गोकुल डेयरी पर कब्जे के प्रयास का आरोप, Satej Patil ने 9 नवंबर को विरोध मार्च की घोषणा की

महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की प्रबंध समिति में सरकार द्वारा अतिरिक्त सदस्य नामित करने के फैसले के विरोध में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने 9 नवंबर को विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोल्हापुर की जनता के जनादेश का अपमान कर गोकुल डेयरी को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है। बंबई उच्च न्यायालय ने संस्था के अध्यक्ष चुनाव के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की है।
मुंबई, पांच नवंबर कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार पर ‘गोकुल डेयरी’ को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश करके कोल्हापुर के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया और नौ नवंबर को एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की। कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने कहा, ‘‘यह मेरे खिलाफ कोई निजी रंजिश नहीं है... बल्कि यह कोल्हापुर की जनता के जनादेश के खिलाफ है। सरकार ने कोल्हापुर के लोगों का अपमान किया है और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है।’’ कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को ‘गोकुल डेयरी’ के नाम से जाना जाता है।
संस्था के चुनावों में पाटिल समर्थित पैनल ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ समर्थित पैनल को हरा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद ही सरकार ने 500 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में सरकार द्वारा नामित पांच सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। पाटिल ने आरोप लगाया कि यह गोकुल डेयरी पर कब्जा करने की एक चाल है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले के विरोध में नौ नवंबर को कोल्हापुर में दशहरा चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विरोध मार्च आयोजित किया जाएगा। पाटिल ने बताया कि गोकुल चुनाव में उनके पैनल ने 25 में से 13 सीट पर जीत दर्ज की थी जबकि विपक्षी पैनल को 12 सीट मिली थीं। उन्होंने कहा कि कोरम से जुड़ी तकनीकी समस्या का हवाला देते हुए विपक्ष के 12 निदेशकों के बैठक में शामिल नहीं होने के बाद अध्यक्ष का चुनाव स्थगित कर दिया गया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके बाद उनके पक्ष ने बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने सभी 25 निदेशकों को नोटिस जारी करने और 10 नवंबर को अध्यक्ष का चुनाव कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अदालत में 25 निदेशकों के बीच चुनाव कराने पर सहमति जताई थी लेकिन इसके बावजूद राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को मतदान के अधिकार वाले चार अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति का फैसला किया और इस संबंध में एक अध्यादेश जारी कर दिया। पाटिल ने कहा, ‘‘सरकार यह कानून सिर्फ गोकुल पर अपना नियंत्रण जमाने के लिए लाई है।
मैं इस साजिश की निंदा करता हूं।’’ उन्होंने बताया कि गोकुल रोजाना करीब 5.5 लाख किसानों से लगभग 20 लाख लीटर दूध एकत्र करता है और हर 10 दिन में उन्हें करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जन आंदोलन भी जारी रहेगा। उन्होंने कोल्हापुर के निवासियों से नौ नवंबर को आयोजित होने वाले मार्च में शामिल होने की अपील की।
पाटिल ने दावा किया कि सरकार की ये कार्रवाइयां अलग-अलग राज्यों की दुग्ध सहकारी समितियों को एक साझा ढांचे के तहत लाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा हैं। उन्होंने इसके लिए ‘सरदार मिल्क फेडरेशन’ के प्रस्तावित विस्तार का उदाहरण दिया। कर्नाटक के ‘नंदिनी’ ब्रांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी इसी तरह की कोशिश को जन विरोध के कारण रोक दिया गया था।
पाटिल ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समर्थन का भी स्वागत किया। इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दुग्ध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया था इसलिए चुनाव के बाद भाजपा ने ‘बहुमत चुराने’ के लिए नियम ही बदल दिए। उन्होंने इसे ‘‘जनादेश में मिलावट’’ करार दिया।
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