विजय का बहरूपिया, जिसने पलटा चुनाव, स्टालिन को हराने वाले शख्स की कहानी

कोलाथूर विधानसभा क्षेत्र तमिलनाडु के चेन्नई जिले में पड़ता है। एक लिहाज से देखा जाए तो यह सबसे प्रमुख सीट मानी जाएगी क्योंकि खुद मुख्यमंत्री यहां से विधायक थे और यहीं से वीएस बाबू ने एमके स्टालिन को पटकनी दे दी है। कोलाथूर सीट से वीएस बाबू को 82997 वोट मिले थे। जबकि स्टालिन के खाते में है 74202 वोट। यानी स्टालिन 8795 वोटों के अंतर से अपनी सीट हार गए हैं।
कई बार उलटफेर इतना जोरदार होता है कि सत्ताधारी पार्टी तो चुनाव हारती ही है। खुद उस पार्टी का मुखिया और सूबे का मुख्यमंत्री भी अपनी सीट नहीं बचा पाता। तमिलनाडु में ऐसा ही हुआ। सत्ताधारी पार्टी डीएमके तो हारती ही दिख रही है। उसके मुखिया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद अपनी सीट हार गए हैं। स्टालिन अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। हराया किसने? उसी पार्टी के नेता ने जो पहली बार चुनाव लड़ रही थी यानी टी वीके। विजय की पार्टी ने कोलाथूर सीट से सीएम स्टालिन के खिलाफ वी एस बाबू को चुनावी मैदान में उतारा था। कोलाथूर विधानसभा क्षेत्र तमिलनाडु के चेन्नई जिले में पड़ता है। एक लिहाज से देखा जाए तो यह सबसे प्रमुख सीट मानी जाएगी क्योंकि खुद मुख्यमंत्री यहां से विधायक थे और यहीं से वीएस बाबू ने एमके स्टालिन को पटकनी दे दी है। कोलाथूर सीट से वीएस बाबू को 82997 वोट मिले थे। जबकि स्टालिन के खाते में है 74202 वोट। यानी स्टालिन 8795 वोटों के अंतर से अपनी सीट हार गए हैं।
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वीएस बाबू हैं कौन?
वीएस बाबू एक पुराने नेता और पूर्व विधायक हैं। 75 साल के वीएस बाबू पूर्व विधायक भी हैं। आज जिस डीएमके के सुप्रीमो स्टालिन को उन्होंने हराया। कभी इसी डीएमके के नेता भी हुआ करते थे। डीएमके की ही सीट पर साल 2006 में विधानसभा का चुनाव भी जीता था। तब सीट थी पूरा सावलकम। साल 2006 के चुनाव में उन्होंने 90,000 वोटों से एआईए डीएमके के उम्मीदवार को चुनाव में हराया था। 2026 तमिलनाडु चुनाव से ठीक 2 साल पहले जब विजय ने अपनी पार्टी टीवी बनाई तब वीएस बाबू डीएमके का ही हिस्सा थे। लेकिन 7 फरवरी 2026 को विजय की टीवी में वह शामिल हो जाते हैं। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें एमके स्टालिन के खिलाफ कोललाथूर सीट से उतारा। नतीजे बता रहे हैं कि डीवीके का फैसला सही था क्योंकि वीएस बाबू ने डीएमके को सबसे ज्यादा चुभने वाली चुनावी चोट दी है। वी एस बाबू का चुनाव प्रचार भी बेहद दिलचस्प था। उनकी पार्टी के सर्वे सर्वा यानी विजय तो ठहरे सुपरस्टार हर जगह जा नहीं सकते। जगह से लेकर सिक्योरिटी की व्यवस्था तक का मसला है। वैसे भी विजय बहुत ज्यादा रैलियां कर नहीं रहे थे। तो वीएस बाबू ने एक तरकीब निकाली। वह अपने साथ चुनाव प्रचार के दौरान विजय की तरह दिखने वाले लोगों को यानी बहरूपियों को लेकर जाते थे। लोग बड़ी संख्या में बहरूपियों को देखने आते थे। ना वीएस बाबू और ना ही स्टालिन को अंदाजा होगा कि ये टेक्निक उनके लिए जीत की वजहों में से एक बन सकती है। तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटों पर मतदान हुए थे।
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कभी डीएमके के थे सिपहसालार
बाबू साल 2006 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएम के उम्मीदवार के तौर पर पुरा सवालकम सीट से लड़े थे। उन्होंने एआईए डीएमके के अपने प्रतिद्वंदी को 90 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी थी। वीएस बाबू का पुराना चुनावी हलफनामा बताता है कि वह सिर्फ आठवीं तक पड़े हैं। लगभग 3 करोड़ 70 लाख की संपत्ति के मालिक हैं और उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है। कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2011 के इलेक्शन में डीएमके ने उन्हें कोलथुर विधानसभा सीट का चुनावी प्रभारी बनाया था। डीएमके का मजबूत गढ़ माने जाने वाली इस सीट के से एमके स्टालिन चुनाव लड़ रहे थे। जब चुनाव के नतीजे आए तो स्टालिन इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी एआईए डीएमके के एस एस दुरसामी का को मुश्किल से हरा पाए थे। मार्जिन सिर्फ 3000 वोटों की थी। कहा जाता है कि इसके बाद विधानसभा प्रभारी वीएस बाबू को तलब किया गया। करीबी मुकाबले पर उनसे सवाल जवाब हुए। इसके कुछ समय बाद बाबू ने डीएमके पार्टी छोड़ दी। वो एआईए डीएमके में शामिल हो गए। तमिलनाडु की राजनीतिक परिदृश्य में इसके बाद से वह वीएस बाबू ओझल हो चुके थे। फिर आती है फरवरी 2026 अभिनेता दलपति विजय ने ऐलान किया कि उनकी नई पार्टी टीवी के विधानसभा चुनाव लड़ेगी। 7 फरवरी 2026 को वी एस बाबू उनके साथ हो लिए। विजय की मौजूदगी में उन्होंने टीवी का दामन थाम लिया।
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