China Masters जीत के बाद Satwik-Chirag की नजर Asian Games Gold पर, बोले- परिणाम नहीं खेल पर है फोकस

चीन मास्टर्स में खिताबी जीत के बाद सात्विक-चिराग की जोड़ी अब एशियाई खेलों में अपना स्वर्ण पदक बचाने के लिए तैयार है। विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखा जाए तो टीम की रणनीति स्वाभाविक आक्रामक खेल पर टिकी है जिसमें दक्षिण कोरिया और चीन जैसी मजबूत रक्षात्मक टीमों को मात देने के लिए नेट प्ले और सटीक तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चीन मास्टर्स का खिताब जीतकर भारतीय बैडमिंटन में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने के अगले ही दिन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने अपना ध्यान एशियाई खेलों पर लगा दिया है। भारतीय पुरुष डबल्स की यह स्टार जोड़ी अब 2023 में जीते स्वर्ण पदक को बचाने के लिए मैदान में उतरेगी। हालांकि चिराग का कहना है कि पिछली सफलता को दोहराने का कोई अतिरिक्त दबाव वे अपने ऊपर नहीं लेना चाहते हैं।
भारतीय बैडमिंटन संघ की ओर से सोमवार को आयोजित ऑनलाइन बातचीत में चिराग ने कहा कि उनकी कोशिश कोर्ट पर उसी अंदाज में खेलने की होगी, जिस तरह वे आम तौर पर खेलते हैं। उनके मुताबिक अगर वे अपनी स्वाभाविक शैली के साथ खेल सके तो प्रतियोगिता में काफी आगे तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि टीम का ध्यान परिणाम पर नहीं, बल्कि एक समय में सिर्फ एक मुकाबले पर रहेगा।
गौरतलब है कि सात्विक और चिराग एशियाई खेलों में पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की अब तक की एकमात्र जोड़ी हैं। 2023 में हासिल इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने दोनों खिलाड़ियों को भारतीय बैडमिंटन के सबसे सफल पुरुष डबल्स खिलाड़ियों की सूची में खास स्थान दिलाया। इस बार उस प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद जरूर होगी, लेकिन चिराग इसे मानसिक दबाव में बदलने के पक्ष में नहीं हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार चीन के शेनझेन में चीन मास्टर्स का खिताब जीतने के बाद भारतीय जोड़ी शानदार लय में एशियाई खेलों में प्रवेश करेगी। चिराग ने आगामी प्रतियोगिता में दक्षिण कोरिया और चीन की जोड़ियों को बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने दक्षिण कोरिया के किम वॉन हो और सियो सेउंग जे को दुनिया की सबसे मजबूत रक्षात्मक जोड़ियों में शामिल किया। वहीं चीन के विश्व चैंपियन लियांग वेई केंग और वांग चांग को उन्होंने सबसे प्रभावशाली आक्रामक खिलाड़ियों में माना।
चिराग ने अपने खेल की एक कमजोरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रक्षात्मक खेल में उन्होंने कुछ नए तरीके जोड़े हैं, लेकिन इस हिस्से में अभी काफी सुधार किया जाना बाकी है। बता दें कि किम वॉन हो और सियो सेउंग जे ने पिछले साल 11 खिताब जीते थे। 2026 की शुरुआत भी दोनों ने लगातार तीन खिताब के साथ की थी। हालांकि 31 मई को सिंगापुर ओपन के सेमीफाइनल में सात्विक और चिराग ने उनकी लगातार जीत का सिलसिला रोक दिया।
इसके बाद दक्षिण कोरिया की दुनिया की नंबर एक जोड़ी अगले छह प्रतियोगिताओं में कोई खिताब नहीं जीत सकी। चीन मास्टर्स में भी उसे पहले दौर में बाहर होना पड़ा, जबकि इसी प्रतियोगिता में सात्विक और चिराग ने खिताब अपने नाम किया।
सात्विक ने कहा कि विरोधी उनकी आक्रामक शैली को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी जोड़ी की रणनीति में कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका खेल हमेशा आक्रमण करने पर आधारित रहता है। मलेशिया, इंडोनेशिया और चीन के खिलाड़ी भी तेज गति से खेलकर खुद आक्रमण करना चाहते हैं और भारतीय जोड़ी को आसान मौका नहीं देना चाहते।
सात्विक ने चिराग की भूमिका को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के अगले हिस्से में चिराग जिस तरह मौके बनाते हैं, उससे उनके लिए अंक खत्म करना काफी आसान हो जाता है। दोनों खिलाड़ियों के बीच यही तालमेल उनकी सबसे बड़ी ताकत है और एशियाई खेलों में भारत की स्वर्ण पदक की उम्मीद भी इसी जोड़ी पर टिकी हैं।
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