वर्तमान क्यों नहीं गढ़ पा रहा स्वामी सहजानन्द सरस्वती जैसा किसानों का मसीहा?

  •  गोपाल जी राय
  •  फरवरी 22, 2020   12:29
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वर्तमान क्यों नहीं गढ़ पा रहा स्वामी सहजानन्द सरस्वती जैसा किसानों का मसीहा?
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आप मानें या नहीं, लेकिन भारतीय राजनीति में जब भी किसानों की चर्चा होती है तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार संगठित करने वाले दंडी स्वामी स्वामी सहजानन्द सरस्वती की याद बरबस आ जाती है। यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी किसानों के पहले और अंतिम अखिल भारतीय नेता थे तो गलत नहीं होगा।

कहते हैं कि वर्तमान में ही इतिहास गढ़ा जाता है। लेकिन यह कैसी विडंबना है कि समकालीन वर्तमान अपने धवल अतीत को पुनः गढ़ पाने में असहाय प्रतीत होता है। यह कौन नहीं जानता कि अमूमन इतिहास खुद को दुहराता है, लेकिन स्वामी सहजानन्द सरस्वती का व्यक्तित्व और कृतित्व अब तक अपवाद स्वरूप है। आगे क्या होगा भविष्य के गर्त में है, पर वर्तमान को उनकी याद सताती है। भले ही उनको गुजरे जमाने हो गए, फिर भी इतिहास खुद को दुहरा नहीं पाया! जबकि लोगबाग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं किसी समतुल्य नायक का, जो उनकी जीवनधारा बदल दे। किसानी जीवन की सूखी नदी में दखल देने वाली व्यवस्था की रेत और छाड़न को किसी अग्रगामी चिंतनधारा से ऐसे लबालब भर दे कि पूंजीवाद और साम्यवाद के तटबंध बौने पड़ जाएं समाजवादी उमड़ती दरिया देख।

आप मानें या नहीं, लेकिन भारतीय राजनीति में जब भी किसानों की चर्चा होती है तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार संगठित करने वाले दंडी स्वामी स्वामी सहजानन्द सरस्वती की याद बरबस आ जाती है। यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी किसानों के पहले और अंतिम अखिल भारतीय नेता थे तो गलत नहीं होगा। दरअसल, वो पहले ऐसे किसान नेता थे जिन्होंने किसानों के सुलगते हुए सवालों को स्वर तो दिया, लेकिन उसके आधार पर कभी खुद को विधान सभा या संसद में भेजने की सियासी भीख आमलोगों से कभी नहीं मांगी। इसलिए वो अद्वितीय हैं और अग्रगण्य भी।

खासकर तब जब भारतीय किसानों की दशा और दिशा को लेकर हमारी संसद और विधान मंडलें गम्भीर नहीं हैं। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाएं भी अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी हैं। ये तमाम संस्थाएं जनविरोधी पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली मात्र बनी हुई हैं। ये बातें तो किसानों की करती हैं, लेकिन इनके अधिकतर फैसले किसान विरोधी ही होते हैं। सम्भावित किसान विद्रोह से अपनी खाल बचाने के लिए इनलोगों ने किसानों को जाति-धर्म में इस कदर बांट रखा है कि वो अपने मूल एजेंडे से ही भटक चुके हैं। इसलिए उनकी आर्थिक बदहाली भी बढ़ी है। सच कहा जाए तो जबसे किसानों में आत्महत्या का प्रचलन बढ़ा है, तबसे स्थिति ज्यादा जटिल और विभत्स हो चुकी है। इसलिए स्वामी सहजानन्द सरस्वती की याद बार बार आती है।

स्वामी जी का सियासी कद नेहरू और गांधी जी के समतुल्य है। लेकिन उन्हें मृत्यु के उपरांत भारत रत्न से नवाजे जाने की जरूरत नहीं समझी गई। ऐसा इसलिए कि किसानों की आवाज जन्मजन्मांतर तक दबी रहे। वह उनके नाम पर भी आगे अंतस ऊर्जा नहीं प्राप्त कर सके। इस बात में कोई दो राय नहीं कि भारत में संगठित किसान आंदोलन को खड़ा करने का जैसा श्रेय स्वामी सहजानंद सरस्वती को मिला, बाद में उसका हकदार कोई दूसरा नेता नहीं बन सका। ऐसा इसलिए कि सेवा और त्याग स्वामी जी का मूलमंत्र था। अब कोई भी इस मूलमंत्र को नहीं अपना पायेगा, क्योंकि कृषक समाज की प्राथमिकता बदल गई है।

