• डीआरडीओ जासूसी मामले में पांच आरोपियों को सात दिन की हिरासत में भेजा गया

ओडिशा पुलिस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिष्ठान की महत्वपूर्ण जानकारी पैसे के बदले एक पाकिस्तानी जासूस को सौंपने के आरोप में 13 और 16 सितंबर को पांच आईटीआर कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।

ओडिशा की एक अदालत ने बालासोर जिले में डीआरडीओ के एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में जासूसी से संबंधित मामले में पांच आरोपियों को शनिवार को सात दिन के लिये राज्य पुलिस की अपराध शाखा की हिरासत में भेज दिया।

बालासोर में उप संभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज करने के बाद उन्हें अपराध शाखा के हवाले कर दिया। ओडिशा पुलिस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिष्ठान की महत्वपूर्ण जानकारी पैसे के बदले एक पाकिस्तानी जासूस को सौंपने के आरोप में 13 और 16 सितंबर को पांच आईटीआर कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।

इस मामले में हनी ट्रैप की भी आशंका जताई जा रही है क्योंकि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए एक महिला के संपर्क में थे और उससे आर्थिक मदद भी लेते थे। अपराध शाखा के सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्थित उनके आईएसआई हैंडलर के पास से पैसा रक्षा प्रतिष्ठान के पास रहने वाले चार बांग्लादेशी शरणार्थियों के खातों में जमा किया गया था।

संविदा कर्मचारियों की पहचान बसंत बेहरा (52), हेमंत कुमार मिस्त्री (52), तापस रंजन नायक (41) और एसके मुसाफिर (32) के रूप में हुई है। इन्हें 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। ड्राइवर के रूप में काम करने वाले स्थायी कर्मचारी सचिन कुमार उर्फ छाटा को 16 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

चूंकि आईएसआई हैंडलर उत्तर प्रदेश से काम कर रहा था और सचिन इस उत्तरी राज्य का मूल निवासी है, लिहाजा अपराध शाखा को संदेह है कि उनके बीच घनिष्ठ संबंध हैं। आईटीआर ड्राइवर ने डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों की बातचीत को भी रिकॉर्ड किया होगा और फिर उसे पाकिस्तानी जासूस के पास पहुंचा दिया होगा।

सूत्रों ने बताया कि रिमांड अवधि के दौरान पांचों आरोपियों से पूछताछ के बाद अपराध शाखा की एक टीम के उत्तर प्रदेश के लिए रवाना होने की संभावना है। इस बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दो सदस्यीय टीम कोलकाता से चांदीपुर आई और पुलिस महानिरीक्षक (पूर्वी रेंज) हिमांशु कुमार लाल की मौजूदगी में शुक्रवार को आईटीआर के मुख्य सुरक्षा अधिकारी अनुराग सेन से महानिरीक्षक के कार्यालय में दो घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।

अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव पांडा ने कहा, आरोपियों से उनकी गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने और उनकी कथित जासूसी के संबंध में सबूत इकट्ठा करने के लिए उन्हें रिमांड पर लाया गया है। हम विभिन्न कोणों से जांच कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, एनआईए मामले की जांच नहीं कर रही है,लेकिन जरूरत पड़ने पर हम उनकी मदद के सकते हैं।