बिरयानी हो तो हैदराबादी हो...वाकई इसके स्वाद का कोई जवाब नहीं

  •  संतोष उत्सुक
  •  फरवरी 5, 2019   17:11
  • Like
बिरयानी हो तो हैदराबादी हो...वाकई इसके स्वाद का कोई जवाब नहीं
Image Source: Google

पिछले दिनों हैदराबाद जाना हुआ तो पेट में बिरयानी बिरयानी होता रहा। उस दिन हम घूमने निकले तो मैंने अपने साढू कमलेश से कहा आज बिरयानी भी खा लेते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया कि आप लंच कर लें हम बिरयानी खाने जा रहे हैं।

स्वाद चुंबक की मानिंद होता है। कुछ चीज़ें खाने का हम बरसों इंतज़ार करते हैं लेकिन खा नहीं सकते। इस नहीं खा सकने में व्यक्तिगत, पारिवारिक, धार्मिक या आर्थिक लोचे हो सकते हैं। कभी अवसर सामने खड़ा होता है और हम आगे बढ़ जाते हैं। पिछले दिनों हैदराबाद जाना हुआ तो पेट में बिरयानी बिरयानी होता रहा। उस दिन हम घूमने निकले तो मैंने अपने साढू कमलेश से कहा आज बिरयानी भी खा लेते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया कि आप लंच कर लें हम बिरयानी खाने जा रहे हैं। 


इसे भी पढ़ेंः अगर भारत में स्कॉटलैंड देखना है तो चले आइये कुर्ग, मन प्रसन्न हो जायेगा

विविध स्वादों की धरती, चार सौ साल पुराने हैदराबाद जाकर आप गोलकुंडा फोर्ट, चार मीनार या चकित कर देने वाले अनुभवों से गुजरने के लिए रामोजी फिल्म सिटी में थक आओ लेकिन जब तक आपने दुनिया भर में मशहूर हैदराबादी बिरयानी हज़म नहीं की तब तक समझिए आप हैदराबाद के नहीं हुए। बिरयानी कभी राजसी खाना होता था अब वक़्त बदलने के साथ यहाँ बिरयानी खाने की अनगिनत जगहें हैं। लेकिन कहते हैं एक दो जगह तो ऐसी होती ही है जो मानी जाती है अपने मूल, असली व विश्वसनीय स्वाद के लिए। बिरयानी पूरे देश में उपलब्ध है लेकिन यह लाजवाब स्वाद लेने के लिए दुनिया भर से लोग हैदराबाद आते हैं। बेशक डिजिटल होती ज़िंदगी में आप घर बैठे बिरयानी खा सकते हैं लेकिन जैसे किताब को हाथ में पकड़ कर पढ़ने का जो मज़ा है वैसा ही खाने का मज़ा तो रसोई के पास ही है। प्रोसेसिंग व पैकेजिंग ने स्वाद संवारा नहीं बिगाड़ा है।

इसे भी पढ़ेंः चाय और कॉफी के बागानों के लिए जाना जाता है चिकमगलूर

बिरयानी परोसने का एक तरीका है। इसे आप खुद नहीं परोस सकते यदि आप को पता नहीं है। कमलेश ने बताया कि बिरयानी लाने वाला ही सर्व करेगा। सर्व करने के लिए उन्होंने विशेष तरीके से बिरयानी वाले बर्तन में चम्मच डाला और पहले चावल आपकी प्लेट में डाले गए फिर मसाले के साथ मीट या चिकन। इसमें बासमती का हर चावल अलग अलग है यह न कम, न ज़्यादा बल्कि सही पके हुए हैं। कम ग्रेवी में मसालों का सम्मिश्रण बेहद संतुलित व उम्दा है। केसर की विशिष्ट खुशबू इसमें खूबसूरत रंग और बेमिसाल स्वाद उगाती है। बिरयानी खाने से पहले या इसके साथ सलाद न खाने की सलाह दी जाती है। हां, साथ में पतली-सी दही, हरी चटनी और सालन परोसा जाता है। वैसे शाकाहारी बिरयानी भी यहां उपलब्ध है लेकिन बिरयानी का सही मज़ा लेना हो तो मीट या चिकन बिरयानी में ही लिया जा सकता है। खाते समय, यहां अनेक मसाले काँच के बड़े बड़े मर्तबान में सजे देख स्वाद और बढ़ गया। यहाँ बैठने व परोसने का तरीका सहज पारम्परिक है। यहां जो भी आता है स्वाद के कारण और स्वाद के कारण ही विश्व ब्रैंड बन जाने के कारण। टेक होम सुविधा है। इस जगह देश विदेश में मशहूर फिल्मी सितारे, क्रिकेट सितारे आ चुके हैं। यहाँ लगभग चार सौ लोग एक साथ खा सकते हैं।

