• कश्मीरी नेताओं के गिले-शिकवे PM मोदी ने किए दूर, दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर जारी है राजनीति

अंकित सिंह Jun 26, 2021 14:09

अनुच्छेद 370 के खत्म होने के लगभग 2 साल बाद केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे।

देश में कोरोना संक्रमण में कमी देखी जा रही है। इसके साथ ही टीकाकरण अभियान को गति देने की कोशिश की जा रही है। हालांकि यह बात भी सच है कि टीकाकरण को लेकर राजनीति भी लगातार जारी है। इन सबके बीच इस सप्ताह जम्मू कश्मीर को लेकर भी एक बड़ी खबर रही। अगर हम यूं कहें कि इस सप्ताह की यह सबसे बड़ी खबर रही तो इसमें दो राय नहीं होगी। दरअसल, अनुच्छेद 370 के खत्म होने के लगभग 2 साल बाद केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे। इनके अलावा जम्मू कश्मीर के 4 पूर्व मुख्यमंत्री, तीन पूर्व उपमुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए। फारूख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, कविंदर गुप्ता, निर्मल सिंह, रविंद्र रैना, सज्जाद लोन समेत 14 नेता शामिल हुए। ज्यादातर नेताओं की मांग जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की रही। इसके अलावा इन नेताओं ने जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने की भी मांग की। प्रधानमंत्री की ओर से इस बात का आश्वासन दिया गया कि परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। इसी पर हमने इस सप्ताह का चाय पर समीक्षा कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में हमेशा की तरह मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे।

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नीरज कुमार दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बुलाए गए बैठक काफी सकारात्मक रही और इसकी जरूरत भी थी। सभी नेताओं ने माना कि बैठक सकारात्मक माहौल में हुई। इससे ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल कर दी जाएगी। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि इस बैठक में 370 का मसला जरूर उठा लेकिन क्योंकि यह मामला कोर्ट में है इसलिए इस पर बातचीत नहीं हो पाई। इसके अलावा हमने अपने प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर चल रहे राजनीति का भी जिक्र किया। जिस तरह से ऑक्सीजन को लेकर भाजपा और केजरीवाल सरकार आमने-सामने है उससे कहीं ना कहीं आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में उबाल देखने को मिल सकता है। भाजपा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल का हवाला देते हुए केजरीवाल पर जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन मांगने का आरोप लगा रही है और साथ ही साथ कह रही है कि दिल्ली सरकार के इस कदम से 12 राज्यों को नुकसान हुआ। वहीं, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा के इस दावे को छूट बताया और कागजात दिखाने की चुनौती दी। हालांकि, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि मेरा सिर्फ दोष इतना है कि मैंने दिल्ली वालों के सांसों की लड़ाई लड़ी। लोग चुनाव में व्यस्त थे, मैं रात भर जग कर ऑक्सीजन की व्यवस्था कर रहा था। 

जम्मू कश्मीर: प्रधानमंत्री ने परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव कराने का दिया आश्वासन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली पर जोर देते हुए वहां के नेताओं से कहा कि परिसीमन का काम समाप्त होते ही पूर्ववर्ती राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर के आठ विभिन्न दलों के 14 नेताओं के साथ लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली सर्वदलीय बैठक में अधिकांश नेताओं ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा चुनाव कराने की मांग उठाई। ज्ञात हो कि पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के बाद राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। बैठक के बाद पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता मुजफ्फर हुसैन बेग ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य का दर्जा बहाल किए जाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया और उनका पूरा जोर परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव कराने की प्रक्रिया पर रहा। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने बैठक में सबसे पहले राज्य का दर्जा बहाल करने और उसके बाद विधानसभा चुनाव कराने की मांग रखी। बहरहाल, प्रधानमंत्री ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया तेज गति से पूरी होनी है ताकि वहां विधानसभा चुनाव कराए जा सकें और एक निर्वाचित सरकार का गठन हो सके जो प्रदेश के विकास को मजबूती दे। उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता केंद्रशासित प्रदेश में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।

