Bengal में DGP नियुक्ति की प्रक्रिया में अड़चन, UPSC ने लौटाई सूची

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अधिकारी ने कहा कि चूंकि पिछले स्थायी डीजीपी का कार्यकाल दिसंबर 2023 में खत्म हो गया था, इसलिए अधिकारियों की नाम की सूची उस साल सितंबर तक भेज दी जानी चाहिए थी।

पश्चिम बंगाल के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति में अड़चन आ गई है, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार की ओर से भेजी गई अधिकारियों के नाम की सूची को प्रक्रियागत देरी का हवाला देते हुए लौटा दिया है और उच्चतम न्यायालय से उचित निर्देश प्राप्त करने की सलाह दी है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म होने वाला है और कुछ महीने में राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘राज्य सरकार ने नए डीजीपी या पुलिस बल प्रमुख को चुनने के लिए एक ‘एम्पैनलमेंट कमेटी मीटिंग’ (ईसीएम) का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, यूपीएससी ने प्रक्रिया में गड़बड़ियों और अधिकारियों के नाम की सूची जमा करने में देरी का हवाला देते हुए प्रस्ताव लौटा दिया।’’

गत 31 दिसंबर को राज्य के मुख्य सचिव को भेजे अपने पत्र में, यूपीएससी के निदेशक (एआईएस) नंद किशोर कुमार ने 2018 में प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का ज़िक्र किया, जिसमें यह अनिवार्य किया गया था कि सभी राज्यों को मौजूदा डीजीपी की सेवानिवृत्ति से कम से कम तीन महीने पहले अपने प्रस्ताव यूपीएससी को भेजने होंगे ताकि एक पारदर्शी, समयबद्ध और मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया संपन्न हो सके।

यूपीएससी के मुताबिक पश्चिम बंगाल में डीजीपी के पद की रिक्ति मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने के बाद 28 दिसंबर 2023 को हुई जिसके बाद राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था।

डीजीपी की नियुक्ति के तय नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार यूपीएससी की ‘एम्पैनलमेंट कमेटी’ के चयनित नामों में से एक अधिकारी को चुनती है। इससे पहले राज्य सरकार निश्चित समय के अंदर अपनी सूची समिति को भेज देती है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘यूपीएससी ने राज्य को बताया है कि पिछली नियुक्ति में गड़बड़ियों की वजह से वह किसी को भी मौजूदा डीजीपी के तौर पर नियुक्त नहीं कर सकता।’’ उन्होंने विस्तार से बताया, ‘‘तकनीकी रूप से मनोज मालवीय राज्य के अंतिम स्थायी डीजीपी बने हुए हैं।’’

अधिकारी ने कहा कि चूंकि पिछले स्थायी डीजीपी का कार्यकाल दिसंबर 2023 में खत्म हो गया था, इसलिए अधिकारियों की नाम की सूची उस साल सितंबर तक भेज दी जानी चाहिए थी।

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