-संतोष उत्सुक







दुनिया के इन अनोखे म्यूजियम के बारे में पहले नहीं सुना होगा आपने

  •  मिताली जैन
  •  दिसंबर 3, 2020   18:29
  • Like
दुनिया के इन अनोखे म्यूजियम के बारे में पहले नहीं सुना होगा आपने
Image Source: Google

वाशिंगटन डी सी के अंतर्राष्ट्रीय जासूस संग्रहालय में जासूसी कलाकृतियों का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह है, जो दुनिया के सबसे गुप्त व्यवसायों में से एक पर प्रकाश डालता है। मिनी कैमरा, नकली धन, प्रच्छन्न हथियार और सिर्फ मशीनों से लेकर जासूसी के इतिहास के बारे में बताती हैं।

पूरी दुनिया में हजारों म्यूजियम हैं, जो किसी खास मकसद से बनाए गए है। इन म्यूजियम में सैर करके आप किसी एक विषय, वस्तु या व्यक्ति का पूरा इतिहास जान सकते हैं। वैसे तो किसी म्यूजियम में घूमना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है, लेकिन दुनिया में ऐसे भी कई म्यूजियम है, जिनके बारे में आपने शायद ही कभी सुना हो। इन अनोखे म्यूजियम की सैर करके आपने मन में एक बार यह ख्याल जरूर आएगा कि आखिरकार इतने अजीबो−गरीब म्यूजियम खोलने के बारे में कोई कैसे सोच सकता है। तो चलिए जानते हैं दुनिया के कुछ अनोखे म्यूजियम्स के बारे में −

इसे भी पढ़ें: जा रहे हैं जापान तो जरूर जाएं इन मंदिरों में

इंटरनेशनल स्पाई म्यूजियम, वाशिंगटन

वाशिंगटन डी सी के अंतर्राष्ट्रीय जासूस संग्रहालय में जासूसी कलाकृतियों का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह है, जो दुनिया के सबसे गुप्त व्यवसायों में से एक पर प्रकाश डालता है। मिनी कैमरा, नकली धन, प्रच्छन्न हथियार और सिर्फ मशीनों से लेकर जासूसी के इतिहास के बारे में बताती हैं। यहां पर आने वाले विजिटर्स इंटरएक्टिव जासूस रोमांच में भाग ले सकते हैं और ऐतिहासिक तस्वीरों और वीडियो साक्षात्कार के माध्यम से दुनिया के सबसे मायावी जासूसों के पीछे की कहानियों का पता लगा सकते हैं।

सुलभ इंटरनेशनल म्यूजि़यम ऑफ़ टॉयलेट्स, भारत

जब दुनिया के अनोखे म्यूजियम की बात हो और भारत का नाम ना लिया जाए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। भारत की राजधानी में स्थित, सुलभ इंटरनेशनल म्यूजि़यम ऑफ़ टॉयलेट्स में 2500 बी सी से लेकर आज तक स्वच्छता और स्वच्छता के इतिहास का विवरण है। यह संग्रहालय रोमन सम्राटों के शौचालय से लेकर मध्ययुगीन कमोड तक के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देता है। संग्रहालय में  आपको दुर्लभ टॉयलेट कविताओं के संग्रह को भी होस्ट करता है।

इसे भी पढ़ें: बेजोड़ है राजस्थान की संस्कृति और वीर गाथाओं से भरा है यहां का इतिहास

म्यूजियम ऑफ बैड आर्ट, संयुक्त राज्य अमेरिका

आमतौर पर एक संग्रहालय में अच्छी कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के म्यूजियम ऑफ बैड आर्ट इससे काफी अलग है। मैसाचुसेट्स के डेडहम में एक पुराने तहखाने में स्थित इस संग्रहालय में केवल उन्हीं आर्ट को रखा जाता है, जिन्हें आमतौर पर काफी बुरा माना जाता है। यहां पर आपको ऐसे एक दो या तीन बल्कि 600 पीसेस मिलेंगे।