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सर्वदलीय बैठक को जम्मू-कश्मीर को विकसित और प्रगतिशील प्रदेश के रूप में विकसित करने के लिए जारी प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘परिसीमन तेज गति से होना है ताकि जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो सकें और वहां एक चुनी हुई सरकार मिले जिससे राज्य के चौतरफा विकास को मजबूती मिले।’’ बैठ कर चर्चा करने और विचारों के आदान प्रदान को लोकतंत्र की बड़ी मजबूती करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि लोगों को, विशेषकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करना है और उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति सुनिश्चित करना है।’’ बैठक में शामिल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण चुनाव जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली के प्रमुख मील के पत्थर हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर पर आज की बैठक बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। सभी ने संविधान और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की। जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया। हम जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास को लेकर कटिबद्ध हैं।’’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर चर्चा हुई और परिसीमन की प्रक्रिया तथा शांतिपूर्ण चुनाव राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अहम मील के पत्थर हैं, जैसा कि संसद में वादा किया गया था।’’ कांग्रेस ने बैठक में इस केंद्रशासित प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, चुनाव कराने और कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। पार्टी के वरिष्ठ नेता व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आजाद के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि जमीन एवं रोजगार के मामलों में राज्य के डोमेसाइल की गारंटी दी जाए तथा राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए। इस सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से आजाद, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद शामिल हुए। 

आजाद ने कहा, ‘‘इस बैठक में हमने पांच मुद्दे उठाए हैं। पहला यह कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। दूसरा, वहां चुनाव कराये जाएं।’’ एक सवाल के जवाब में आजाद ने कहा, ‘‘हम संतुष्ट उस दिन हो जाएंगे जब चुनाव हो जाएंगे और पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।’’ नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री से अपील की कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर विश्वास कायम करने की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने को वह कानूनी एवं संवैधानिक माध्यम से चुनौती देते रहेंगे। लोकसभा सदस्य अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘विश्वास खत्म हो गया है और उसे तुरंत बहाल करने की जरूरत है और उसके लिए केंद्र को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की दिशा में काम करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि राज्य के दर्जे का मतलब है कि जम्मू-कश्मीर के आईएएस और आईपीएस कैडर को भी वापस करना। पूर्ण राज्य होना चाहिए।’’ नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि केंद्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर की पहचान जल्द बहाल करे ताकि अन्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सके। पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने भी कहा कि केंद्र की ओर से बैठक में आश्वासन दिया गया कि परिसीमन की प्रक्रिया खत्म होते ही चुनाव की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘अधिकांश राजनीतिक दलों ने बैठक में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा चुनाव कराने की मांग उठाई।’’ पिछले लगभग दो सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस केंद्रशासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए यह बैठक बुलाई थी। राजधानी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर लगभग साढ़े तीन घंटे चली इस बैठक में पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के चार पूर्व मुख्यमंत्री और चार पूर्व उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। 

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इन नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला, उनके पुत्र व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर प्रमुख हैं। इनके अलावा बैठक में पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, पैंथर्स पार्टी के भीम सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अल्ताफ बुखारी और पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन मौजूद थे। भाजपा की ओर से बैठक में शामिल होने के लिए जम्मू एवं कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रवींद्र रैना, पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता और निर्मल सिंह भी प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। बैठक में शाह के अलावा जम्मू एवं कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी के मिश्रा, गृह सचिव अजय भल्ला और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मौजूद थे। एक दिन पहले ही परिसीमन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जम्मू-कश्मीर के सभी उपायुक्तों के साथ मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन और सात नयी सीटें बनाने पर विचार-विमर्श किया था। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में इस दिसम्बर से अगले साल मार्च के बीच चुनाव कराने को तत्पर है। कोशिश है कि इससे पहले परिसीमन के काम को पूरा कर लिया जाए। परिसीमन की कवायद के बाद जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक संसद में पारित किए जाने के दौरानकेंद्रीय गृह मंत्री शाह ने आश्वासन दिया था कि केंद्र उपयुक्त समय पर जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को बहाल करेगा। सात महीने पहले ही इस केंद्रशासित प्रदेश में जिला विकास परिषद के चुनाव संपन्न हुए थे। इस चुनाव में गुपकर गठबंधन को 280 में से 110 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। गठबंधन के दलों में नेशनल कांफ्रेस को सबसे अधिक 67 सीटों पर विजय हासिल हुई थी जबकि 75 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। जम्मू-कश्मीर में 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू है।

