Priyank Kharge ने RSS को घेरा, कहा- दिखावा छोड़ खुद को Political Party के रूप में दर्ज कराएं

Priyank Kharge
ANI
अंकित सिंह । Oct 21 2026 12:53PM

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सत्ता परिवर्तन पर टिप्पणी को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संघ को सांस्कृतिक संगठन होने का दिखावा छोड़कर खुद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराना चाहिए। इसके साथ ही खड़गे ने कर्नाटक में प्रस्तावित रूट मार्च के लिए आरएसएस को पुलिस से पूर्व अनुमति लेने की नसीहत दी।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सत्ता परिवर्तन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी की आलोचना की और संगठन के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें वह खुद को पूरी तरह से सांस्कृतिक संगठन बताता है। फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और अल्बानिया, नेपाल तथा बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में भागवत के इस बयान पर कि सत्ता परिवर्तन न तो कभी हुआ है और न ही कभी होगा, खड़गे ने राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करने के RSS प्रमुख के अधिकार को ही चुनौती दे दी।

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खड़गे ने कहा कि सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग, चुनाव आयुक्त, मतदाता सूची, फॉर्म 6 और फॉर्म 7 पर कब्ज़ा कर लिया है। क्या आप इसके बाद भारत में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होने की उम्मीद कर सकते हैं? तो फिर, मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट (जुडिशियल इम्युनिटी) की क्या ज़रूरत है? मोहन भागवत कौन होते हैं टिप्पणी करने वाले? उन्हें ही तय करने दें कि RSS एक सांस्कृतिक संगठन है या राजनीतिक संगठन। वे सिर्फ राजनीति, आर्थिक स्थिति, रक्षा और विदेश नीति के बारे में बात करते हैं। वे कहते हैं कि हमें पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध बनाए रखने चाहिए। ये लोग कौन हैं? क्या इनका स्वरूप सांस्कृतिक है या राजनीतिक? उन्हें सांस्कृतिक संगठन होने का यह दिखावा छोड़ देना चाहिए, खुद को रजिस्टर कराना चाहिए और एक राजनीतिक संगठन के रूप में सामने आना चाहिए।

कर्नाटक में RSS के प्रस्तावित 'पथ संचलन' (रूट मार्च) के विषय पर, खरगे ने नियमों के पालन पर ज़ोर देते हुए कहा कि कई जगहों पर वे कह रहे हैं कि वे 'पथ संचलन' करने जा रहे हैं और पुलिस को इसकी जानकारी दे रहे हैं। उन्हें सिर्फ जानकारी नहीं देनी चाहिए। उन्हें अनुमति लेनी चाहिए ताकि ज़रूरी इंतज़ाम किए जा सकें। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस विभाग RSS के इशारे पर काम नहीं करता है। वे बस हमें यह कहकर सूचित नहीं कर सकते कि, ‘हमने आपको जानकारी दे दी है। आप जरूरी इंतजाम कर लें। हम आएंगे और चले जाएंगे।’ कई लोग अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम आयोजित करते हैं। अगर आप अनुमति मांगते हैं और अनुरोध उचित लगता है, तो हम अनुमति दे देंगे। हम मना नहीं करने वाले हैं। RSS सहित सभी के लिए एक जैसे नियम लागू होते हैं। RSS कानून या संविधान से ऊपर नहीं है। अगर उनके प्रस्तावित रूट मार्च को लेकर कोई समस्या है, तो स्थानीय अधिकारी बातचीत करके उसे सुलझा सकते हैं। लेकिन कृपया पुलिस विभाग और सरकार का सम्मान करना सीखें।

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खड़गे ने आगे सवाल उठाया कि क्या RSS ने मार्च के लिए औपचारिक रूप से अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें अनुमति मांगनी चाहिए। क्या उन्होंने इसमें ‘अनुमति’ शब्द लिखा है? उन्होंने इसे सिर्फ जानकारी के तौर पर सौंपा और कहा हम इस तरह से कार्यक्रम कर रहे हैं। कृपया उचित कार्रवाई करें।’ क्या उन्हें लगता है कि पुलिसकर्मी उनके लिए काम करते हैं? हम सरकार हैं। मेरे सहित सभी के लिए एक प्रक्रिया तय है। उस प्रक्रिया का पालन करें।

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