CJP Jantar Mantar Protest Day 24 Updates: अब हम नहीं जाएंगे, सरकार आएगी...जंतर-मंतर से कॉकरोचों की हुंकार

पुलिस की कार्रवाई और भारी बारिश से बेपरवाह प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्टी ने केंद्र पर जनता की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी अहंकार के साथ काम कर रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन 24वें दिन में प्रवेश कर गया। एक दिन पहले "संसद चलो" मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद सुरक्षा कड़ी होने के बावजूद, पार्टी के समर्थक जंतर-मंतर पर अपना धरना जारी रखे हुए हैं। पुलिस की कार्रवाई और भारी बारिश से बेपरवाह प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्टी ने केंद्र पर जनता की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी अहंकार के साथ काम कर रही है।
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आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच सोमवार को पहली बार सीधा संपर्क हुआ। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत की। हालांकि अब कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि नड्डा से मिलना उनके लिए सिर्फ समय की बर्बादी थी। सीजेपी का कहना है कि उनकी मांगे अभी तक नहीं मानी गई है और इसलिए यह आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले सोमवार को सीजेपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने संसद की ओर मार्च करने से रोक दिया। इस दौरान भारी झड़प हुई और पुलिस ने खूब लाठियां बांझी। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के साथ बैठक बेकार रही। रांका ने कहा उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। अगली बार हम उनसे तब तक बात नहीं करेंगे जब तक वे विरोध स्थल पर नहीं आते। अगर वे समय की कदर नहीं करते तो हम भी उनके समय की कदर नहीं करेंगे। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मिलने के बाद बताया कि सोमवार को हुए लाठी चार्ज में एक लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई। उन्होंने एक्स पर लिखा बर्बर लाठी चार्ज में घायल होने के बाद आरएमएल में एक लड़की की हालत बेहद गंभीर है। सरकार ने युवाओं के खिलाफ इतनी बर्बरता आखिर क्यों दिखाई? मंगलवार तड़के जंतरमंतर और उसके आसपास कई लोग मौजूद हैं। ज्यादातर प्रदर्शनकारी मंच के सामने ही डटे रहे। केरल हाउस के पास शुरुआती धरने के बाद वे जंतरमंतर के मंच पर दोबारा पहुंचे। मंच के आसपास का इलाका अंधेरे में डूबा रहा क्योंकि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल की लाइटों की बिजली सप्लाई काट दी थी। मंच से करीब 150 से 200 फीट दूर जल रही दो-तीन स्ट्रीट लाइट की रोशनी ही एकमात्र जरिया थी। कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि उसके संसद चलो मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया। जिसमें कई छात्र घायल हो गए और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलिय अंगू के साथ भी धक्कामुक्की की गई। उनके बाल खींचने का दावा किया गया। जंतरमंतर पर मंच हटाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने केरल हाउस के निकट धरना जारी रखा। लाठियां तो सिर्फ पुलिस द्वारा चलाई गई है। हमारे बच्चों को मारा गया है। उनके सर फोड़े गए हैं। सड़कों पर घसीटा गया है उनको।
पुलिस के 'बर्बर' लाठीचार्ज के बाद लड़की गंभीर रूप से घायल
अभिजीत दीपके ने एक्स पोस्ट में दावा किया कि बर्बर लाठीचार्ज में घायल होने के बाद एक लड़की RML में गंभीर हालत में है। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के खिलाफ़ इतनी बर्बरता क्यों की?
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दिल्ली HC, CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के ख़िलाफ़ याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार
दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को एक PIL पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया। इस याचिका में पुलिस की बर्बर कार्रवाई पर न्यायिक दखल की मांग की गई है।
CJP के संस्थापक ने विरोध वाली जगह पर ‘पत्थरों से भरे ट्रकों’ पर सवाल उठाए
CJP के कन्वीनर अभिजीत दिपके ने मंगलवार को सोमवार को विरोध वाली जगह पर “पत्थरों से भरे ट्रकों” की मौजूदगी पर सवाल उठाए। ANI समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दिपके ने पत्रकारों से कहा, “और कल पत्थरों से भरे वे सभी ट्रक कहाँ से आए? दिल्ली पुलिस यहाँ परिंदे को भी पर नहीं मारने दे रही है। हमारे हर सदस्य की तलाशी ली जा रही है, उनके बैग और जेबें चेक की जा रही हैं। बैरियर से सब कुछ रोका जा रहा था; लोगों को अंदर नहीं आने दिया जा रहा था। ऐसे में जंतर-मंतर के आस-पास पत्थरों से भरे ट्रक कहाँ से आ गए?
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