कश्मीर मामले में भारत उसी तरह शर्मसार हुआ जैसे टीकों के कारण: ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने से देश उसी तरह शर्मसार हुआ है जिस तरह कोविड-19 टीकों के मुद्दे से हुआ है। बनर्जी ने जम्मू कश्मीर के अनेक राजनीतिक दलों के नेताओं की नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की पृष्ठभूमि में यह बयान दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे इस बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे इस बैठक का एजेंडा तक नहीं पता।’’ तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त करने और उसका विभाजन करने से देश को किसी भी तरह मदद नहीं मिली। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित कर दिया था। बनर्जी ने कहा, ‘‘पूर्ण राज्य का दर्जा (जम्मू कश्मीर का) समाप्त करने की क्या जरूरत थी? इससे देश को बिल्कुल भी मदद नहीं मिली। पिछले दो साल से पर्यटक कश्मीर नहीं जा सके हैं। यह देश की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वहां निरंकुशता ने देश को बहुत बदनाम कराया है जिस तरह कोविड टीकों ने कराया है।’’ बनर्जी ने टीकों के विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। हालांकि वह टीकों की कम आपूर्ति, अलग-अलग दरों तथा एकसमान टीकाकरण नीति नहीं होने के खिलाफ विरोध जताते हुए बोलती रही हैं। एक समय उन्होंने भारत में टीकों के कम भंडार को लेकर इसका निर्यात किये जाने की आलोचना की थी। 

विश्वास कायम करने के लिए जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना जरूरी: फारूक

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर विश्वास कायम करने की दिशा में काम किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां आयोजित महत्वपूर्ण बैठक के तुरंत बाद अब्दुल्ला ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने को वह कानूनी एवं संवैधानिक माध्यम से चुनौती देते रहेंगे। लोकसभा सदस्य अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘विश्वास खत्म हो गया है और उसे तुरंत बहाल करने की जरूरत है और उसके लिए केंद्र को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की दिशा में काम करना चाहिए।’’ करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि राज्य के दर्जे का मतलब है कि जम्मू-कश्मीर के आईएएस और आईपीएस कैडर को भी वापस करना। पूर्ण राज्य होना चाहिए।’’ नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि केंद्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर की पहचान जल्द बहाल करे ताकि अन्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

परिसीमन की प्रक्रिया, शांतिपूर्ण चुनाव पूर्ण राज्य की बहाली में महत्वपूर्ण मील के पत्थर: शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण चुनाव जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली के प्रमुख मील के पत्थर हैं। उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई सर्वदलीय बैठक के बाद आया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर पर आज की बैठक बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। सभी ने संविधान और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की। जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया। हम जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास को लेकर कटिबद्ध हैं।’’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर चर्चा हुई और परिसीमन की प्रक्रिया तथा शांतिपूर्ण चुनाव राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अहम मील के पत्थर हैं, जैसा कि संसद में वादा किया गया था।’’ 

