दूरदराज क्षेत्रों में कोविड-19 के परीक्षण के लिए नई मोबाइल लैब

दूरदराज क्षेत्रों में कोविड-19 के परीक्षण के लिए नई मोबाइल लैब

इस मोबाइल टेस्टिंग लैब की एक अनूठी विशेषता कोविड-19 के अलावा अन्य संक्रामक रोगों के निदान में इसकी उपयोगिता है। सीजीएचएस दरों के अनुसार इस मोबाइल परीक्षण सुविधा में टीबी एवं एचआईवी जैसी अन्य बीमारियों के परीक्षण भी किए जा सकते हैं।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच, विशेष रूप से देश के दूरदराज के भागों में कोविड-19 के संदिग्ध लोगों के परीक्षण में तेजी लाने का प्रयास तेज किया जा रहा है। ऐसी ही पहल के अंतर्गत एक मोबाइल डायग्नोस्टिक यूनिट आई-लैब (संक्रामक रोग डायग्नोस्टिक लैब) हाल में शुरू की गई है। आई-लैब से दूरस्थ क्षेत्रों में कोविड-19 परीक्षण के विस्तार में मदद की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने गुरुवार को इस मोबाइल प्रयोगशाला का उद्घाटन किया है। 

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आई-लैब; बायोसेफ्टी लेवल (बीएसएल)-2 स्तर की एक मोबाइल प्रयोगशाला है, जिसमें ऑन-साइट एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट परीक्षण (एलिसा), आरटी-पीसीआर, और बायो केमिस्ट्री एनालाइजर मौजूद हैं। इस सुविधा में आरटी-पीसीआर तकनीक से प्रतिदिन 50 परीक्षण और एलिसा से लगभग 200 परीक्षण किए जा सकते हैं। डॉ हर्षवर्धन ने कहा है कि मशीनों के दोहरे सेट से 8 घंटे की शिफ्ट में परीक्षण की क्षमता को प्रतिदिन 500 तक बढ़ाया जा सकता है। 

इस मोबाइल टेस्टिंग लैब की एक अनूठी विशेषता कोविड-19 के अलावा अन्य संक्रामक रोगों के निदान में इसकी उपयोगिता है। सीजीएचएस दरों के अनुसार इस मोबाइल परीक्षण सुविधा में टीबी एवं एचआईवी जैसी अन्य बीमारियों के परीक्षण भी किए जा सकते हैं। इन प्रयोगशालाओं को क्षेत्रीय अथवा शहरी केंद्रों को प्रदान किया जाएगा, जहाँ से उस क्षेत्र के आंतरिक एवं दुर्गम भागों में इन प्रयोगशालाओं को तैनात किया जा सकेगा। 

देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला आई-लैब, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र आंध्र प्रदेश मेड-टेक ज़ोन (एएमटीजेड) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। 

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डीबीटी और एएमटीजेड के कोविड मेडिटेक मैन्यूफैक्चरिंग डेवलपमेंट कंसोर्शिया को भारत में स्वास्थ्य देखभाल तकनीकों की कमी को दूर करने और आत्मनिर्भरता के चरण की दिशा में उत्तरोत्तर आगे बढ़ने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस कंसोर्शिया के तहत आई-लैब को भारत बेंज से ऑटोमोटिव चेसिस की प्राप्ति की तारीख से 8 दिनों के रिकॉर्ड समय में एएमटीजेड में बनाया गया है। 

इस मोबाइल यूनिट को दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। इसे ऑटोमोटिव चेसिस से उठाया जा सकता है और देश के किसी भी स्थान पर भेजने के लिए मालगाड़ी पर रखा जा सकता है। बीएसएल-2 लैब को नेशनल एक्रेडटैशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग ऐंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) के दिशा-निर्देशों के अनुसार बनाया गया है और इसे डीबीटी के प्रमाणित परीक्षण केंद्रों से जोड़ा जा रहा है। 

इंडिया साइंस वायर