उत्तर प्रदेश की खबरें: श्रम कल्याण परिषद की 78वी बैठक आयोजित, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में नामित अध्यक्ष व सदस्यों ने ग्रहण किया पदभार

उत्तर प्रदेश की खबरें: श्रम कल्याण परिषद की 78वी बैठक आयोजित, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में नामित अध्यक्ष व सदस्यों ने ग्रहण किया पदभार

उत्तर प्रदेश श्रम कल्याण परिषद की 78वी बैठक परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला की अध्यक्षता में बापू भवन में आयोजित की गई, जिसमें श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित परिषद की योजनाओं के सम्बंध में, हितलाभ वितरण की प्रक्रिया एवं विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में परिषद की विभिन्न योजनाओं से 25000 लाभार्थी    श्रमिकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित। 15 हजार रूपये से कम वेतन पाने वाले श्रमिकों को श्रम कल्याण परिषद की योजनाओं का लाभ मिल रहा। प्रदेश में कुल कितने कारखानें एवं वाणिज्य कर दुकानें है, इसका डाटा जीएसटी विभाग से प्राप्त कर लिया जाए। योजनाओं के ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच के लिए सभी श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की लॉगइन आईडी बनाई जाए। उत्तर प्रदेश श्रम कल्याण परिषद की 78वी बैठक परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला की अध्यक्षता में बापू भवन में आयोजित की गई, जिसमें श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित परिषद की योजनाओं के सम्बंध में, हितलाभ वितरण की प्रक्रिया एवं विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2021-22 में परिषद की विभिन्न योजनाओं से 25000 लाभार्थी श्रमिकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। 15 हजार रूपये से कम वेतन पाने वाले पात्र श्रमिकों को श्रम कल्याण परिषद की योजनाओं का लाभ दिया जाता है।  श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुनील भराला ने इस अवसर पर कहा कि परिषद 02 वर्षों से लगातार श्रमिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है और इस कार्य में खरा उतरने की कोशिश की जा रही है। साथ ही योजनाओं का लाभ जरूरतमंद श्रमिक परिवारों तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पात्रों को लाभ मिले इस पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों की बच्चियों की शादी करने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए । भराला ने निर्देशित किया की प्रदेश में कुल कितने कारखानें एवं वाणिज्य कर दुकानें है, इसका डाटा जीएसटी विभाग से प्राप्त कर लिया जाए तथा परिषद की योजनाओं को जनहित गारंटी अधिनियम से भी जोड़ने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा संचालित योजनाओं के ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच के लिए सभी श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की लॉगइन आईडी बनाई जाए। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जन्म स्थल पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में योजनाओं का प्रचार प्रसार भी किया जाए तथा जन सुनवाई भी की जाए। साथ ही तहसील एवं जिला मुख्यालयों तथा श्रम विभाग के कार्यालयों में भी योजनाओं से संबंधित  पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाई जाए। कैलेंडर भी वितरित किए जाएं। भराला ने श्रम कल्याण परिषद के 1.30 करोड़ रुपये बजट में से मात्र 20 लाख खर्च होने पर नाराजगी व्यक्त की। परिषद की योजनाओं से अब तक 254 लाभार्थी श्रमिकों को लाभान्वित किया गया। उन्होंने परिषद की सभी योजनाओं जिसमें डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक शिक्षा सहायता योजना, गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार राशि योजना, स्वामी विवेकानंद धार्मिक पर्यटन यात्रा योजना, महादेवी वर्मा पुस्तक क्रय आर्थिक सहायता योजना, चेतन चैहान क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए लाभार्थियों से अधिक से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त करने के भी निर्देश दिए तथा महादेवी वर्मा पुस्तक क्रय आर्थिक सहायता योजना का लाभ उत्तर प्रदेश दुकान वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962 से आवर्त श्रमिकों की पुत्रियों को भी प्रदान करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन श्री सुरेश चन्द्रा, परिषद के सदस्य, अपर श्रम कल्याण आयुक्त एवं सचिव श्रम कल्याण परिषद श्री फैसल आफताब, अपर श्रम आयुक्त श्री शमीम अख्तर के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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सूड़ा निदेशालय में “अरबन स्लम पुनर्विकास योजना” की ड्राफ्ट पॉलिसी को लेकर नगर विकास मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक। सूडा द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के अंर्तगत “अरबन स्लम पुनर्विकास योजना” के अंर्तगत स्लम में रहने वालों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की बनाई जा रही योजना। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के अंर्तगत “अरबन स्लम पुनर्विकास योजना” को पूर्व में नगर विकास मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम इस योजना की एक ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की गई, जिसका प्रस्तुतिकरण गत दिवस नगर विकास मंत्री श्री आशुतोष टंडन के समक्ष हुआ। उत्तर प्रदेश स्लम एरिया (इंप्रुवमेंट एंड क्लियरेंस) एक्ट 1962 की धारा-3(बी) एवं सूडा के अधिकारियों द्वारा किए गए गुजरात तथा महाराष्ट्र भ्रमण के उपरान्त वहां की पॉलिसी को आधार मानते हुए तैयार की गई है। नगर विकास मंत्री ने ड्राफ्ट पॉलिसी की समीक्षा की और पॉलिसी में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए। साथ ही बैठक में मौजूद अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिए कि जल्द से जल्द इस योजना का पूरा प्लान और ड्राफ्ट पॉलिसी किए गए संशोधन के साथ तैयार कर ली जाए। ताकि ड्राफ्ट पॉलिसी का पुनः प्रस्तुतिकरण किया जा सके। तत्पश्चात उस ड्राफ्ट पॉलिसी का मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। ड्राफ्ट पॉलिसी की समीक्षा पर चर्चा करते हुए श्री टंडन ने कहा कि इस योजना से न केवल शहरों का सौंदर्यीकरण होगा बल्कि स्लम में रहने वालों को पक्के मकान भी मिल सकेंगे, जिसके लिए सूडा द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत योजना का प्लान तैयार किया जा रहा है। ये भी बताया कि इस योजना को तैयार करते समय यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं कि संरचनाओं को डिजाइन एवं ले-आउट करते समय लाभार्थियों की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाए। इसके अलावा इस पॉलिसी के अंर्तगत किसी भी परियोजना का निर्माण कार्य अनुमोदन की तारीख से दो वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा।