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आज किसानों के एक बड़े वर्ग के लिए आरक्षण जरूरी है, लॉलीपॉप वाली योजनाएं पसंद हैं, जबकि कृषि अर्थव्यवस्था को हतोत्साहित करने वाले और किसानों का परोक्ष शोषण करने वाले कतिपय कानूनों का समग्र विरोध नहीं। यही वजह है कि खेतों को बिजली, बीज, खाद, पानी, मजदूरी और उचित समर्थन मूल्य दिए जाने के मामलों में निरन्तर लापरवाही दिखा रही सरकारों का कोई ठोस विरोध आजतक नहीं हो पाया है। निकट भविष्य में होगा भी नहीं, क्योंकि अब नेतृत्व के बिक जाने का प्रचलन बढ़ा है। सच कहा जाए तो मनरेगा ने 'गंवई हरामखोरी' को ऐसा बढ़ाया है कि कृषि मजदूरों का मन भी अपने पेशे से उचट चुका है जिससे शिक्षित किसानों के किसानी कार्य बहुत प्रभावित हो रहे हैं।

बावजूद इसके, इन ज्वलन्त सवालों को स्वर देने वाला कोई राष्ट्रीय नेता नहीं दिखता, बल्कि किसी अवसरवादी गठजोड़ की झलक जरूर मिलती है। वो भी एक दो संगठन नहीं, बल्कि दो-तीन सौ संगठन मिलकर किसान हित की बात को आगे बढ़ा रहे हैं या फिर अपनी सियासी रोटियां किसी अन्य दल के लिए सेंक रहे हैं, किसी के भी समझ में नहीं आता। इसलिए कहा जाता है कि स्वामी जी के बाद कोई ऐसा किसान नेता पैदा नहीं हुआ जो चुनावी राजनीति से दूर रहकर सिर्फ किसानों की ही बात करे। उनके भावी हितों-जरूरतों की ही चर्चा परिचर्चा करे और उन्हें आगे बढ़ाए।

कहने को तो आज प्रत्येक राजनीतिक दल में किसान संगठन हैं लेकिन किसान हित में उनकी भूमिका अल्प या फिर नगण्य है। इस स्थिति को बदले बिना कोई राष्ट्रीय किसान नेता पैदा होना सम्भव ही नहीं है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दण्डी संन्यासी होने के बावजूद उन्होंने रोटी को भगवान कहा और किसानों को देवता से भी बढ़कर बताया। इससे किसानों को भी अपनी महत्ता का भी पता चला। किसानों के प्रति स्वामी जी इतने संवेदनशील थे कि तत्कालीन असह्य परिस्थितियों में उन्होंने स्पष्ट नारा दिया कि "जो अन्न वस्त्र उपजाएगा, अब वो कानून बनाएगा। ये भारतवर्ष उसी का है, अब शासन वही चलाएगा।।"

निःसन्देह, स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने आजादी कम और गुलामी ज्यादा देखी थी। इसलिए काले अंग्रेजों से ज्यादा गोरे अंग्रेजों के खिलाफ मुखर रहे। समझा जाता है कि किसानों से मालगुजारी वसूलने की प्रक्रिया में जब उन्होंने सरकारी मुलाजिमों का आतंक और असभ्यता देखी तो किसानों की दबी आवाज को स्वर देते हुए कहा कि "मालगुजारी अब नहीं भरेंगे, लट्ठ हमारा जिंदाबाद।" इतिहास साक्षी है कि किसानों के बीच यह नारा काफी लोकप्रिय रहा और ब्रिटिश सल्तनत की चूलें हिलाने में अधिक काम आया।

स्वामीजी का परिचय संक्षिप्त है, लेकिन व्यक्तित्व विराट। हालांकि परवर्ती जातिवादी किसान नेताओं और उनके दलों ने उनके व्यक्तित्व को वह मान-सम्मान नहीं दिया, जिसके वे असली हकदार हैं। यही वजह है कि किसान आंदोलन हमेशा लीक से भटक गया। समाजवादी और वामपंथी नेता इतने निखट्टू निकले की, उनलोगों ने किसान आंदोलन का गला ही घोंट किया। उनके बाद चौधरी चरण सिंह और महेंद्र टिकैत किसान नेता तो हुए, लेकिन किसी को अखिल भारतीय पहचान नहीं मिली, क्योंकि इनकी राष्ट्रीय पकड़ कभी विकसित ही नहीं हो पाई। दोनों पश्चिमी उत्तरप्रदेश में ही सिमट कर रह गए। किसान हित में कोई उल्लेखनीय उपलब्धि भी उनके खाते में नहीं रही।

