कौशल विकास मिशन के तहत 20 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगाः मुख्यमंत्री

Youth get employment through skill development initiatives: CM Raghubar Das
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि कौशल विकास मिशन अपने अभियान के तहत 2022 तक 20 लाख युवाओं को रोजगार देना सुनिश्चित करेगा

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि कौशल विकास मिशन अपने अभियान के तहत 2022 तक 20 लाख युवाओं को रोजगार देना सुनिश्चित करेगा। दास ने झारखंड मंत्रालय में आयोजित झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए बड़ी संख्या में युवाओं को हुनरमंद बनाने की दिशा में प्रयास किया जाए। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़े निबंधित श्रमिकों की पेंशन राशि 750 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने की घोषणा की। वर्ष 2022 तक झारखंड से गरीबी समाप्त करना ही नये भारत व नये झारखंड की सोच है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जनवरी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर राज्य के 25 हजार युवाओं को रोजगार से संबंधित नियुक्ति पत्र सौंपे जायेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। जापान जैसे देश को अभी एक लाख कुशल लोगों की जरूरत है। यदि हम अपने युवाओं को प्रशिक्षित कर दें, तो उन्हें विदेशों में भी नौकरी मिल जायेगी। दास ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग, अस्पताल, स्कूल, बड़े मॉल आ रहे हैं। इनके लिए हुनरमंद लोगों की जरूरत है। इन्हीं जरूरतों को समझते हुए बच्चों को प्रशिक्षित करें। कम्पनी अपनी आवश्यकता के अनुरूप युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दे तथा उन्हें अपनी कम्पनी में रोजगार दें। इसके लिए जरूरत हो, तो राज्यस्तरीय नीति बना लें, जो सभी विभागों के लिए मान्य होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के शहीद ग्राम में किसी भी परिवार में कोई बेरोजगार नहीं रहे। इन ग्रामों को रोजगारयुक्त गांव बनाये। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन ग्रामों में टीम बनाकर भेजें, जोबेरोजगारों की सूची तैयार करेगी। इन बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता एवं रुचि के अनुसार प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भवन निर्माण से जुड़े निबंधित 6.5 लाख मजदूरों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ें, ताकि वे अपने परिवार को बीपीएल की श्रेणी से बाहर ला सकें। गरीबी मिटाने के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा के अभाव में गरीब के बच्चे भी गरीब ही रह जा रहे हैं और बीपीएल परिवारों को संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों को चिह्नित कर सरकारी या निजी स्कूलों में इनका नामांकन कराये।

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