अवानोस हेयर म्यूजि़यम, तुर्की

यहां पर 16,000 से अधिक महिलाओं से इकट्ठा किए गए बालों के दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय है। मध्य तुर्की का एक छोटा सा शहर अवानोस, अपने उल्लेखनीय मिट्टी के बर्तनों के लिए प्राचीन काल से प्रसिद्ध है। यहां पर चेज़ गैलिप द्वारा बनाया गया हेयर म्यूजियम दुनिया के अनोखे म्यूजियम में शामिल है। यहां की दीवारों पर 16,000 से अधिक महिलाओं के बालों को रखा गया है, जिस पर उनके नाम और पते भी शामिल है।

मिताली जैन







जा रहे हैं जापान तो जरूर जाएं इन मंदिरों में

  •  मिताली जैन
  •  दिसंबर 1, 2020   18:46
  • Like
जा रहे हैं जापान तो जरूर जाएं इन मंदिरों में
Image Source: Google

हिदा−सन्नोगु ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ है जो इसे बौना लगता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, तीर्थस्थल को शिंटो सन्नो मात्सुरी उत्सव में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है, जो जापान के तीन सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

जापान एक ऐसा देश है, जहां पर हजारों मंदिर हैं। इसलिए अगर आप जापान जाएं और वहां के मंदिरों में ना घूमें तो यकीनन आपकी यात्रा अधूरी ही रह जाएगी। यह मंदिर आपको जापान की संस्कृति, परंपराओं और इतिहास की जानकारी देते हैं। वैसे जापान में आपको सिर्फ बौद्ध धर्म से जुड़े मंदिर ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के भी रंग देखने को मिलेंगे। तो चलिए आज हम आपको जापान के कुछ मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां पर आपको एक बार जरूर जाना चाहिए−

इसे भी पढ़ें: अफ्रीका जा रहे हैं घूमने तो वहां पर यूनोस्को की विश्व धरोहर स्थलों को जरूर देखें

हिदा−सन्नोगु तीर्थ, तकयामा

हिदा−सन्नोगु ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ है जो इसे बौना लगता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, तीर्थस्थल को शिंटो सन्नो मात्सुरी उत्सव में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है, जो जापान के तीन सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

किन्काकुजी मंदिर (क्योटो)

किन्काकुजी मूल रूप से 1397 में एक शोगुन, या सैन्य प्रमुख के घर के रूप में बनाया गया था। इमारत को पूरी तरह से सोने की पत्ती में कवर किया गया था, जिससे इसे गोल्डन पैवेलियन का खिताब मिला। इसके उद्यान आपको धरती पर स्वर्ग का अहसास करवाते हैं।

सेंसो−जी मंदिर (टोक्यो)

जापान में इस मंदिर की अपनी एक अलग मान्यता है। किंवदंती है कि दो भाइयों ने बार−बार देवी कन्नन की एक मूर्ति को सुमिदा नदी में लौटाने की कोशिश की। हर बार, अगले दिन तक मूर्ति लौट आई थी। इसके बाद देवी के सम्मान में उस स्थान पर सेंसो−जी मंदिर बनाया गया था। शाम को मंदिर की सुदंरता देखते ही बनती है। मंदिर असाकुसा स्टेशन से महज पांच मिनट के वॉकिंग डिस्टेंस पर मौजूद है।

इसे भी पढ़ें: भारत में 2000 साल पुराना है चाय पीने का इतिहास, आज जानिए कुछ बेहतरीन टी−गार्डन के बारे में

टोडाई−जी मंदिर (नारा)

नारा में टोडाई−जी मंदिर दुनिया की सबसे बड़ी लकड़ी की इमारत है। इसमें बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा भी है। बुद्ध की प्रतिमा की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मध्यम आकार का मानव प्रतिमा के एक नथुने के माध्यम से फिट हो सकता है। यहां पर आने वाले लोग साइट पर घूमने वाले हिरणों के अनुकूल झुंड का भी आनंद लेते हैं।

संजुसांगोन्दे मंदिर (क्योटो)

संजुसांगोन्दे मंदिर जिसे पूर्व में रेंगेइन मंदिर भी कहा जाता है, अपनी धार्मिक मूर्तियों की संख्या के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के द ग्रेट हॉल में कन्नन देवी के 1,001 लाइफ साइज इमेज मौजूद हैं, जो मंदिर के दृश्य को मनोरम बनाते हैं।