गोपाल जी राय

वरिष्ठ पत्रकार और स्तम्भकार

(लेखक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अंतर्गत बीओसी- डीएवीपी के सहायक निदेशक हैं।)







Unlock 5 के 62वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल संक्रमितों का 4.60 प्रतिशत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   21:45
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Unlock 5 के 62वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल संक्रमितों का 4.60 प्रतिशत
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मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि संक्रमण के नए मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 4,35,603 मरीज उपचाराधीन हैं। देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के कुल 31,118 नए मामले आए। केरल, दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगगढ़ जैसे राज्यों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटी है जबकि उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा में मरीजों की संख्या बढ़ी है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या पांच लाख से नीचे बनी हुई है और यह कुल संक्रमितों का महज 4.60 प्रतिशत है। मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि संक्रमण के नए मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 4,35,603 मरीज उपचाराधीन हैं। देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के कुल 31,118 नए मामले आए। केरल, दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगगढ़ जैसे राज्यों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटी है जबकि उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा में मरीजों की संख्या बढ़ी है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 31,118 मामले आए जबकि 41,985 मरीज ठीक हो गए। अब तक 88,89,585 मरीजों के स्वस्थ हो जाने से ठीक होने की दर 93.94 प्रतिशत हो गयी है। स्वस्थ होने वाले मरीजों में से 76.82 प्रतिशत रोगी 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। केरल में सबसे ज्यादा 6055 मरीज ठीक हो गए। दिल्ली में 5824 मरीज ठीक हो गए। मंत्रालय ने कहा कि संक्रमण के 77.79 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश से आए। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 3837 मामले आए। दिल्ली में 3726 और केरल में 3382 मामले आए। पिछले 24 घंटे में 482 मरीजों की मौत हो गयी। इनमें से 81.12 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। दिल्ली में 108 मरीजों की मौत हो गयी। महाराष्ट्र में 80 और पश्चिम बंगाल में 48 और लोगों ने दम तोड़ दिया। देश में संक्रमण के नए मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या 94,62,809 हो गयी। संक्रमण के कारण 482 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 1,37,621 हो गयी।

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पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने की बात कभी नहीं कही: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने के बारे में कभी कोई बात नहीं हुई। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने प्रेसवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि कोविड टीका अभियान का उद्देश्य संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ना होगा। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ना होगा। अगर हम आबादी के कुछ हिस्से का टीकाकरण करने और संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने में सक्षम हैं तो हमें देश की पूरी आबादी के टीकाकरण की आवश्यकता नहीं होगी। भार्गव ने कहा, मास्क की भूमिका भी बेहद अहम है और टीकाकरण के बाद भी यह जारी रहेगी। क्योंकि हम एक समय में आबादी के छोटे हिस्से के साथ यह शुरू कर रहे हैं इसलिए वायरस के संक्रमण प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने में मास्क की भूमिका बेहद अहम होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने के बारे में कभी कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार ने पूरे देश की आबादी के टीकाकरण के बारे में कभी नही कहा।

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अप्रिय चिकित्सा घटना’ के शुरुआती निष्कर्षों के मद्देनजर परीक्षण रोकने की आवश्यकता नहीं थी: सरकार

केंद्र ने मंगलवार को कहा कि चेन्नई में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कोविड-19 टीके के परीक्षण में हिस्सा लेने वाले एक भागीदार के कथित तौर पर दिक्कतों का सामना करने के संबंध में शुरूआती निष्कर्षों के मद्देनजर परीक्षण रोकने की आवश्यकता नहीं थी। केंद्र ने कहा कि यह दवा नियामक को पता लगाना है कि घटना और प्रयोग में कोई संबंध है या नहीं। सीरम इंस्टीट्यूट के परीक्षण में ‘अप्रिय चिकित्सा घटना’ होने के आरोपों पर सरकार ने कहा कि इसका टीका निर्माण की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। चेन्नई में ‘‘कोविशील्ड’’ टीका के परीक्षण के तीसरे चरण में 40 वर्षीय एक व्यक्ति ने गंभीर दुष्प्रभाव की शिकायतें कीं जिसमें तंत्रिका तंत्र में खराबी आना और बोध संबंधी दिक्कतें पैदा होना शामिल है। उसने परीक्षण को रोकने की मांग करने के अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) एवं अन्य से पांच करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा है। बहरहाल, एसआईआई ने रविवार को इन आरोपों को ‘‘दुर्भावनापूर्ण और मिथ्या’’ बताकर खारिज कर दिया और कहा कि वह सौ करोड़ रुपये का मुआवजा मांगेगा। आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि दवाओं या टीके या अन्य स्वास्थ्य प्रयोगों में ‘अप्रिय चिकित्सा घटनाएं’ होती हैं।

