भाजपा ने संकट को खत्म करने वाला बजट बताया, कांग्रेस ने आशाओं के विपरीत करार दिया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 9 2019 5:14PM
भाजपा ने संकट को खत्म करने वाला बजट बताया, कांग्रेस ने आशाओं के विपरीत करार दिया
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सिंह ने कहा कि देश की जनता को पहली बार भरोसा हुआ है कि यह सरकार जो कहती है, वह करती है।उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विरोध के लिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है लेकिन आज विपक्ष की विरोध की ताकत खत्म हो गयी है।

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट को भाजपा ने जहां देश की राजनीति में पैदा हुए भरोसे के संकट को कम करने वाला बताया, वहीं कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार का यह बजट लोगों की आशाओं और अकांक्षाओं के विपरीत रहा है। लोकसभा में बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के वीरेंद्र सिंह ने कहा किआम बजट अतीत की गलतियों को सुधारने वाला और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने वाला है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की अवधारणा पर आधारित बजट ने देश की राजनीति में पैदा हुए भरोसे के संकट को कम किया है। सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले पांच साल चलने वाली सरकार ने गांव में रहने वाले गरीबों के मन में भरोसा पैदा किया है। इससे पहले देश की राजनीति में भरोसे का संकट इसलिए पैदा हुआ था क्योंकि लोग कहते कुछ थे, करते कुछ थे और दिखता कुछ था। सिंह ने कहा कि देश की जनता को पहली बार भरोसा हुआ है कि यह सरकार जो कहती है, वह करती है।उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विरोध के लिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है लेकिन आज विपक्ष की विरोध की ताकत खत्म हो गयी है।



विपक्ष को गांव और किसान के मुद्दों पर सरकार के साथ एकमत होना चाहिए। कांग्रेस सांसद परनीत कौर ने सरकार के पहले बजट को आशाओं के विपरीत बजट करार देते हुए कहा कि आजाद भारत में गठबंधन की सरकारों में देश की अर्थव्यवस्था का सुनहरा दौर रहा और वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा पेश बजट लोगों की उम्मीदों के प्रतिकूल रहा है। उन्होंने कहा कि देश में तीन बजट को परिवर्तनकारी माना जाता है। पहला ऐसा बजट 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पेश किया गया जिसने भारत की अर्थव्यस्था की दशा और दिशा बदल दी। कौर ने कहा कि इसके बाद 1997 में पी चिदंबरम ने ड्रीम बजट पेश किया और फिर 2004 में संप्रग सरकार का पहला बजट आया। इन दोनों बजट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। पटियाला से कांग्रेस सांसद ने कहा कि गठबंधन की सरकारों में भारत की अर्थव्यवस्था का सुनहरा दौर रहा। उन्होंने कहा कि प्रचंड बहुमत होने के बावजूद मोदी सरकार का यह बजट लोगों की आशाओं और अकांक्षाओं के विपरीत रहा है। तेलंगाना राष्ट्र समिति के नामा नागेश्वर राव ने कहा कि तेलंगाना राज्य ने सबसे पहले ‘हर घर जल’ योजना की शुरूआत की थी। अब केंद्र सरकार भी ऐसी योजना लाई है। 
उन्होंने कहा कि बजट में दक्षिणी राज्यों के लिए उम्मीद के मुताबिक प्रावधान नहीं किये गये जबकि हमें वित्त मंत्री सीतारमण से अपने राज्य के लिए अधिक बजट की उम्मीद थी जो तमिलनाडु की बेटी और आंध्र प्रदेश की बहू हैं।  भाजपा के विनोद सोनकर ने कहा कि विपक्ष के लोग अनुसूचित जाति और जनजाति के बजट में कमी के आरोप लगा रहे हैं, जो गलत हैं। उन्होंने नौकरी में आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की ताकि रोजगार के संबंध में युवाओं के सामने आ रहे संकट को खत्म किया जा सके। सोनकर ने आकांक्षी जिलों की तर्ज पर उद्योग विहीन जिले चिह्नित करने की भी मांग की। लोक जनशक्ति पार्टी के रामचंद्र पासवान ने कहा कि कोई वर्ग नहीं है जो बजट पर केंद्र सरकार की सराहना नहीं कर रहा हो। गरीब सोचते हैं कि यह सरकार उनके बारे में सोच रही है।  भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान ने कहा कि यह बजट देश की ऊंचाई पर ले जाने वाला है और फिर से साबित हो गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार गांव, गरीब और किसानों की सरकार है। भाजपा की ही सुनीता दुग्गल ने कहा कि यह बजट देश को नयी दिशा देने वाला है और इसमें गरीबों को विशेष ध्यान रखा गया है। 


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