क्या सोनभद्र से कांग्रेस की जमीन को यूपी में मजबूत कर पाएंगी प्रियंका गांधी?

By अंकित सिंह | Publish Date: Jul 19 2019 6:25PM
क्या सोनभद्र से कांग्रेस की जमीन को यूपी में मजबूत कर पाएंगी प्रियंका गांधी?
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प्रियंका गांधी की यह सक्रियता ऐसे समय में है जब उनकी पार्टी पूरी तरीके से शिथिल पड़ी हुई है और नेता नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरह की घटनाएं हो रही हैं पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता उत्तर प्रदेश में ही ज्यादा है। प्रियंका गांधी की यह सक्रियता ऐसे समय में है जब उनकी पार्टी पूरी तरीके से शिथिल पड़ी हुई है और नेता नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं। ऐसे में प्रियंका की इस सक्रियता के कई मायने निकाले जा रहे हैं। बता दें कि प्रियंका गांधी को लोकसभा चुनाव से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया था। उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हाल में ही सोनभद्र में हुए हत्याकांड के बाद प्रियंका पीड़ितों से मिलने पहुंच गईं। प्रियंका के इस काफिले को पुलिस ने रोक दिया और बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सत्ता पक्ष प्रियंका पर इस मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहा है। प्रियंका भी डटी हुई हैं और पीड़ितों से मिलने की बात कह रही हैं। 



दरअसल, बुधवार को सोनभद्र के मूर्तिया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो गुटों में झड़प हो गई और इसमें 10 लोगों की जान चली गई। यह विवाद जमीन कब्जाने को लेकर ग्रामीणों के बीच का था और बताया जा रहा है कि गांव के बाहरी इलाके में सैकड़ों बीघा खेत है जिस पर गांव के कुछ लोग पुश्तैनी तौर पर खेती करते आ रहे हैं। इस घटना के बाद योगी सरकार निशाने पर है। हालांकि इस मामले में यह भी कहा जा रहा है कि यह सीधा कानून व्यव्सथा से नहीं जुड़ा हुआ है। योगी ने भी इसे लेकर कांग्रेस पर प्रहार किया और कहा कि कांग्रेस के शासन काल के दौरान वनवासियों की जमीन को एक सोसायटी के नाम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 1955 से 1989 तक यह जमीन आदर्श सोसायटी के नाम पर थी। 1989 में जमीन को एक व्‍यक्ति के नाम पर चढ़ा दिया। सोनभद्र के अलावा यूपी के संभल में दो पुलिसवालों की हत्या कर दी गई है और फैजाबाद में एक सपा नेता का मर्डर हुआ है पर प्रियंका का फोकस सोनभद्र पर ही है।
प्रियंका पर इसे लेकर राजनीति करने का आरोप लग रहा है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह अपनी हर सभाओं में प्रियंका ने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र किया उसके बाद यह लगातार कहा जा रहा है कि प्रियंका उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के संगठन को मजबूत कर रही हैं। इसी कड़ी में वह लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। प्रियंका लगातार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमले कर रही हैं। लेकिन 2022 से पहले प्रियंका के लिए इस साल होने वाले उपचुनाव अग्नि परीक्षा है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल 13 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सपा-बसपा पहले ही अलग-अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस भी प्रियंका के सहारे जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। प्रियंका उत्तर प्रदेश में लगातार लोगों से मिल रही हैं और कांग्रेस में जान डालने की कोशिश कर रही हैं। यही कारण है कि कभी-कभी प्रियंका को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठ जा रही है। 


भले ही जो भी हो, पर राजनीतिक पंडित भी मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में अगर कांग्रेस को कोई खड़ा कर सकता है तो वह प्रियंका ही हैं। प्रियंका को लेकर राज्य के नेताओं के बीच गुटबाजी भी कम होगी और वह उनके साथ भी चल सकेंगे। प्रियंका इससे पहले रायबरेली और अमेठी में लगातार सक्रिय रही हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि प्रियंका की वजह से ही इस बार रायबरेली की सीट से सोनिया गांधी जीती हैं। लोगों का यह भी मानना है कि प्रियंका भावानात्मक रूप से जनता को खुद से जोड़ सकती हैं। हालांकि प्रियंका की जो पहली परीक्षा थी उसमें वह कुछ खास नहीं कर पाईं और अमेठी की सीट भी कांग्रेस पार्टी के हाथ से निकल गयी। कांग्रेस पार्टी का पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी बुरा प्रदर्शन भी रहा। अब यह देखना होगा कि योगी आदित्यनाथ को प्रियंका उत्तर प्रदेश में सीधी टक्कर दे पाती हैं या फिर इन्हें किसी अन्य पार्टी की बैसाखी की जरूरत पड़ती है। 


 

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