मतदाता किसानों की बात करने वालों का पक्ष लेंगे; हिंदू-मुस्लिम करने वालों का नहीं: टिकैत

rakesh tikait

टिकैत ने कहा कि उप्र में किसान संकट से गुजर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी उपज का कम मूल्य मिल रहा है और उन्हें अत्यधिक बिजली बिल का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उप्र विधानसभा चुनाव में प्रभावी मुद्दों के सवाल पर टिकैत ने कहा, किसानों, बेरोजगारों, युवाओं और मध्‍यम वर्ग के लिए महंगाई समेत तमाम मुद्दे हैं

लखनऊ। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश सिंह टिकैत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मतदाता केवल उन्हीं का पक्ष लेंगे जो किसानों के कल्याण की बात करते हैं और वे मोहम्‍मद अली जिन्ना एवं पाकिस्तान का नाम लेकर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने वालों का भला नहीं करेंगे। टिकैत ने कहा कि उप्र में किसान संकट से गुजर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी उपज का कम मूल्य मिल रहा है और उन्हें अत्यधिक बिजली बिल का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उप्र विधानसभा चुनाव में प्रभावी मुद्दों के सवाल पर टिकैत ने कहा, किसानों, बेरोजगारों, युवाओं और मध्‍यम वर्ग के लिए महंगाई समेत तमाम मुद्दे हैं लेकिन जिन्ना और पाकिस्तान पर नियमित बयानों के माध्‍यम से हिंदू-मुसलमानों के बीच ध्रुवीकरण की भावना भड़काने की कोशिश की जा रही है लेकिन ऐसा करने वालों का प्रयास सफल नहीं होगा बल्कि यह उन्हें नुकसान पहुंचाएगा।’’ टिकैत ने हालांकि किसी व्यक्ति और पार्टी का नाम नहीं लिया। 

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उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें पाकिस्तान का समर्थक और जिन्ना का उपासक बताया था। योगी की टिप्पणी स्पष्ट रूप से पाकिस्तान और इसके संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर सपा अध्यक्ष के हालिया बयानों को संदर्भित करती है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रचार करेंगे, टिकैत ने कहा, हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है। मैं राजनेता नहीं हूं, मैं राजनीतिक दलों से दूर रहता हूं। मैं केवल किसानों के मुद्दों के बारे में बात करता हूं और लोगों से अपने नेताओं से सवाल करने का आग्रह करता हूं। मैं किसानों के मुद्दे उठाता रहूंगा। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश में किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं। यहां के किसानों को उनकी उपज का कम मूल्य मिलता है और उन्हें बिजली की अत्यधिक दरों का भुगतान करने के लिए भी मजबूर होना पड़ता है। यह पूछे जाने पर कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव किस दिशा में जा रहा है, टिकैत ने कहा, ‘‘मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता कि चुनाव कहां जा रहा है या कौन सी पार्टी विजयी होगी। हालांकि, मैं जिन किसानों से मिलता हूं, वे वर्तमान स्थिति से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, उनके (किसानों) बच्चों के पास रोजगार का कोई रास्ता नहीं है। मुझे लगता है कि किसान और स्थानीय लोग जब मतदान के लिए जाएंगे तो वे इन बातों का ध्यान रखेंगे। उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से सात चरणों में मतदान होगा और परिणाम 10 मार्च को आएगा। 

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टिकैत ने उप्र में लोगों से मतगणना के दौरान जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की गतिविधियों पर नजर रखने का आग्रह किया और कहा कि ये अधिकारी सत्तारूढ़ दल का पक्ष ले सकते हैं।’’ पश्चिमी उप्र के मुजफ्फरनगर जिला निवासी टिकैत ने कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को आगे बढ़ा रहे हैं जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर खीरी हिंसा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है और वह घटना के सिलसिले में जेल में है। टिकैत ने कहा, ‘‘वास्तव में, मैं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामले से संबंधित कुछ मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लखनऊ आया हूं। लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए स्थानीय किसानों के परिवारों ने स्पष्ट कर दिया है कि न्याय तभी होगा जब कानून अजय मिश्रा टेनी के खिलाफ अपना काम करेगा और पुलिस ने अभी तक उन्हें मामले में आरोपी नहीं बनाया है।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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