ड्रग एडिक्शन के उपचार और प्रबंधन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम का उद्घाटन जम्मू के मेटरनिटी हॉस्पिटल में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और डीन डॉ मधुसूदन शर्मा ने किया। इस अवसर पर मधुसूदन शर्मा ने कहा कि हमारे समाज से नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए इस तरह के कार्यक्रम समय की जरूरत है और इसमे सहयोगात्मक प्रयास किए जाने चाहिए।
नशीली दवाओं की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की जम्मू-कश्मीर राज्य स्तरीय समन्वय एजेंसी ने "नशीली दवाओं के उपचार और प्रबंधन" को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जीएमसी जम्मू के विभिन्न विभागों, नशामुक्ति केंद्रों और नर्सिंग कॉलेजों के लगभग 40 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन जम्मू के मेटरनिटी हॉस्पिटल में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और डीन डॉ मधुसूदन शर्मा ने किया। इस अवसर पर मधुसूदन शर्मा ने कहा कि हमारे समाज से नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए इस तरह के कार्यक्रम समय की जरूरत है और इसमे सहयोगात्मक प्रयास किए जाने चाहिए।
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तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए में डॉ मनु अरोड़ा (एचओडी मनोचिकित्सा विभाग, जीएमसी जम्मू), डॉ आरती बख्शी (एचओडी मनोविज्ञान विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय), डॉ अरुण शर्मा (चिकित्सा अधीक्षक, मातृत्व अस्पताल, गांधी नगर) और डॉ. अभिषेक चौहान (न्यूरो-मनोचिकित्सक, जीएमसी जम्मू) भी शामिल हुए। कार्यक्रम के विषय "पदार्थ उपयोग का स्थानीय परिदृश्य", "मनोसक्रिय पदार्थों का परिचय", "व्यसन का विज्ञान", "महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग" और "स्क्रीनिंग टूल का उपयोग कैसे करें" थे। प्रशिक्षण के पहले दिन की शुरुआत डॉ. अरुण शर्मा द्वारा "पदार्थ उपयोग के स्थानीय परिदृश्य" सत्र से हुई। अरुण शर्मा ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार तथ्यों और आंकड़ों पर चर्चा की।
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दूसरे दिन की शुरुआत डॉ अभिषेक चौहान द्वारा लिए गए "साइकोएक्टिव पदार्थों का परिचय" से हुई। उन्होंने एक-एक करके साइकोएक्टिव पदार्थों पर संक्षेप में चर्चा की और विभिन्न साइकोएक्टिव पदार्थों के वापसी के लक्षणों और प्रभावों को भी साझा किया, जिसमें शराब, कैनबिस, ओपिओइड, इनहेलेंट, निकोटीन आदि शामिल हैं। सत्र बहुत जानकारीपूर्ण था और छात्रों ने मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। दोपहर के भोजन के बाद पहले दिन का तीसरा सत्र डॉ. अरुण शर्मा द्वारा "महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग" पर लिया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।
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