नगर विकास मंत्री ने कहा कि “अरबन स्लम पुनर्विकास योजना” में राज्य के शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक भूमियों (केंद्रीय सरकार की भूमि/राज्य सरकार की भूमि/शहरी स्थानीय निकायों की भूमि) पर स्थित स्लम क्षेत्र की जमीनों का चरणबद्ध तरीके से इन-सीटू (स्व-स्थाने) पुनर्विकसित किया जाएगा। निजी भागीदारी के माध्यम से इन-सीटू (स्व-स्थाने) स्लम पुनर्विकास के सभी पहलुओं का ध्यान रखने के लिए एक व्यापक एवं पारदर्शी नीतिगत फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। इन-सीटू (स्व-स्थाने) स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग करके निजी भागीदारी को आकर्षित करना है। सरकारी भूमि, जिस पर आईएसएसआर परियोजना लागू की जानी है, कार्यदायी संस्था स्थानीय नगरीय निकायध्विकास प्राधिकरणध्आवास एवं विकास परिषद को निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। सरकारी भूमि पर स्थित स्लमों का आकार छोटे होने की दशा में, ऐसे विभिन्न स्लमों को संगठित कर एक बड़ी परियोजना में परिवर्तित कर लाभान्वित करना है। टंडन ने कहा कि इस परियोजना के तहत, स्लम में लाभार्थियों को 25-30 वर्ग मीटर के पक्के आवास दिए जाएंगे। लाभार्थियों को पेयजल, सीवरेज लाइन और बिजली कनेक्शन की बुनियादी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। क्रेच, शॉपिंग सेंटर, सामुदायिक भवन, अस्पताल आदि जैसी मूलभूत सुविधायें को झुग्गी पुनर्विकास परियोजनाओं में प्रावधान किए जाएंगे। इसके अलावा जिन लाभार्थियों को अपना स्वंय का व्यवसाय करने लिए एक दुकान होगी उनको दुकान भी दी जाएगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव, नगर विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन डॉ. रजनीश दुबे जी, निदेशक सूडा श्री उमेश प्रताप सिंह, अपर निदेशक सूडा श्री आलोक सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। गन्ना विकास कार्यक्रमों की शत्-प्रतिशत सफलता हेतु ठोस रणनीति तथा समग्र प्रयासों की आवश्यकतारू गन्ना आयुक्त। आगामी बुआई सत्र 2021-22 एवं 2022-23 हेतु शरदकालीन एवं बसन्तकालीन बुआई की कार्य योजना तैयार कर शत्-प्रतिशत लक्ष्यों को पूरा करने हेतु समीक्षा बैठक में निर्देश जारी।

