सुप्रीम कोर्ट में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: तारीख पर तारीख से नाराज बेंच बोली-'इस मामले को नजर लग गई है

सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में बार-बार सुनवाई टलने पर इस मामले को मनहूस करार दिया। पक्षों के बीच कोई समझौता न होने और समय की कमी के चलते अदालत ने अब अगली सुनवाई 6 नवंबर तय की है। यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की हिंदू पक्ष की मांग से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में बार-बार सुनवाई टलने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला "मनहूस" (jinxed) है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था। कोर्ट ने कहा कि हमें आप सभी की बात सुननी होगी। इस मायने में यह मामला मनहूस है। एक के बाद एक तारीख पर सुनवाई टलती जा रही है। बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उसे बताया गया कि हाई कोर्ट में मामला करने वाले पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए हैं। इससे पहले पक्षों ने हिंदू पक्ष के भीतर ही पैदा हुए विवाद को सुलझाने की संभावना जताई थी।
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कोर्ट ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष के आधार पर पक्षों की दलीलें सुनेगी। हालांकि, समय की कमी के कारण, सुनवाई के लिए याचिका को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष (वादी) ने सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर कर दावा किया कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कृष्ण जन्मभूमि की ज़मीन पर किया गया था। यह सिविल मुकदमा हिंदू देवता भगवान श्री कृष्ण विराजमान और कुछ हिंदू भक्तों की ओर से दायर किया गया था। वादियों ने मस्जिद को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की मांग की। वादियों ने यह भी दावा किया कि ऐसे कई संकेत हैं जिनसे पता चलता है कि शाही ईदगाह मस्जिद असल में एक हिंदू मंदिर है। इसलिए, जगह की जांच के लिए एक कमिश्नर नियुक्त करने की अर्ज़ी हाई कोर्ट में दी गई।
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शुरू में सितंबर 2020 में सिविल कोर्ट ने 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' के तहत मामला स्वीकार करने पर लगी रोक का हवाला देते हुए मुख्य मुकदमा खारिज कर दिया था। हालांकि, मथुरा ज़िला अदालत में अपील के बाद इस फ़ैसले को पलट दिया गया। मई 2022 में मथुरा ज़िला अदालत ने कहा कि मुकदमा चलाने योग्य है। बाद में, 2023 में इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
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