मिताली जैन 







बेजोड़ है राजस्थान की संस्कृति और वीर गाथाओं से भरा है यहां का इतिहास

  •  प्रीटी
  •  नवंबर 27, 2020   15:18
  • Like
बेजोड़ है राजस्थान की संस्कृति और वीर गाथाओं से भरा है यहां का इतिहास
Image Source: Google

सामान्य बोलचाल की भाषा में राजस्थान के लोग इसे रजवाड़ा कहकर पुकारते थे जबकि कुछ शिक्षित और आधुनिक लोग इसे राजस्थान कहते थे। अंग्रेजों ने इसे 'राजपूताना' कहा। परन्तु इसका शुद्ध और सार्थक नाम राजस्थान ही है।

वैसे तो लगभग सभी राज्यों की संस्कृति अलग−अलग है और प्रत्येक राज्य का अपना एक अलग ऐतिहासिक महत्व है। लेकिन भारत के पश्चिमी राज्यों में शुमार राजस्थान की बात ही अलग है। राजस्थान की संस्कृति सबसे अलग तो है ही साथ ही इस राज्य का साहित्य और वास्तुकला के क्षेत्र में भी खासा योगदान रहा है। इसी प्रदेश में अनेक वीर राजा भी हुए हैं जो आज भी अपनी वीरता और शौर्य के लिए याद किए जाते हैं।

इसे भी पढ़ें: अफ्रीका जा रहे हैं घूमने तो वहां पर यूनोस्को की विश्व धरोहर स्थलों को जरूर देखें

दरअसल राजस्थान का उल्लेख सर्वप्रथम प्रागैतिहासिक काल में प्रथम बार उभर कर सामने आया था। ईसा पूर्व 2000 और 9000 के बीच के समय में यहां की संस्कृति सिन्धु घाटी की सभ्यता जैसी थी। प्राचीन काल में राजस्थान छोटी−छोटी रियासतों में विभाजित था, जहां भिन्न−भिन्न राजाओं का शासन था। इन छोटी−छोटी रियासतों के अलग−अलग नाम थे, जिन्हें राजस्थान नहीं कहा जाता था, किन्तु यह सत्य है कि राजस्थान में सदैव आर्य जाति के लोगों का राज रहा है। 

सामान्य बोलचाल की भाषा में राजस्थान के लोग इसे रजवाड़ा कहकर पुकारते थे जबकि कुछ शिक्षित और आधुनिक लोग इसे राजस्थान कहते थे। अंग्रेजों ने इसे 'राजपूताना' कहा। परन्तु इसका शुद्ध और सार्थक नाम राजस्थान ही है। देश भर के इतिहास में राजस्थान का इतिहास विशिष्ट स्थान रखता है, जहां बहुत प्राचीन काल में ही आकर आर्य जातियां बस गई थीं। वर्तमान श्रीगंगानगर जिले के कालीबंगा नामक स्थान पर इससे भी पूर्व विस्तृत सिन्धु घाटी सभ्यता के ऐसे चिन्हों का पता लगा है जिनकी सत्यता को आधुनिक काल के इतिहासकारों ने पुष्ट किया है। जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर में भी प्राचीन सभ्यता के जो अवशेष और चिन्ह पाये गये हैं, उनसे भी इस तथ्य की पुष्टि होती है कि यहां विकसित सभ्यता किसी भी प्रकार सिन्धु घाटी की सभ्यता से कम नहीं थी। जयपुर जिले के बैराठ नामक स्थान पर हुई खुदाई से प्राप्त चिन्हों से भी राजस्थान के प्राचीन इतिहास और यहां कि विस्तृत प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का पता चलता है। सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया चीनी यात्री हवेनसांग राजस्थान के 'भीनभाल' नामक स्थान पर भी गया था, जिससे राजस्थान के इतिहास और संस्कृति की प्राचीनता का पता चलता है।