परिक्षेत्रीय अधिकारी कोे विकास कार्यक्रमों की समीक्षा कर लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित कराने के दिये गये निर्देश

प्रदेश की 14 चीनी मिलों यथा- कुन्दरकी, इटईमैदा, रूदौली, मुण्डेरवा, हैदरगढ़, प्रतापपुर, पिपराईच, सठियांव, घोसी, देवबन्द, गांगनौली, गागलहेडी, विसौली एवं न्योली के गन्ना क्षेत्रफल एवं विकास कार्यक्रमों के सम्बन्ध में वर्चुअल समीक्षा बैठक का आयोजन आज गन्ना आयुक्त कार्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ। समीक्षा बैठक में मुख्यालय के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ फील्ड स्तर से सम्बन्धित परिक्षेत्रों के उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी एवं चीनी मिलों के प्रधान प्रबन्धकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। समीक्षा बैठक के दौरान पेराई सत्र 2020-21 में दिये गये लक्ष्यों के अनुसार कुछ चीनी मिलों की स्थिति संतोषजनक नहीं पायी गयी जिस पर गन्ना आयुक्त द्वारा नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये गये कि चीनी मिलों द्वारा आगामी बुआई सत्र 2021-22 एवं 2022-23 के लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाए तथा उस पर शत-प्रतिशत अमल करते हुए गन्ना बुआई के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया जाए। उन्होंने जिला गन्ना अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि वह चीनी मिलवार कार्य योजना तैयार करें तथा परिक्षेत्रीय अधिकारी अपने परिक्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले चीनी मिल क्षेत्रों की समीक्षा कर लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करायें। समीक्षा बैठक में गन्ना आयुक्त द्वारा यह भी निर्देशित किया गया कि मुख्यालय स्तर से भी जिलों में स्थापित पौधशालाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार की गयी पौध, टिशूकल्चर लैब में तैयार पौध एवं प्रगतिशील कृषकों द्वारा तैयार की गई पौध के आधार पर आगामी दो वर्ष हेतु बीज का आवंटन किया जाय। उन्होंने यह भी निर्देषित किया कि चीनी मिल क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकता के अनुसार बीज वितरण हेतु योजना तैयार की जाए तथा इस कार्य योजना पर सफलतापूर्वक अमल भी किया जाए।

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में नामित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों ने आज अपना पदभार किया ग्रहण

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यों, जातियों में सम्मिलन एवं रक्षोपायों से संबंधित शिकायतों तथा पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु योजनायें बनाने के सुझाव हेतु निर्धारित कार्यों को गति देने के लिए 17 जून, 2021 को उ0प्र0 राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में नामित अध्यक्ष, उपाध्यक्षगण तथा सदस्यगण ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में अध्यक्ष पद पर जसवन्त सिंह सैनी, उपाध्यक्ष पद पर हीरा ठाकुर तथा प्रभुनाथ चैहान ने अपना पदभार ग्रहण किया। सदस्य पर जगदीश पंाचाल, हरवीर पाल, चन्द्र पाल खड़गवंशी, श्री विजेन्द्र भाटी, राकेश कुशवाहा, बलराम मौर्य, रघुनंदन चैरसिया, शिव मंगल बियार, डा0 त्रिपुणायक विश्वकर्मा, राधेश्याम नामदेव, अरूण पाल, रमेश वर्मा निषाद, ममता राजपूत, श्री घनश्याम लोधी, सपना कश्यप, रवीन्द्र राजौरा एवं गिरीश वर्मा ने अपना पदभार ग्रहण किया।





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