• पंजाब की प्रमुख खबरें-सिविल सर्जन स्कूलों में कोविड-19 निगरानी को यकीनी बनाएं

सारस-कोविड-2 की दूसरी लहर के बाद स्कूलों को दोबारा खोलने के मद्देनज़र स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने आज सभी सिविल सर्जनों को माहिर समिति द्वारा सिफारिश किये गए एसओपीज़ अनुसार स्कूलों में कोविड-19 की निगरानी करना यकीनी बनाने के निर्देश दिए

  सिविल सर्जन स्कूलों में कोविड-19 निगरानी को यकीनी बनाएंः बलबीर सिद्धू

चंडीगढ़-----सारस-कोविड-2 की दूसरी लहर के बाद स्कूलों को दोबारा खोलने के मद्देनज़र स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने आज सभी सिविल सर्जनों को माहिर समिति द्वारा सिफारिश किये गए एसओपीज़ अनुसार स्कूलों में कोविड-19 की निगरानी करना यकीनी बनाने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के बीच कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए सभी सिविल सर्जनों को संदिग्ध मामलों संबंधी आंकड़े प्रदान करने और अपने संबंधित जिलों में कोविड टैस्ट करवाने संबंधी एक माईक्रो-प्लान तैयार करने की हिदायतें जारी की गई हैं।

स. सिद्धू ने कहा कि स्कूलों के प्रबंधकों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपने अध्यापकों, स्टाफ और विद्यार्थियों को कोविड-19 की रोकथाम के उपायों बारे जागरूक करें। उन्होंने कहा कि स्कूल और यहां की बार-बार छूईं जाने वाली सतहों की रोज़ाना सफ़ाई और रोगाणु-मुक्त करने के लिए समय-सारणी तैयार करनी चाहिए और हाथों की सफ़ाई को यकीनी बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्कूलों को “बीमार होने पर घर ही रहने संबंधी नीति लागू करनी चाहिए और यह भी यकीनी बनाना चाहिए कि जो विद्यार्थी या स्टाफ कोविड-19 मरीज़ के संपर्क में आए हैं, वह 14 दिन घर पर ही रहें। हालाँकि डेस्कों के फासले के साथ, रिसैस, ब्रेक और लंच ब्रेक को चरणबद्ध ढंग के साथ व्यवस्थित करके, क्लासों में विद्यार्थियों की संख्या सीमित करके प्रत्येक के बीच कम-से-कम 6 फुट की शारीरिक दूरी बनाई जा सकती है और क्लासरूमों में अच्छा वेंटिलेशन यकीनी बनाने के साथ-साथ बार-बार हाथों की सफ़ाई और वातावरण की सफ़ाई संबंधी उपाय करने चाहिएं।स. सिद्धू ने स्पष्ट किया कि यदि एक क्लास में कोविड-19 के एक केस की पुष्टि हो जाती है तो क्लास को 14 दिनों के लिए निलंबित और क्वारंटीन कर दिया जाये और यदि स्कूल में दो या दो से अधिक कोविड-19 केस पए जाते हैं तो स्कूल को 14 दिनों के लिए बंद रखा जाये।

उन्होंने कहा कि यदि किसी शहर या कस्बे या ब्लॉक के एक तिहाई स्कूल बंद हैं तो उस क्षेत्र के सभी स्कूल बंद कर दिए जाएँ।स. सिद्धू ने आवश्यक रोकथाम उपायों का ज़िक्र करते हुए कहा कि विद्यार्थियों और स्टाफ की नियमित रूप में एंटरी और एग्जिट प्वाइंटों पर ग़ैर-सम्पर्क थर्मामीटरों के द्वारा जांच की जाये और कोविड-19 के संदिग्ध मामलों का पता लगाने के लिए इनफ्लूएंजा जैसी बीमारी के लिए सिंड्रोमिक निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों वाले विद्यार्थियों/स्टाफ को घर भेजा जाये और कोविड-19 की जांच किये जाने के उपरांत जब उनका टैस्ट नेगेटिव या लक्षण न आए तब ही स्कूल आने की इजाज़त दी जाये। अगर टैस्ट पॉज़िटिव हो तो व्यक्ति को एकांतवास किया जाये और इस मामले में कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जाना चाहिए।स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में आए लोगों का पता लगाएं और उनकी जांच की जानी चाहिए और अध्यापक द्वारा गैर-हाज़िर विद्यार्थियों को इनफ्लूएंजा जैसी बीमारी के लक्षणों बारे पूछताछ करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी दिन गैर-हाज़िर या घर भेजने वाले इनफ्लूएंजा से पीड़ित विद्यार्थियों की संख्या स्कूल की कुल हाज़िरी के 5 प्रतिशत तक पहुँच जाती है तो स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को बीमारी फैलने की संभावना के लिए सूचित किया जाये। इसके अलावा यदि एक ही कक्षा के तीन या अधिक विद्यार्थी इनफ्लूएंजा जैसी बीमारी के कारण स्कूल से गैरहाज़िर हों या किसी दिन घर भेजा जाता है तो स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित किया जाये।स. सिद्धू ने कहा कि एक केस या एक से अधिक मामलों के फैलने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि स्कूल में कितनी सख्ती के साथ उपचार /रोकथाम उपायों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूल में एक नोडल अफ़सर अनिवार्य होना चाहिए जो पूरे स्कूल का स्क्रीनिंग डेटा एकत्रित करेगा जैसे कि पाए गए संदिग्ध मामलों की संख्या, टैस्ट किये गए पॉज़िटिव संदिग्ध मामलों की संख्या आदि। वह रोज़ाना ज़िला प्रशासन को रिपोर्ट करेगा।बच्चों में कोविड-19 के संचार को घटाने के लिए टेस्टिंग रणनीति की महत्ता की तरफ इशारा करते हुए

