असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 22, 2016   14:42
  • Like
असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

देश की स्वाधीनता की हसरत लिए वह गांधी जी के विचारों से असहमत होने के बावजूद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका अपने छोटे भाई वल्लभ भाई पटेल की तरह जनाधार नहीं था।

सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई विट्ठल भाई पटेल एक महान राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने कभी भी झुकना नहीं सीखा। शुरू में महात्मा गांधी से प्रभावित रहे विट्ठल भाई चौरी चौरा की घटना के बाद महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने से काफी विचलित हुए थे और इसी के चलते वह नरम दल से गरम दल के नेता बन गए। सन 1871 में गुजरात के नाडियाद में जन्मे विट्ठल भाई पटेल काफी मेधावी थे और इसी कारण वह पढ़ाई के लिए लंदन जाने में सफल रहे। वहां उन्होंने तीन साल तक पढ़ाई की और अपनी कक्षा में प्रथम आए। वह 1913 में गुजरात लौटे और देखते ही देखते एक प्रभावशाली वकील के रूप में मशहूर हो गए। वह बम्बई और अहमदाबाद की अदालतों में वकील रहे।

देश की स्वाधीनता की हसरत लिए वह गांधी जी के विचारों से असहमत होने के बावजूद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका अपने छोटे भाई वल्लभ भाई पटेल की तरह जनाधार नहीं था लेकिन इसके बावजूद वह एक अत्यंत प्रभावशाली नेता थे। विट्ठल भाई 1923 में सेंट्रल असेंबली के प्रतिनिधि के रूप में चुने गए और 1925 में वह असेंबली के अध्यक्ष चुन लिए गए। पटेल पर शोध कार्य करने वाले हरनाम सिंह के अनुसार चौरी चौरा की घटना के बाद गांधी जी ने जब असहयोग आंदोलन वापस ले लिया तो विट्ठल भाई काफी विचलित हो गए। उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और चितरंजन दास तथा मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की।

विट्ठल भाई जहां गांधी जी के विचारों से असहमत थे वहीं राष्ट्रपिता द्वारा आजादी के लिए शुरू किए गए सभी आंदोलनों का उन्होंने समर्थन किया। वह कांग्रेस छोड़ चुके थे लेकिन जब गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया तो उन्होंने इसके समर्थन में असेंबली से इस्तीफा दे दिया। पूर्ण स्वराज की मांग की घोषणा किए जाने पर वह दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए। आंदोलन में शामिल होने पर अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें 1931 में रिहा कर दिया गया ताकि वह उपचार के लिए यूरोप जा सकें। 

विट्ठल भाई पटेल ने नमक सत्याग्रह के अंत में फिर से कांग्रेस छोड़ दी और महात्मा गांधी के कटु आलोचक और सुभाष चंद्र बोस के घनिष्ठ सहयोगी हो गए। सुभाष चंद्र बोस को भी खराब स्वास्थ्य के चलते रिहा कर दिया गया। पटेल और बोस दोनों इलाज के लिए विएना पहुंचे चूंकि दोनों देशभक्तों के राजनीतिक विचार एक जैसे थे इसलिए वे एक दूसरे के बेहद करीब आ गए। दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा− क्योंकि राजनीतिक नेता महात्मा गांधी विफल हो चुके हैं− इसलिए नेतृत्व परिवर्तन आवश्यक है।

दोनों नेताओं ने जंग−ए−आजादी के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से समूचे यूरोप की यात्रा की और आयरलैंड के राष्ट्रपति से भी मिले। यूरोप में बोस के स्वास्थ्य में सुधार होता गया जबकि पटेल की हालत और बिगड़ गई। अंततः 22 अक्तूबर 1933 को जिनेवा में उनका निधन हो गया। उन्होंने लगभग एक लाख 20 हजार रुपए की संपत्ति राजनीतिक कार्यों के लिए सुभाष चंद्र बोस के नाम कर दी थी। विट्ठल भाई का शव भारत लाया गया और 10 नवम्बर 1933 को मुम्बई में उनका अंतिम संस्कार हुआ।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept