मां दुर्गा का पावन त्योहार एकजुटता की है मिसाल, सभी मिलकर करते हैं पूजा-अर्चना

मां दुर्गा का पावन त्योहार एकजुटता की है मिसाल, सभी मिलकर करते हैं पूजा-अर्चना

10 दिन तक चलने वाले इस त्योहार में आपको जगह-जगह पंडाल दिखाई देंगे। जिसमें समाज के हर एक वर्ग की बराबर की भूमिका होती है। पंडाल के नीचे आने पर सभी एक समान मां दुर्गा के भक्त कहलाते हैं।

देश में दुर्गा पूजा का त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। हर स्थान पर अलग-अलग ढंग से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है। पश्चिम बंगाल में तो 10 दिनों तक चलने वाले त्योहार का पूरा माहौल मां दुर्गा के रंग में ढल जाता है और तो और बंगाली हिंदुओं के लिए मां दुर्गा और काली मां की आराधना से बड़ा कोई उत्सव नहीं है। वो भले ही दुनिया के किसी भी कोने पर क्यों न हों लेकिन इस त्योहार को खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। 

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त्योहार लोगों को करता है एकजुट

10 दिन तक चलने वाले इस त्योहार में आपको जगह-जगह पंडाल दिखाई देंगे। जिसमें समाज के हर एक वर्ग की बराबर की भूमिका होती है। पंडाल के नीचे आने पर सभी एक समान मां दुर्गा के भक्त कहलाते हैं। यहां पर जाति, रंग से कोई लेना देना नहीं होता है। दरअसल, दुर्गा पूजा लोगों को एकजुट करने का ही तो त्योहार है। सभी बड़े उत्साह के साथ मां दुर्गा की आरती में हिस्सा लेते हैं और काली मां की पूजा करते हैं।

कई मौकों पर देखा गया है कि अपने-अपने घरों से दूर रह रहे लोग त्योहारों का इंतजार करते हैं क्योंकि यह वहीं मौका होता है जब उनको घर की सबसे ज्यादा याद आती है और वह अपने लोगों के साथ त्योहार मनाना चाहते हैं। ठीक ऐसे ही दुर्गा पूजा के दौरान भले ही इंसान कहीं भी रह रहा हो लेकिन अपनो के पास वापस लौट आता है।

किसकी होती है पूजा

पश्चिम बंगाल के दुर्गा पंडाल में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरुप को पूजा जाता है। इसमें मां दुर्गा महिसासुर का वध करते हुए दिखाई देती हैं। पंडाल में मां दुर्गा के अलावा अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तियां रखी जाती हैं लेकिन पूरा ध्यान मां दुर्गा पर होता है। 10 दिनों के त्योहार में मां दुर्गा की आंखों में अलग तरह का तेज दिखाई देता है। सभी धर्मों के लोग पंडाल के नीचे एकजुट होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं और उनकी सेवा और पूजा-अर्चना सच्छी श्रृद्धा के साथ करते हैं। 

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10 दिन के इस त्योहार में सभी लोग अपने धर्म, जाति, संप्रदाय को भूलकर मां के चरणों में सेवा भाव से एकजुट रहते हैं। पंडाल के नीचे सभी को समानता की नजरों से देखा जाता है। सभी मिलकर मां दुर्गा को अर्पित करने के लिए प्रसाद बनाते हैं। इतना ही नहीं सभी ने देखा है कि अलग-अलग धर्म के लोग मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण करते हैं।