Digvijay Diwas 2026: स्वामी विवेकानंद के विचारों ने कैसे बदला World Vision और भारत की छवि

हर साल 11 सितंबर को दिग्विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के स्वर्णिम इतिहास में अहम भूमिका निभाता है। विवेकानंद की विश्वविजयी यात्रा और उनके अद्वितीय योगदान की याद में यह दिन मनाया जाता है।
हर साल 11 सितंबर को दिग्विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के स्वर्णिम इतिहास में अहम भूमिका निभाता है। दिग्विजय दिवस का इतिहास स्वामी विवेकानंद से है। विवेकानंद की विश्वविजयी यात्रा और उनके अद्वितीय योगदान की याद में यह दिन मनाया जाता है। दरअसल, 11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म महासभा में ऐतिहासिक भाषण दिया था। जिसकी याद में दिग्विजय दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है यह दिन
11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्म संसद में भाषण दिया था। यह भाषण देश, धर्म, विचारधारा और राजनीति की सीमाओं से परे थे। क्योंकि यह सभी के लिए सार्वभौमिक था। यह सिर्फ उनके जादुई शब्द नहीं थे, बल्कि यह निस्वार्थ परिव्राजक जीवन, चरित्र और तपस्या के वर्ष थे, जिन्होंने भारत देश के प्रति विश्व के दृष्टिकोण को बदल दिया था।
विवेकानंद ने अपने इस भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' से की थी। इस भाषण ने वहां पर मौजूद जनसमूह का दिल जीत लिया था। स्वामी विवेकानंद के विचारों और संदेश ने पूरे विश्व में भारतीयता और हिंदुत्व के प्रति नई जागरुकता फैलाई थी।
महत्व
स्वामी विवेकानंद के भाषण ने वेदांत दर्शन का परिचय दिया और सहिष्णुता और धार्मिक सद्भावना की शिक्षा दी। उन्होंने सांप्रदायिकता और कट्टरता के खिलाफ खुलकर बात की। स्वामी विवेकानंद ने भारत की प्राचीन शिक्षाओं को शांति और भाईचारे के सार्वभौमिक मूल्यों से जोड़ने का काम किया। उनके इस भाषण से भारत को न सिर्फ वैश्विक समुदाय में सम्मान मिला, बल्कि एक नई पहचान मिली। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की इस विजय के सम्मान में इस दिन को दिग्विजय दिवस नाम दिया गया।
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