World Cup Final: हार के बाद Argentina खिलाड़ियों की खेल भावना पर सवाल, Spain के ट्रॉफी समारोह का किया बहिष्कार

विश्व कप फाइनल में स्पेन के तकनीकी कौशल और अजेय रिकॉर्ड के बीच अर्जेंटीना की टीम का हार स्वीकार न करना खेल जगत में बहस का केंद्र बन गया है। ट्रॉफी वितरण समारोह के दौरान स्पेन को सम्मान देने के बजाय मैदान से बाहर जाना और समर्थकों द्वारा रोड्री के गोल्डन बॉल पुरस्कार के समय शोर मचाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल की मर्यादा को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का यह व्यवहार उनकी रणनीतिक विफलताओं और मैच के तनाव को संभालने में असमर्थता का प्रत्यक्ष परिणाम है।
विश्व कप फाइनल खत्म होने के बाद जहां स्पेन अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहा था, वहीं अर्जेंटीना की टीम एक अलग वजह से चर्चा में आ गई। न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार पुरुष फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीत लिया। हालांकि मैच समाप्त होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर होती रही।
बता दें कि अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में फेरान तोरेस ने निर्णायक गोल कर स्पेन को जीत दिलाई। इस जीत के साथ स्पेन ने लगातार 38 मैचों तक अजेय रहने का यूरोपीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। गौरतलब है कि पूरे मुकाबले में स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखा और कई मौके बनाए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने शानदार बचाव कर टीम को लंबे समय तक मुकाबले में बनाए रखा।
मौजूद जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान हुई। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने उपविजेता पदक लेने के बाद मंच पर रुककर स्पेन को ट्रॉफी उठाते हुए देखने के बजाय मैदान के दूसरी ओर चले जाने का फैसला किया। इस व्यवहार पर कई फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने सवाल उठाए। खास बात यह रही कि इससे पहले स्पेन के खिलाड़ियों ने अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का सम्मान करते हुए उन्हें पदक लेने के लिए जाते समय तालियां बजाकर सम्मान दिया था।
व्यक्तिगत पुरस्कारों के दौरान भी माहौल पूरी तरह शांत नहीं रहा। जब स्पेन के कप्तान रोड्री को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जाने पर गोल्डन बॉल देने के लिए बुलाया गया, तब स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के कुछ समर्थकों ने लियोनेल मेसी के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। इस घटना को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
ब्रिटेन के खेल प्रसारक एड्रियन डरहम ने अर्जेंटीना के रवैये की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि हार को स्वीकार करना भी खेल भावना का हिस्सा होता है, लेकिन अर्जेंटीना की टीम ऐसा नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे टूर्नामेंट में अर्जेंटीना को कई मौकों पर परिस्थितियों का फायदा मिला, फिर भी फाइनल में टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं और इस पर सभी की राय एक जैसी नहीं है।
मैच समाप्त होने के तुरंत बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर भी तनाव देखने को मिला। वीडियो में अर्जेंटीना के डिफेंडर लिएंड्रो परेडेस स्पेन के एरिक गार्सिया के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आए। बीच-बचाव करने पहुंचे गावी को भी उन्होंने धक्का दिया। इसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी और अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराया। बाद में परेडेस को लाल कार्ड दिखाया गया।
दूसरी ओर अर्जेंटीना को एक और झटका तब लगा जब अतिरिक्त समय से पहले एंजो फर्नांडीज को पाउ कुबार्सी पर देर से टैकल करने के कारण दूसरा पीला कार्ड मिला और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। वह विश्व कप फाइनल में लाल कार्ड पाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए। इसके कुछ मिनट बाद निको विलियम्स के शानदार हेडर को फेरान तोरेस ने गोल में बदलकर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिला दी। इस तरह मैच का नतीजा जितना चर्चा में रहा, उससे कहीं अधिक मुकाबले के बाद मैदान और पुरस्कार समारोह में हुई घटनाओं पर बहस होती रही है।
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