RSS ने Karnataka के कई शहरों में निकाला पथ संचलन

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे होने और विजयादशमी के उपलक्ष्य में रविवार को बेंगलुरु समेत कर्नाटक के कई हिस्सों में पथ संचलन निकाला। इस दौरान भाजपा नेताओं ने भी मार्च में हिस्सा लिया, जबकि कुछ जिलों में प्रशासनिक अनुमति के अभाव में कार्यक्रम स्थगित करने पड़े।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने और विजयादशमी के उपलक्ष्य में रविवार को बेंगलुरु में कई स्थानों पर पथ संचलन किया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आर. अशोक और सी. नारायणस्वामी भी शामिल हुए। कर्नाटक के कई अन्य जिलों में भी पथ संचलन आयोजित किए गए। हालांकि, अनुमति संबंधी कारणों से कुछ स्थानों पर कार्यक्रम रद्द या स्थगित कर दिए गए।

आरएसएस के सूत्रों ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बेंगलुरु के जयनगर और चामराजपेट सहित कई स्थानों पर पथ संचलन किया गया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया। चामराजपेट में पथ संचलन विभिन्न इलाकों से होकर गुजरा और सिद्धरूढ़ आश्रम के सामने समाप्त हुआ।

स्वयंसेवकों ने ढोल की थाप पर कदमताल की और भारत माता को नमन किया। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त एवं भाजपा नेता भास्कर राव ने भी पथ संचलन में हिस्सा लिया। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना और यातायात जाम को रोकने के लिए कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

तुमकुरु में प्रस्तावित पथ संचलन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के मद्देनजर स्थगित कर दिया गया। कोलार जिले के मुलबागल में कार्यक्रम की तारीख बदलकर 31 अक्टूबर कर दी गई, जबकि चिक्कबल्लापुर में उपायुक्त द्वारा अनुमति वापस लिए जाने के बाद पथ संचलन स्थगित कर दिया गया। कोप्पल में भी पथ संचलन स्थगित किए जाने की खबर है, जबकि रामनगर और कलबुर्गी में कार्यक्रमों के लिए सशर्त अनुमति दी गई।

कलबुर्गी में आयोजकों को निर्धारित मार्ग का पालन करने और भड़काऊ भाषण नहीं देने के निर्देश दिए गए। सूत्रों ने बताया कि आरएसएस ने हुब्बल्ली में भी पथ संचलन आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसके बाद एक जनसभा होगी। ये कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किए जा रहे हैं, जब आरएसएस के पथ संचलन के लिए अनुमति लेने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे का कहना है कि आरएसएस को केवल पुलिस को सूचना देने के बजाय संबंधित प्राधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। खरगे आरएसएस पर लगातार निशाना साध रहे हैं और उन्होंने स्वयंसेवकों के लाठियां लेकर पथ संचलन करने की परंपरा पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि संगठन के अस्तित्व में आने के एक सदी बाद भी इसका पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया है और इतने बड़े कार्यक्रमों के आयोजन के लिए उसे धन कहां से मिलता है।

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