मच्छर, हाथी, घोड़ा और बिच्छू… Gujarat के इन अजीब Surnames से जुड़ी कहानी सुनकर चौंक जाएंगे!

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गुजराती समाज में विशेषकर कुछ नागर ब्राह्मण, ब्रह्मक्षत्रिय और लोहाना समुदायों में पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों से जुड़े कई उपनाम मिलते हैं। इनमें घोड़ा, मांकड़ यानी खटमल, मांकड़ी यानी बड़ी चींटी, पोपट यानी तोता, विंछी यानी बिच्छू, शियाल यानी सियार, तीतर और हाथी जैसे उपनाम शामिल हैं।

फ्लाईदुबई की एक उड़ान में संकट टालने वाले कप्तान स्मित मच्छर का नाम सामने आया तो उनकी बहादुरी के साथ उनके अनोखे उपनाम ने भी लोगों का ध्यान खींचा। ‘मच्छर’ नाम सुनकर भले ही पहले उड़ने वाले कीट की तस्वीर सामने आए, लेकिन यहां बात एक ऐसे पायलट की है, जिसने 9/11 जैसे आतंकी हमले को घटित होने से रोका और सभी विमान यात्रियों की जान बचाई। स्मित मच्छर नाम ने गुजरात के उन अनोखे उपनामों की कहानी भी सामने ला दी, जिनमें पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों के नाम पीढ़ियों से लोगों की पहचान बने हुए हैं।

हम आपको बता दें कि गुजराती समाज में विशेषकर कुछ नागर ब्राह्मण, ब्रह्मक्षत्रिय और लोहाना समुदायों में पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों से जुड़े कई उपनाम मिलते हैं। इनमें घोड़ा, मांकड़ यानी खटमल, मांकड़ी यानी बड़ी चींटी, पोपट यानी तोता, विंछी यानी बिच्छू, शियाल यानी सियार, तीतर और हाथी जैसे उपनाम शामिल हैं। यानी एक ही सामाजिक संसार में कहीं मच्छर भनभना रहा है, कहीं बिच्छू डंक मार रहा है, कहीं घोड़ा दौड़ रहा है और कहीं हाथी चिंघाड़ रहा है!

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इस कहानी में कैप्टन मनोज हाथी का किस्सा भी बेहद दिलचस्प है। एयर इंडिया में संचालन विभाग के पूर्व निदेशक रहे कैप्टन हाथी का उपनाम सचमुच ‘हाथी’ है। जब उन्होंने बोइंग 747 जैसे विशाल जंबो विमान को उड़ाने के लिए प्रशिक्षण लिया, तो उनके साथियों को मजाक करने का एक और मौका मिल गया। कैप्टन हाथी ने मीडिया को बताया कि एयर इंडिया में उनके समय कप्तान वाघ और पारसी इनफ्लाइट पर्यवेक्षक होमी घोड़ा भी थे। यानी विमानन जगत में उनके आसपास ही पूरा ‘जंगल’ बसा हुआ था।

विदेश में भी कैप्टन हाथी के नाम ने खूब ध्यान खींचा, लेकिन वहां इसे याद रखना लोगों के लिए आसान था। ब्रिटेन में कई लोग उनके नाम को ‘द जंगल बुक’ के मशहूर किरदार कर्नल हाथी से जोड़ लेते थे। भारत में लोग अक्सर उनसे मजाक में पूछते थे कि जब उपनाम हाथी है तो इतने दुबले क्यों हैं? अब वजन थोड़ा बढ़ा तो मजाक भी बदल गया। लोग कहने लगे कि अब कैप्टन हाथी अपने नाम के साथ पूरी तरह न्याय कर रहे हैं।

इसके अलावा, गुजरात के जूनागढ़ के नागर समुदाय से जुड़े फिल्मकार अभिलाष घोड़ा भी अपने उपनाम को गर्व से धारण करते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका कहना है कि गुजरात से बाहर यह नाम अक्सर लोगों का ध्यान खींचता है, लेकिन उनके परिवार ने इसे पीढ़ियों से सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपनाया है। हालांकि परिवार के कई लोगों को भी यह निश्चित रूप से पता नहीं कि इस उपनाम की मूल उत्पत्ति क्या रही होगी।

वहीं ‘मच्छर’ उपनाम का संबंध गुजरात के ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय से बताया जाता है। वाधवान स्थित समुदाय संस्था के सचिव राजू दुबल के अनुसार, सुरेंद्रनगर सहित गुजरात के कुछ इलाकों में यह उपनाम विशेष रूप से देखने को मिलता है। अहमदाबाद की भारती विंछी भी ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय से आती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे उपनाम समुदाय में संख्या की दृष्टि से कम हैं। परिवार में बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार उनके पूर्वज कीटों के काटने, खासकर बिच्छू के डंक का उपचार करने में दक्ष माने जाते थे। इसी कारण बिच्छू से जुड़ा नाम समुदाय की पहचान का हिस्सा बन गया। इस परंपरा में केवल पशु-पक्षी और कीट ही नहीं, बल्कि भूत और जोगी जैसे उपनाम भी मिलते हैं।

इस पूरे मामले पर समाजशास्त्री गौरांग जानी का कहना है कि गुजराती उपनामों के इतिहास पर विनोदिनी नीलकंठ की 1942 में प्रकाशित पुस्तक ‘गुजराती अटकाओं नो इतिहास’ अब भी महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण स्रोत मानी जाती है। उनके अनुसार, ऐसे उपनामों को संभावित रूप से ‘टोटेम’ परंपराओं से जोड़ा जा सकता है। अर्थात किसी समूह का किसी विशेष पशु के प्रति सम्मान, उससे जुड़ाव या उसके सकारात्मक गुणों को अपनाने की सामाजिक परंपरा रही थी। गौरांग जानी के मुताबिक सौराष्ट्र में ऐसे उपनामों की अधिकता का कारण बड़े जातीय ढांचे से ज्यादा वहां के करीबी और आपस में जुड़े समुदायों की मजबूत सामाजिक संरचना हो सकती है।

बहरहाल, अगली बार जब किसी खबर में कैप्टन मच्छर, कैप्टन हाथी या कोई घोड़ा दिखाई दे, तो नाम पर मुस्कुराने से पहले कहानी जरूर समझिए। क्योंकि गुजरात के इन उपनामों के पीछे केवल मजेदार शब्द नहीं, बल्कि समुदाय, परंपरा, पेशे, लोकविश्वास और सदियों पुरानी सामाजिक स्मृतियों की पूरी कहानी छिपी हो सकती है। और हां, मच्छर का विमान उड़ाना जितना असामान्य सुनाई देता है, हाथी का जंबो जेट उड़ाना उससे कहीं ज्यादा शानदार संयोग है!

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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