FIR नहीं तो कार्रवाई क्यो? Rajya Sabha Nomination पर Owaisi ने EC को घेरा

Owaisi
ANI
अंकित सिंह । Jun 11 2026 5:27PM

AIMIM प्रमुख ओवैसी ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, तर्क दिया कि बिना FIR के क्या कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक निजी शिकायत के आधार पर नामांकन खारिज करना नामांकन पात्रता मानदंडों पर गहन विचार की मांग करता है।

AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया पर चिंता जताई। मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के नामांकन फॉर्म के नियम के अनुसार, अगर आपके खिलाफ कोई FIR दर्ज है, तो आपको इसकी जानकारी देनी होती है। अब, उनका कहना है कि कोई FIR नहीं है। इस मामले में, आगे क्या कदम उठाए जाएं, इसके लिए चुनाव आयोग से सलाह लेनी होगी।

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उन्होंने राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के उस पुराने बयान का ज़िक्र किया जिसमें कहा गया था कि उनके ख़िलाफ़ कोई FIR दर्ज नहीं है और यह मामला सिर्फ़ एक निजी शिकायत से जुड़ा है। ओवैसी ने कहा कि अगर कोई FIR ही नहीं है, तो क्या कार्रवाई की जा सकती है? पहले BNSS के तहत, अगर आप कोर्ट में शिकायत करते थे, तो कोर्ट उसे आगे भेजकर FIR दर्ज करने का आदेश दे सकता था। अब ऐसा नहीं है।

ओवैसी ने आगे कहा कि सिंघवी के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नटराजन के खिलाफ अभी कोई FIR दर्ज नहीं है, बल्कि सिर्फ़ एक प्राइवेट शिकायत है और उन्हें कोर्ट में पेश होने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी सच्चाई तो नहीं पता, लेकिन मैंने जो सुना और अखबारों में पढ़ा है, उसके अनुसार सिंघवी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई FIR नहीं है। ये टिप्पणियां राज्यसभा नामांकन के लिए पात्रता मानदंडों और इस प्रक्रिया के दौरान लंबित शिकायतों या कानूनी मामलों से निपटने के तरीकों को लेकर चल रही बहस के बीच आई हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि नामांकन दाखिल करते समय FIR सहित सभी ज़रूरी जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए।

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मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन के नॉमिनेशन (नामांकन) के रद्द होने पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस का दस-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला। कांग्रेस सांसद और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फ़ैसले को "गलत" और 'जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) के ख़िलाफ़ बताया। उन्होंने कहा कि नटराजन के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले में अभी तक संज्ञान (cognisance) लेने का चरण नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट, नटराजन के नॉमिनेशन पेपर रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। सीनियर वकील सिंघवी ने जस्टिस पीके मिश्रा और अतुल एस. चंदुरकर की बेंच के सामने यह मामला रखा। उन्होंने इसे सचमुच ज़रूरी मामला बताते हुए जल्द सुनवाई या एक लाइन का अंतरिम आदेश देने की मांग की।

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