हिमाचल सरकार पैरा एथलीट हिमाचल गौरव निषाद कुमार को एक करोड़ की राशि भेंट करेगी

हिमाचल सरकार पैरा एथलीट  हिमाचल गौरव निषाद कुमार को एक करोड़ की राशि भेंट करेगी

उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देना और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाना हमारा ध्येय है ताकि निषाद और उन जैसी प्रतिभाएं आगे भी प्रदेश और देश का नाम ऊंचा करती रहें। साल 2019 में हमारी सरकार ने निषाद को हिमाचल गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। हर्ष का विषय है कि ऊना ज़िला के अम्ब/बदाऊं गांव के रहने वाले एवं पैरा एथलीट निषाद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक-2020 में सिल्वर मेडल जीता है। हिमाचल के बेटे ने विश्वभर में प्रदेश एवं देश का नाम ऊंचा किया है।

 शिमला । मुख्यमंत्री  जयराम ठाकुर  ने पैरा एथलीट  निषाद कुमार को पुरस्कार के तौर पर 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। 

 

उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देना और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाना हमारा ध्येय है ताकि निषाद और उन जैसी प्रतिभाएं आगे भी प्रदेश और देश का नाम ऊंचा करती रहें। साल 2019 में हमारी सरकार ने निषाद को हिमाचल गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया था।  हर्ष का विषय है कि ऊना ज़िला के अम्ब/बदाऊं गांव के रहने वाले एवं पैरा एथलीट  निषाद कुमार  ने टोक्यो पैरालंपिक-2020 में सिल्वर मेडल जीता है। हिमाचल के बेटे ने विश्वभर में प्रदेश एवं देश का नाम ऊंचा किया है।

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हिमाचल के किसान के बेटे ने  टोक्यो पैरालंपिक में ऊंची कूद में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। ऊना जिले के अंब उपमंडल के बदायूं निवासी निषाद ऐसा करने वाले पहले हिमाचली खिलाड़ी बने हैं। उन्होंने 2.06 मीटर ऊंची कूद लगाकर एशियन रिकॉर्ड बनाया। बता दें कि निषाद के पिता रछपाल सिंह किसान हैं, जबकि माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं। निषाद जब आठ साल के थे, तब चारा काटते समय मशीन में उनका हाथ कट गया था।

छोटे से कस्बे के सरकारी स्कूल से 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने लक्ष्य बना लिया था कि वह खेलों में भविष्य बनाएंगे। ऊंची कूद में उन्होंने सामान्य वर्ग में ही प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया था। वर्ष 2017 में माता-पिता से महज 2500 रुपये लेकर वह घर से पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में प्रशिक्षण लेने चले गए।

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उस समय पंचकूला की खेल नर्सरी बंद थी, लेकिन निषाद की लगन को देखते हुए कोच नसीम अहमद ने उन्हें कांप्लेक्स में ही खाली कमरा मुहैया करवाया और ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। निषाद की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कोच ने अपनी तरफ से प्रतिमाह 3000 रुपये और अपने दोस्तों की ओर से 7000 रुपये का इंतजाम किया, ताकि उनकी खुराक और तैयारी में कोई कमी न रहे।