही रोमन में शीषर्क लगाने लगे हैं।

नयी दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सांसद तरुण विजय ने प्रभासाक्षी के सफलतम 19 साल पर उन्हें शुभकामनाएं दी। इस दौरान प्रभासाक्षी द्वारा आयोजित किए गए वेबिनार में तरुण विजय ने डिजिटल माध्यम से 'मेरी भाषा ग्लोबल भाषा' विषय पर परिचर्चा की। उन्होंने कहा कि हिन्दी ऐसी भाषा है जिसके पास एक हजार ट्रिलियन तक के शब्द हैं। 

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उन्होंने कहा कि हिन्दी में बोलना ही गलत हो गया है, हिन्दी में लिखना ही गलत हो गया है। इतना ही नहीं हिन्दी भाषा के समाचार पत्र ही रोमन में शीषर्क लगाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वोट की भाषा हिन्दी, चुनाव की भाषा हिन्दी लेकिन प्रशासन की भाषा हिन्दी नहीं है।

उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी वेबसाइट देख लीजिए और एक सर्वे कराएं। यहां आप देखें कि आपसे अंग्रेजी नहीं आती है तो आप कितनी ऐसी वेबसाइट जहां पर आप जा सकते हैं। इस दौरान हिन्दी भाषा की महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा खतरा हिन्दी में अंग्रेजी भाषा की घुसपैठ का है। 

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इसी परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक संजय द्विवेदी को आमंत्रित। जहां पर संजय द्विवेदी ने कहा कि प्रभासाक्षी अपना 19 साल का सफर पूरा कर रहा है और जिस तरह से पोर्टल ने हिन्दी की सेवा की है वह सराहनीय कदम है। मुझे लगता है हिन्दी ने तकनीकी के साथ मिलकर एक कदम ताल बना दी है। मेरा मानना है कि कम्प्यूटर में हिन्दी, अंग्रेजी की वजह से कम नहीं है बल्कि तकनीकि की वजह से है।

उन्होंने कहा कि गूगल के एक सर्वे के मुताबिक इंटरनेट में हिन्दी पढ़ने वालों की भाषा 94 फीसदी बढ़ रही है जबकि अंग्रेजी पढ़ने वालों की 17 फीसदी बढ रही है। इतना ही नहीं प्रयोजिक भाषाओं को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने एक सर्वे की बात करते हुए कहा कि सभी क्षेत्रीय भाषाओं की बात की जाए तो इंटरनेट पर 1 अरब लोग ऐसे हैं जो अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल नहीं करते हैं। 


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27 Oct, 20 

 वेबिनार 4 (12pm): us02web.zoom.us/s/81975834959    

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