राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देश का पायलट इजराइली उड़ानें संचालित नहीं कर सकता, फिर Omani Co-Pilot कैसे Flydubai Flight में आ गया?

Cockpit Attack
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30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में 170 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या इजरायली यात्रियों की थी। उड़ान के दौरान ओमानी सह-पायलट ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छार पर हमला किया और विमान को अपने नियंत्रण में लेकर उसे गिराने की कोशिश की।

दुनिया भर में अपनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र के लिए पहचाने जाने वाले इजरायल की अपनी ही सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी खामी अब सवालों के घेरे में है। दरअसल, दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के कॉकपिट में हुए घटनाक्रम ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब इजरायल के नियम ऐसे देशों के पायलटों को उसके यहां उड़ान संचालित करने की इजाजत ही नहीं देते, जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं, तो फिर ओमान का पायलट हमाम अल हमामी आखिर इजरायल जाने वाली उड़ान को उड़ाता हुआ तेल अवीव तक पहुंच कैसे गया?

उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में 170 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या इजरायली यात्रियों की थी। उड़ान के दौरान ओमानी सह-पायलट ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छार पर हमला किया और विमान को अपने नियंत्रण में लेकर उसे गिराने की कोशिश की। विमान कुछ ही सेकंड में हजारों मीटर नीचे आ गया। घायल कप्तान ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने हमलावर को काबू किया। अंततः विमान सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।

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हम आपको बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है वह यह है कि ओमानी पायलट इजरायल जा रहे विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुँच गया? चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 के अब्राहम समझौते के बाद बनाए गए इजरायली सुरक्षा नियमों में उन देशों के पायलटों को इजरायल आने वाली उड़ानें संचालित करने से रोकने का प्रावधान था, जिनके इजरायल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। ओमान का इजरायल से राजनयिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलट फ्लाईदुबई जैसी विदेशी एयरलाइनों के साथ इजरायल आ चुके थे।

यहीं से इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे गंभीर सवाल खड़ा होता है। रिपोर्ट के अनुसार, शिन बेट ने विदेशी एयरलाइनों के पायलटों की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की स्वतंत्र जांच करने की बजाय एयरलाइनों पर भरोसा किया कि वे ऐसे पायलटों को इजरायल न लाएं। यानी जिस व्यवस्था को अंतिम सुरक्षा दीवार होना चाहिए था, वहां भरोसा जांच का विकल्प बन गया। अब यह भी जांच के घेरे में है कि विमानन सुरक्षा संचालन केंद्र और परिवहन मंत्रालय ने विदेशी एयरलाइनों के चालक दल की निगरानी कैसे की? दिलचस्प बात यह भी है कि राज्य नियंत्रक कार्यालय ने 2024 में ही हवाई यात्रा से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा की सिफारिश की थी।

देखा जाये तो सवाल केवल राष्ट्रीयता का नहीं है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार आरोपी ओमानी सह-पायलट को कथित तौर पर ओमान में उड़ान से पहले सुरक्षा जोखिम माना गया था और उसे कट्टरपंथ संबंधी चिंताओं के कारण विमानन प्रशिक्षण से हटाया गया था। इसके बावजूद बाद में उसे फ्लाईदुबई में नौकरी मिली। उधर, इस घटना ने इजरायल की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के सामने भी असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों एजेंसियां यानि शिन बेट और मोसाद अब जांच में शामिल हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात के संघीय अभियोजक ने अब इस घटना को संभावित आतंकी कृत्य मानकर जांच शुरू की है और यह पता लगाया जा रहा है कि हमला पहले से योजनाबद्ध था या किसी बाहरी संगठन अथवा व्यक्ति के निर्देश पर किया गया।

वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि आरोपी ने कथित तौर पर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर प्रशिक्षण पाया था और वह विमान गिराने के इरादे से आगे बढ़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि उसके पीछे कोई सहयोगी था या ईरान की कोई भूमिका थी। हालांकि ईरानी संलिप्तता का अब तक कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है और जांच जारी है।

इस पूरी घटना में भारतीय कप्तान स्मित मच्छार और यात्रियों की भूमिका निर्णायक रही। घायल होने के बावजूद कप्तान ने कॉकपिट खोलने में सफलता पाई, जबकि यात्रियों और विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलटों ने हमलावर को दबोचकर विमान को बचाने में मदद की। मच्छार को बाद में अबूधाबी ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

बहरहाल, अब इजरायल के सामने चुनौती सिर्फ एक हमलावर की पहचान करने की नहीं है। चुनौती यह पता लगाने की है कि जिस सुरक्षा व्यवस्था पर दुनिया की सबसे कड़ी विमानन सुरक्षा प्रणालियों में से एक होने का दावा किया जाता है, उसकी सबसे अहम परत आखिर इतनी आसानी से पार कैसे हो गई? एक पायलट कॉकपिट में हथियार लेकर पहुंच गया, विमान को हजारों फुट नीचे ले गया और यात्रियों को खुद अपनी जान बचाने के लिए कॉकपिट में घुसना पड़ा, यह कहानी किसी भी सुरक्षा तंत्र के लिए सामान्य चेतावनी नहीं, बल्कि लाल अलार्म है।

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