Suryakant Tripathi Birth Anniversary: Hindi Literature के महाप्राण 'निराला', जिनके संघर्षों की गूंज आज भी कविताओं में है ज़िंदा

आज ही के दिन यानी की 21 फरवरी को हिंदी साहित्य और छायावाद के अमिट स्तंभ महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म हुआ था। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उनका यह संघर्ष उनकी कविताओं में भी झलकता है।
हिंदी साहित्य और छायावाद के अमिट स्तंभ महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी को हुआ था। उन्होंने उपन्यास, कहानियां और निबंध लिखे, लेकिन वह अपनी कविताओं की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित रहे। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उनका यह संघर्ष उनकी कविताओं में भी झलकता है। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
मिदनापुर में 21 फरवरी को सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बांग्ला में की थी। मेट्रिक के बाद उन्होंने घर में रहकर अग्रेंजी साहित्य और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी मां का बचपन में ही निधन हो गया था। वहीं कम उम्र में सूर्यकांत त्रिपाठी की भी शादी हो गई थी। लेकिन जब वह 20 साल के हुए तो उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो गई। पत्नी की मृत्यु के कुछ समय बाद ही उनकी बेटी की भी मौत हो गई थी।
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काव्य संग्रह
सूर्यकांत त्रिपाठी के प्रसिद्ध काव्य संग्रह- गीतिका, तुलसीदास, बेला, नये पत्ते, सांध्य काकली, अपरा, अनामिका, परिमल, कुकरमुत्ता, अणिमा, अर्चना, अराधना, गीत कुंज आदि हैं।
उपन्यास
वहीं उन्होंने 'अलका', 'कुल्ली भाट', 'प्रभावती', 'अलका', 'निरुपमा' और 'अप्सरा' जैसे उपन्यास लिखे हैं।
इस कवियत्री को मानते थे बहन
निराला ने हिंदी साहित्य को मजबूत बनाने का काम किया था। साथ ही उन्होंने पूरे मानव समाज को भी सार्थक बनाने का काम किया था। वह हिंदी के बड़े कवि और साहित्यकार थे। उनके पास रॉयलटी का पैसा भी नहीं रहता था। एक बाद कवियत्री महादेवी वर्मा ने निराला से कहा कि उनका सारा रुपया वह रखेंगी। जिससे कि कुछ रुपया बच सके और भविष्य में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के काम आ सके। महादेवी उनके लिए छोटी बहन थीं। इसलिए वह अपना सारा पैसा महादेवी वर्मा को दे देते थे और जरूरत पड़ने पर उनसे मांगते थे।
मृत्यु
अपने अंतिम समय में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला प्रयागराज के दारागंज मोहल्ले में रहते थे। वहीं स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका 15 अक्तूबर 1961 को निधन हो गया था।
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