उन्होंने कहा कि टेस्टिंग रणनीति की पहली प्राथमिकता यह यकीनी बनाना है कि कोविड-19 के लक्ष्ण वाले किसी भी विद्यार्थी या स्कूल स्टाफ के लिए रैपिड एंटीजेन टेस्टिंग और आर.टी.पी.सी.आर. टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध की जाये। उन्होंने कहा कि क्योंकि बच्चों का नासोफैरनजियल सैंपल लेने के लिए विशेष तजुर्बे की ज़रूरत होती है इसलिए स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चों और स्टाफ की जांच के लिए स्थानीय जांच केन्द्रों की पहचान करके तालमेल बनाकर रखा जाये।स. सिद्धू ने कहा कि स्कूलों का न सिर्फ़ शिक्षा पर बल्कि स्वास्थ्य और विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव होता है। इसलिए पंजाब सरकार ने विद्यार्थियों को अपने साथियों के साथ पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ पोषण सेवाएं (मिड-डे-मील) उपलब्ध करवाने और सामाजिक संबंधों का आनंद लेने का भी मौका दिया है।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोविड-19 संबंधी सूचना रोज़ाना के आधार पर ई-पंजाब पोर्टल पर अपलोड करने के स्कूल प्रमुखों को निर्देश

चंडीगढ़, ----- पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने कोविड-19 महामारी पर नजऱ रखने और इस सम्बन्धी समूची जानकारी प्राप्त करने के लिए स्कूल प्रमुखों को रोज़ाना के आधार पर सारी सूचना ई-पंजाब पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।इसकी जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य भर में दो अगस्त से स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। इस कारण कोरोना के सम्बन्ध में विद्यार्थियों, अध्यापकों और अन्य अमले संबंधी रोज़ाना सारी सूचना ऑनलाइन भेजने के लिए समूह सरकारी, मान्यता प्राप्त, प्राईवेट एडिड और प्राईवेट स्कूलों के प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं। प्रवक्ता के अनुसार कोविड-19 के टैस्ट, वैक्सीनेशन, कोविड पॉजिटिव स्टाफ और विद्यार्थियों की मुकम्मल सूचना ई-पंजाब पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। इसका मकसद रोज़ाना के आधार पर कोरोना महामारी पर नजऱ रखना और ज़रूरत पडऩे पर समय पर ज़रूरी कदम उठाना है।

पंजाब ने सतत शहरों और भाईचारों के लिए सतत विकास लक्ष्य इंडिया इंडैक्स में पहला रैंक किया हासिल

चण्डीगढ़, -- पंजाब ने सतत शहरों और भाईचारों के लिए सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जीज़) इंडिया इंडैक्स 2020-21 में देशभर के राज्यों में पहला रैंक हासिल किया है। इसके साथ ही पंजाब 68 अंकों के साथ फ्रंट रनर सूची में शामिल हुआ।

यह जानकारी आज यहाँ सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जीज़) इंडिया इंडैक्स -2020 -21 अनुसार राज्य के अलग-अलग विभागों की प्रगति का जायज़ा लेने के उपरांत मुख्य सचिव श्रीमती विनी महाजन ने दी।

सम्बन्धित विभागों के प्रशासकीय सचिवों के साथ मीटिंग की अध्यक्षीता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि इसमें 22 सूचक थे जहाँ राज्य की कारगुज़ारी /सूचकांक स्कोर 100 रहा। इनमें मुख्य सूचक जैसे कि  लक्ष्य के अनुसार बनाए गए व्यक्तिगत घरेलू पाखानों की प्रतिशतता (एस.बी.एम.(जी)), सेकेंडरी स्तर पर विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात (9वीं-10वीं कक्षा), इलेक्ट्रीफाइड घर की प्रतीशतता, खुले में शोच से मुक्त होने की पुष्टि किये गए जिलों की प्रतिशतता (एस.बी.एम.(जी)) और लक्ष्य के अनुसार बनाए गए व्यक्तिगत घरेलू पाखानों की प्रतिशतता आदि शामिल है।

मीटिंग दौरान कुछ प्रशासकीय सचिवों ने मुख्य सचिव को बताया कि सूचकों के लिए लिए गए आंकड़े नवीनतम रूझानों पर आधारित नहीं थे। उन्होंने आगे बताया कि मौजूदा हालात के अनुसार एस.डी.जी. इंडिया इंडैक्स 2020-21 के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आंकड़ों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ होगा। श्रीमती महाजन ने सभी प्रशासकीय सचिवों को आंकड़ों में संशोधन के साथ जुड़े मुद्दों को उठाने के निर्देश दिए।

इस मीटिंग में कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायत, वन और वन्य जीव, गृह मामले, श्रम, राजस्व, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, उच्च शिक्षा, उद्योग और वाणिज्य, विज्ञान प्रौद्यौगिकी और वातावरण, सामाजिक सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट, जल स्रोत, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, जल स्पलाई और सेनीटेशन, स्कूल शिक्षा, बिजली और स्थानीय निकाय के प्रशासकीय सचिव मौजूद थे।