यहां के शासकों और राजाओं की अद्भुत वीरता, अदम्य साहस, असाधारण पराक्रम और अतुलनीय बलिदान जैसी कहानियां राजस्थान के इतिहास में मिलती हैं। भारत के अन्य राज्यों के इतिहास में वीरता, साहस, पराक्रम और बलिदान के उदाहरण राजस्थान की अपेक्षा काफी कम मिलते हैं। राजस्थान के इतिहास में राणा सांगा, महाराणा प्रताप, जयमल व पत्ता, वीर दुर्गादास, हांड़ा रानी, पृथ्वीराज चौहान तथा महारानी पद्मिनी ने अपनी वीरता, शौर्य और बलिदान के जो उदाहरण पेश किये, जिस प्रकार अपनी आन पर मर मिटे, उससे राजस्थान की श्रेष्ठता और महानता में चार−चांद लग गये। रानी पद्मिनी का जौहर, उदय सिंह को बनवीर से बचाने के लिए पन्नाबाई द्वारा अपने पुत्र चन्दन का बलिदान, कृष्ण दीवानी मीराबाई का राजभय से मुक्त धर्म प्रचार आदि ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जिनमें यहां की स्त्रियों की महानता और चरित्र बल झलकता है और जिसने राजस्थान के नाम को गरिमा प्रदान की है।

इसे भी पढ़ें: भारत में 2000 साल पुराना है चाय पीने का इतिहास, आज जानिए कुछ बेहतरीन टी−गार्डन के बारे में

पवित्र राजस्थान की मरूभूमि जहां वीर भामाशाह जैसे महापुरूष पैदा हुए, वहीं गुलाबी नगरी जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह भी अपनी कलाप्रियता और श्रेष्ठता के लिए विश्व विख्यात हैं। प्राचीन इतिहास की बात छोड़कर आधुनिक काल की बात करें, तो भी राजस्थान की इस महान घाटी ने अर्जुन लाल सेठी, ठाकुर केसर सिंह, जय नारायण व्यास, जमना लाल बजाज, विजय सिंह 'पथिक' आदि ऐसे महान स्वतंत्रता सैनानियों को जन्म दिया है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जिनकी महानता की अपनी एक चारित्रिक विशेषता है। साहित्य और कला के क्षेत्र में राजस्थान का भक्ति साहित्य बहुत प्रसिद्ध है। कृष्ण−भक्ति पर प्रेम दीवानी मीरा की रचनाओं ने जहां राजस्थान में भक्ति संगीत की धारा प्रवाहित की वहीं दूसरी ओर राजस्थान के निर्गुण कवि दादू और सुन्दरदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से निर्गुण ब्रह्म का गुणगान किया। 

वीर गाथा काल में यहां पृथ्वीराज रासो, खुमाण रासो, वीसल देवरासो और हमीर रासो जैसी वीर रस पर आधारित रचनाओं की प्रमुखता रही। बिहारी की बिहारी सतसई श्रृंगार रस की प्रमुख रचना है, जबकि महाकवि पद्माकर ने यहां 'जगत विनोद' नामक रचना लिखी। शिशुपाल वध महाकवि माघ की और ब्रह्मगुप्त की ब्रह्म स्फुट सिद्धांत ऐसी रचनाएं हैं, जिन्होंने राजस्थान के संस्कृत साहित्य को समृद्ध बनाया है।

इसे भी पढ़ें: स्कीइंग और ट्रेकिंग के शौकीन है तो आपके लिए एक आदर्श स्थल है औली

साहित्य की तरह संगीत के क्षेत्र में भी राजस्थान का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उदयपुर के राजा कुम्भा की संगीत राज और संगीत मीमांसा नामक रचनाएं, जयपुर के महाराजा प्रताप सिंह की संगीत सार और राग मंजरी नामक पुस्तकें अनूप संगीत विलास तथा अनूप रत्नाकर नामक ग्रंथ संगीत के क्षेत्र में राजस्थान के योगदान के अद्वितीय उदाहरण हैं। स्थापत्य और चित्रकला की दृष्टि से भी राजस्थान का ऐतिहासिक पक्ष काफी धनी है। आबू के दिलवाड़ा के जैन मंदिरों की स्थापत्य कला बहुत उच्चकोटि की है। चित्तौड़, रणथम्भौर और भरतपुर के किलों की तो आज भी कोई सानी नहीं है। हींग, बीकानेर, जैसलमेर, जयपुर और आमेर के राजमहल भी अपनी श्रेष्ठ स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। 

बाड़ोली और रणकपुर के मंदिर अपनी मूर्तिकला हेतु विख्यात हैं। किशनगढ़ और बूंदी शैली की चित्रकला तो अपनी मौलिकता और श्रेष्ठता के लिए जगजाहिर है। गुलाबी शहर जयपुर में बना सिटी पैलेस आज विश्व को किसी आश्चर्य से कम नहीं है। राजस्थान का इतिहास अपनी अनगिनत विशेषताओं के कारण भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय एवं बेजोड़ है। 

-प्रीटी