Asian Games में नया रिकॉर्ड बनाने उतरेंगी Gyaneshwari Yadav, Mirabai Chanu की चुनौती पर भी बेफिक्र

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राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सुधारने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने जुलाई में 53 किग्रा भार वर्ग में कुल 199 किग्रा भार उठाकर रजत पदक हासिल किया था। 53 किग्रा वर्ग में मीराबाई चानू और बिंद्यारानी देवी के आने से बढ़ने वाली घरेलू प्रतिस्पर्धा को लेकर भी वह पूरी तरह बेफिक्र हैं।

(फाइल तस्वीरों के साथ) ... अपराजिता उपाध्याय ... नयी दिल्ली, सात सितंबर राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ग्लास्गो के अनुभव को इस महीने होने वाले एशियाई खेलों में भुनाने के लिए तैयार हैं। छत्तीसगढ़ की 23 वर्षीय ज्ञानेश्वरी की नजर 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बेहतर करने पर है। जुलाई में राष्ट्रमंडल खेलों में ज्ञानेश्वरी ने 53 किग्रा भार वर्ग में स्नैच और क्लीन एवं जर्क दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 199 किग्रा भार (88 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एवं जर्क) के साथ रजत पदक जीता था।

भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) की ओर से आयोजित बातचीत में ज्ञानेश्वरी ने पीटीआई से कहा, ‘‘तैयारी अच्छी चल रही है। मैं वहां अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं। राष्ट्रमंडल खेलों में मैंने 199 किग्रा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और अब इसे बेहतर करने की कोशिश करूंगी।’’ ज्ञानेश्वरी ने कहा, ‘‘ हमें राष्ट्रमंडल खेलों के बाद ज्यादा समय नहीं मिला।

हमें सिर्फ एक महीने का समय मिला। मैं स्नैच में सुधार करने की कोशिश करूंगी। अगर मैं स्नैच और क्लीन एवं जर्क दोनों में एक-एक किलोग्राम का सुधार कर पाती हूं तो यह मेरे लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

किसी भी खिलाड़ी के लिए अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना बहुत बड़ी बात होती है।’’ पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान में प्रशिक्षण ले रहीं ज्ञानेश्वरी को उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा का अनुभव जापान में होने वाले एशियाई खेलों में उनके काम आएगा। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल खेलों से मिला अनुभव मैं एशियाई खेलों में इस्तेमाल करूंगी।’’ एशियाई खेलों में हालांकि ज्ञानेश्वरी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। चीन, दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया जैसे भारोत्तोलन के पारंपरिक मजबूत देशों के खिलाड़ी भी पदक जीतने की होड़ में होंगे।

एशियाई खेलों के बाद 53 किग्रा भार वर्ग में ज्ञानेश्वरी के लिए घरेलू स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। मौजूदा समय में 48-49 किग्रा वर्ग में हिस्सा ले रहीं ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू 53 किग्रा वर्ग में उतरने की तैयारी में हैं क्योंकि 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में महिलाओं के लिए 53 किग्रा सबसे कम भार वर्ग होगा। एशियाई चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता बिंद्यारानी देवी ने भी 53 किग्रा वर्ग में उतरने का फैसला किया है।

उन्होंने जुलाई में राष्ट्रमंडल खेलों में 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इस साल एशियाई चैंपियनशिप में 53 किग्रा वर्ग का कांस्य पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बेफिक्र हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मीराबाई दीदी को देखकर भारोत्तोलन शुरू किया था।

अब वह कह रही हैं कि वह 53 किग्रा में आएंगी। मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगी और पूरी मेहनत करूंगी। बाकी प्रतियोगिता तो चलती ही रहती है।

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