CDS Anil Chauhan और NSA Ajit Doval ने जो कहा है वो दुश्मन के लिए खुली चेतावनी है

NSA Ajit Doval CDS Anil Chauhan
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भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का बयान बेहद निर्णायक और दूरगामी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य और संचालनात्मक कमियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर केवल परंपरागत सैन्य परेड देखने को नहीं मिलेगी बल्कि भारत की रणनीतिक चेतना, राष्ट्रीय इच्छाशक्ति और मनोवैज्ञानिक प्रभुत्व का आक्रामक उद्घोष भी दुनिया को देखने को मिलेगा। हम आपको बता दें कि कर्तव्य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर को केंद्र में रखकर भारतीय सेनाएं दुश्मनों को वह संदेश देने जा रही हैं जो शब्दों से नहीं बल्कि शक्ति से समझाया जाता है। वे लड़ाकू विमान जो सीमापार आतंकी ढांचों को नेस्तनाबूद कर चुके हैं, वह खुले आकाश में गरजते हुए यह स्पष्ट करेंगे कि भारत अपनी सैन्य क्षमता को न तो छुपाता है और न ही देर से दिखाता है। भारत सही समय, सही लक्ष्य और सही तीव्रता से प्रहार करता है।

इस परेड में भैरव बटालियन का पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आना केवल एक नई सैन्य इकाई का प्रदर्शन नहीं बल्कि भारत की बदली हुई युद्ध दृष्टि का एलान है। यह बटालियन उस नए भारत का चेहरा है जो तेज गति, सटीक प्रहार और दुर्गम क्षेत्रों में निर्णायक प्रभुत्व स्थापित करने में विश्वास रखता है। इसका संदेश सीधा है कि भविष्य के संघर्ष लंबे नहीं होंगे लेकिन परिणाम ऐसे होंगे जिनसे विरोधी की सोच ही टूट जाएगी।

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इसी संदर्भ में भारत के सीडीएस अनिल चौहान का बयान बेहद निर्णायक और दूरगामी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य और संचालनात्मक कमियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा हाल में किया गया सैन्य पुनर्गठन उसकी मजबूती का प्रमाण नहीं बल्कि उसकी विफलताओं की खुली स्वीकारोक्ति है। सीडीएस ने कहा कि कमान और नियंत्रण व्यवस्था में किए गए बदलाव इस बात का संकेत हैं कि वह भारतीय दबाव को सहन नहीं कर पाया और उसकी पुरानी रणनीति ध्वस्त हो चुकी है।

सीडीएस ने यह भी रेखांकित किया कि भविष्य के युद्ध अब केवल जमीन हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध और तकनीकी बढ़त अब निर्णायक हथियार बन चुके हैं। भारत इस वास्तविकता को स्वीकार कर चुका है और उसी के अनुरूप अपनी सैन्य संरचना को ढाल रहा है। एकीकृत थियेटर कमान की अवधारणा इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है जहां थल, वायु और नौसेना एक साझा लक्ष्य और साझा रणनीति के तहत एक ही मुट्ठी बनकर कार्य करेंगी। उन्होंने साफ कहा कि गलत सूचना और दुष्प्रचार आने वाले युद्धों में उतने ही खतरनाक होंगे जितने मिसाइल और ड्रोन और भारत इसके लिए एक संगठित और समयबद्ध तंत्र तैयार कर रहा है। सीडीएस का यह बयान बताता है कि भारत अब केवल हथियारों से नहीं बल्कि सोच, संगठन और रणनीति से भी युद्ध जीतने की तैयारी में है।

इसी रणनीतिक दृष्टि को और अधिक स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने युद्ध की वास्तविक प्रकृति को निडर और कठोर शब्दों में परिभाषित किया है। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में उन्होंने कहा कि युद्ध किसी विकृत आनंद या हिंसा की तृप्ति के लिए नहीं लड़े जाते। युद्ध का उद्देश्य दुश्मन के शव गिनना नहीं बल्कि उसके मनोबल को तोड़ना होता है। उन्होंने साफ कहा कि युद्ध इसलिए लड़े जाते हैं ताकि किसी राष्ट्र की इच्छाशक्ति को इस हद तक कुचल दिया जाए कि वह हमारी शर्तों पर झुकने को मजबूर हो जाए।

अजित डोभाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि युद्ध का असली मैदान सीमा रेखा नहीं बल्कि राष्ट्र की मानसिक दृढ़ता होती है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जहां भी संघर्ष चल रहे हैं वहां शक्तिशाली देश अपनी इच्छाशक्ति दूसरों पर थोपने के लिए बल का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई देश इतना सक्षम है कि उसे कोई चुनौती देने का साहस न कर सके तभी वह वास्तव में स्वतंत्र है। लेकिन यदि हथियार संसाधन और तकनीक होने के बावजूद राष्ट्र का मनोबल कमजोर है तो वह सभी साधन निरर्थक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस मनोबल को जीवित और अडिग रखने के लिए सबसे जरूरी तत्व है दृढ़ और स्पष्ट नेतृत्व।

देखा जाये तो सीडीएस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के ये वक्तव्य मिलकर भारत की नई युद्ध नीति को पूरी तीव्रता से सामने रखते हैं। यह नीति केवल जवाब देने की नहीं बल्कि विरोधी की इच्छाशक्ति को जड़ से निष्प्रभावी करने की है। साथ ही भैरव बटालियन जैसे विशेष बल, एकीकृत कमान की संरचना और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से भारत यह संदेश दे चुका है कि वह अब प्रतिक्रिया नहीं बल्कि परिणाम तय करता है।

बहरहाल, गणतंत्र दिवस पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रदर्शन केवल अतीत की सफलता का उत्सव नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक खुली चेतावनी है। यह चेतावनी साफ है कि भारत के खिलाफ किसी भी दुस्साहस की कीमत दुश्मनों को केवल सीमा पर नहीं बल्कि मनोबल के स्तर पर भी चुकानी पड़ेगी।

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