कांग्रेस ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई

कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस केंद्रशासित प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, चुनाव कराने और कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि जमीन एवं रोजगार के मामलों में राज्य के डोमेसाइल की गारंटी दी जाए तथा राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए। इस सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से आजाद, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद शामिल हुए। प्रधानमंत्री के आवास पर हुई बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आजाद ने कहा, ‘‘इस बैठक में हमने पांच मुद्दे उठाए हैं। पहला यह कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। दूसरा, वहां चुनाव कराये जाएं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में बहुत लंबे समय से राज्य के डोमेसाइल के नियम रहे हैं। हमारा यह कहना है कि केंद्र सरकार को गारंटी देनी चाहिए कि जमीन एवं रोजगार को लेकर डोमेसाइल होगा।’’ आजाद ने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडित पिछले तीन दशक से बाहर हैं। यह जम्मू-कश्मीर के हर नेता का मौलिक कर्तव्य है कि कश्मीर के पंडितों की वापसी हो। हमसे जो हो सकेगा हम उसमें मदद करेंगे।’’ उन्होंने बताया, ‘‘ पांच अगस्त, 2019 के फैसले के बाद जिन राजनीतिक लोगों को बंदी बनाया गया था, उनको सबको रिहा कर दिया जाना चाहिए। यह मांग भी हमने की है।’’ 

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कांग्रेस नेता के मुताबिक, ‘‘ गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए वचनबद्ध हैं, लेकिन पहले परिसीमन होने दीजिए। परिसीमन के बाद चुनाव भी होंगे और पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा।’’ एक सवाल के जवाब में आजाद ने कहा, ‘‘हम संतुष्ट उस दिन हो जाएंगे जब चुनाव हो जाएंगे और पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर चुनाव कराना है, लोकतंत्र बहाल करना है तो यह जल्द होना चाहिए। हम चाहते हैं कि लोकतंत्र बहाल होना चाहिए...हम नौकरशाही के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमने कहा कि नौकरशाही नेताओं का स्थान नहीं ले सकती। जिस तरह नेता लोगों से मिलता है, उस तरह से अधिकारी नहीं मिल सकते।’’ पिछले लगभग दो सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस केंद्रशासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए बृहस्पतिवार को वहां के 14 नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद यह पहली ऐसी बैठक है जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की।

बैठक के बाद पाक पर महबूबा का बड़ा बयान, पड़ोसी मुल्क से बातचीत कश्मीर के लोगों को देती है सुकून

पीडीपी चीफ का एक बार फिर पाकिस्तान प्रेम सामने आया। उन्होंने फिर से पाकिस्तान से बातचीत का राग अलापते हुए कहा कि सरकार को पाकिस्तान से बात करनी चाहिए। आप चीन के साथ बात कर रहे हैं जहां लोगों का कोई इनवाल्वमेंट नहीं है। अगर आपको पाकिस्तान से बात करनी पड़े तो करनी चाहिए इससे कश्मीर के लोगों को सुकून मिलता है। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मैंने बैठक में प्रधानमंत्री से कहा कि अगर आपको धारा 370 को हटाना था तो आपको जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को बुलाकर इसे हटाना चाहिए था। इसे गैरकानूनी तरीके से हटाने का कोई हक नहीं था। हम धारा 370 को संवैधानिक और क़ानूनी तरीके से बहाल करना चाहते हैं। 

ऑक्सीजन को लेकर केजरीवाल ने झूठ बोल कर जघन्य अपराध किया: भाजपा

भाजपा ने आरोप लगाया कि कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की जरूरत से चार गुना अधिक मांग की थी और उनके इस ‘‘झूठ’’ के कारण कम से कम 12 राज्यों में जीवन रक्षक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली में ऑक्सीजन का लेखाजोखा करने के लिए गठित की गई एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ‘‘चार गुना झूठ’’ बोलकर ‘‘जघन्य अपराध’’ किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन को लेकर जिस प्रकार की राजनीति अरविंद केजरीवाल ने की, उसका पर्दाफाश ऑक्सीजन ऑडिट पैनल की रिपोर्ट में हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘जो तथ्य सामने आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार द्वारा ऑक्सीजन की जरूरत को चार गुना बढ़ाकर बताया गया। 

