Indonesia से Thailand तक, भारत के बाहर इन देशों में भी धूमधाम से होती है Ramlila

भारत के अलावा दुनिया के कई अन्य देशों में भी रामलीला का भव्य मंचन होता है। इंडोनेशिया, थाईलैंड और कंबोडिया की संस्कृति में रामायण गहराई से जुड़ी है और वहां इसे विशिष्ट कला रूपों में दर्शाया जाता है। वहीं, 19वीं सदी में पहुंचे भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के माध्यम से यह परंपरा त्रिनिदाद-टोबैगो तथा गयाना तक भी पहुंची।
शारदीय नवरात्रि के समय देशभर में रामलीला का आयोजन देखा होता है। दशहरा के दिन रावण दहन के साथ इसका समापन होता है। भारत के हर एक हिस्से में रामलीला देखने को मिलते हैं। क्या आप जानते हैं राम-लीला केवल भारत में नहीं होती है।
असल में रामलीला का आयोजन भारत के अलावा और भी कई देशों में होता है। भारत के अलावा दूसरे देशों में भी रामायण सुनाई जाती है। इसलिए उन देशों में रामलीला का जादू भी देखने को मिलता है। आइए जानते हैं कि भारत के अलावा किन देशों में रामलीला का आयोजन होता है।
इंडोनेशिया
आप शायद ही जानते होंगे कि इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी है, लेकिन फिर भी रामायण यहां की संस्कृति रची-बसी हुई है। यहां रामायण इतिहास और संस्कृति का हिस्सा है, जहां भगवान राम किसी एक धर्म के न होकर मानवीय आदर्शों का प्रतीक माने जाते हैं। यहां पर जावा और बाली पर राम-लीला का मंचन बहुत ही खूबसूरत तरीके से नृत्य और नाटक के द्वारा किया जाता है।
थाईलैंड
दरअसल, थाईलैंड की संस्कृति में रामायण का गहरा असर देखने को मिलता है। यहां रामायण को रामकियन के नाम से जाना जाता है, जो वहां का राष्ट्रीय काव्य भी माना जाता है। यहां रामायण के प्रसंगों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से नृत्य और संगीत पेश किए जाते हैं। बता दें कि, यहां पर रामायण को मंच पर पेश करते हुए कलाकार एक खास मास्क पहनते हैं, जिसको खोन कहा जाता है।
कंबोडिया
इसमें कोई दोहराए नहीं है कि कंबोडिया का इतिहास हिंदू संस्कृति से बिल्कुल जुड़ा हुआ है। यहां पर रामायण को रीमकेर कहा जाता है। यहां के मंदिरों और ऐतिहासिक जगहों पर रामायण के प्रसंगों का काफी खूबसूरत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। वहीं कलाकार भी खूबसूरत पोशाक और गहने पहनकर राम-लीला पेश करते हैं।
त्रिनिदाद और टोबैगो और गयाना
इतना ही नहीं, रामलीला के पहुंचने के इतिहास काफी दिलचस्प है। 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में गिरमिटिया मजदूरों को इन देशों में गन्नों के खेतों में काम करने के लिए भेजा, फिर यहां की संस्कृति भी साथ लेकर गए। इन मजदूरों की बड़ी आबादी इन्हीं देशों में रह गई और इस तरह देशों में रामायण पहुंची।
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