केजरीवाल के इस झूठ के कारण, 12 राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हुई क्योंकि सभी जगह से ऑक्सीजन की मात्रा कम कर दिल्ली भेजना पड़ा था।’’ पात्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के कुप्रबंधन की वजह से राजधानी दिल्ली में उस वक्त ऑक्सीजन के टैंकर सड़क पर खड़े रहे जब लोगों को इसकी सबसे अधिक जरूरत थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये ऑक्सीजन दूसरे राज्यों में उपयोग होती तो कई लोगों की जान बच सकती थी। यह अरविंद केजरीवाल द्वारा किया गया जघन्य अपराध है।’’भाजपा प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि इसके लिए उच्चतम न्यायालय में मुख्यमंत्री जिम्मेदार ठहराए जाएंगे और जो अपराध उन्होंने किया है, उसके लिए उन्हें दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुस्तान की राजनीति में पहली बार चार गुना झूठे साबित हो रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री। यह छोटी बात नहीं है। अरविंद केजरीवाल को जनता को जवाब देना होगा।’’ 

ऑक्सीजन की मांग को लेकर भाजपा के आरोप बेबुनियाद और झूठे: सिसोदिया

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ ने ऐसी किसी रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी है, जिसमें यह कहा गया हो कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली सरकार ने जरुरत से चार गुणा अधिक ऑक्सीजन की मांग की थी। सिसोदिया ने एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ऐसी रिपोर्ट को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह झूठी और फर्जी रिपोर्ट भाजपा के कार्यालय में तैयार की गयी है, जिसे केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में जमा कराया है। सिसोदिया ने यह टिप्पणी भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा के उस आरोप के जवाब में की है, जिसमें पात्रा ने उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली सरकार पर ऑक्सीजन की मांग को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाया है। सिसोदिया ने कहा, ‘‘ इस रिपोर्ट के बारे में सच्चाई यह है कि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है। जिस कथित रिपोर्ट का हवाला देकर भाजपा के नेता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है। यह फर्जी और झूठी रिपोर्ट है। भाजपा झूठ बोल रही है और अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।’’ उप मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है। हमने उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों से बात की है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी रिपोर्ट पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भाजपा झूठी रिपोर्ट पेश कर रही है, जो उसकी पार्टी मुख्यालय में तैयार की गई है। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि ऐसी रिपोर्ट पेश करें, जिस पर ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हों।’’ 

मेरा अपराध है कि मैंने दो करोड़ लोगों की सांसों के लिए लड़ाई लड़ी: केजरीवाल

दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की मांग को ‘बढ़ाचढ़ा’ कर बताए जाने वाली एक रिपोर्ट के सामने आने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘आपराधिक लापरवाही’ के आरोपों का सामना करने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनका ‘अपराध’ केवल इतना है कि ‘उन्होंने दो करोड़ लोगों को सांसें देने के लिए लड़ाई लड़ी। केजरीवाल ने साथ ही कहा कि जिन्होंने ऑक्सीजन की कमी के कारण अपनों को खोया है, उन्हें ‘‘झूठा’’ नहीं कहा जा सकता। दरअसल राष्ट्रीय राजधानी के अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत पर ऑडिट के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक उप समूह ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की खपत को ‘बढ़ाचढ़ा’कर पेश किया था। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया की अगुवाई वाले पैनल ने कहा कि संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली सरकार ने 30 अप्रैल को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के आवंटन की मांग की थी, जो ‘‘गलत फॉर्मूला’’ पर आधारित थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने केजरीवाल पर ‘‘ जघन्य अपराध’’ और ‘‘आपराधिक लापरवाही’’ का आरोप लगाया। इनके जवाब में केजरीवाल ने ट्वीट किया,‘‘मेरा अपराध-मैं अपनी दो करोड़ जनता को सांसे देने के लिए लड़ा। जब आप चुनाव रैली कर रहे थे, मैं पूरी रात जाग कर ऑक्सीजन की व्यवस्था कर रहा था।’’ उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा,‘‘ लोगों ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से अपनों को खोया है। उन्हें झूठा मत कहिए, उन्हें बहुत बुरा लग रहा है।

- अंकित सिंह