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कैबिनेट सचिव ने राज्यों के साथ कोविड-19 के टीके को लेकर समीक्षा बैठक की

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने मंगलवार को राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ कोविड-19 के टीकों के उपलब्ध होने के बाद इसे लोगों को दिये जाने के बंदोबस्त की समीक्षा की तथा उनसे स्वास्थ्यकर्मियों आदि का डेटाबेस तैयार करने को कहा जिन्हें प्राथमिकता के साथ टीका लगाया जाएगा। बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य सचिवों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट सचिव ने कोविड-19 रोधी टीके काउपयोग शुरू करने के इंतजाम की समीक्षा की और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से उन प्राथमिकता वाले समूह का डेटाबेस तैयार करने को कहा जिन्हें प्रारंभिक चरण में टीका लगाया जाएगा। तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा कर इन शहरों में टीका उत्पादन इकाइयों में टीके के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया की समीक्षा की थी। केंद्र सरकार कोरोना वायरस का टीका उपलब्ध होने पर इसके त्वरित और प्रभावी वितरण के लिए कदम उठा रही है। 

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गुजरात: भाजपा सांसद अभय भारद्वाज का कोविड-19 संक्रमण से निधन

गुजरात से भाजपा के राज्यसभा सदस्य अभय भारद्वाज का मंगलवार को चेन्नई के एक अस्पताल में कोविड-19 संक्रमण के इलाज के दौरान निधन हो गया।उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने यह जानकारी दी। भारद्वाज (66) जाने-माने वकील थे और इसी साल जून में राज्यसभा के लिए चुने गए थे।अगस्त में पार्टी की बैठकों और राजकोट में हुए रोड शो में भाग लेने के बाद वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। सांसद के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया। उन्होंने ट्वीट किया, गुजरात से राज्यसभा सांसद अभय भारद्वाज जी एक प्रतिष्ठित वकील थे और समाज सेवा में तत्पर रहते थे। बहुत दुख की बात है कि हमने राष्ट्रीय विकास के बारे में चिंतन करने वाले एक विलक्षण और व्यावहारिक व्यक्तित्व को खो दिया। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। ओम शांति। गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोडवाडिया ने भी भारद्वाज की मौत पर दुख जताया। 

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कर्नाटक में कोविड-19 के 1,330 नये मामले, 14 मरीजों की मौत

कर्नाटक में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,330 नए मामले सामने आये तथा 14 मरीजों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 8,86,227 तक पहुंच गई, जबकि मृतकों की संख्या 11,792 हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, आज 886 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। राज्य मेंअब तक 8,50,707 लोग इस संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। विभाग के अनुसार, राज्य में अभी 23,709 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनमें से 336 ‘आईसीयू’ में हैं। बेंगलुरु शहर में मंगलवार को संक्रमण के 758 नये मामले सामने आये।

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जम्मू कश्मीर में कोविड-19 के 454 नए मामले, आठ मरीजों की मौत

जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को कोविड-19 के 454 नए मामले सामने आए और पिछले 24 घंटे में आठ लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,10,678 हो गई है। वहीं, मृतकों की संख्या बढ़कर 1,702 हो गई है। अधिकारी ने बताया कि नए मामलों में से 217 मामले जम्मू संभाग से तथा 237 मामले कश्मीर घाटी से सामने आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर जिले में सबसे ज्यादा 118 नये मामले सामने आए जबकि जम्मू में 95 लोग संक्रमित पाये गए। उन्होंने बताया कि अब केंद्रशासित प्रदेश में 5,000 मरीजों का इलाज चल रहा है और अभी तक 1,04,068 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीच, जम्मू-कश्मीर में पिछले 24 घंटे में आठ लोगों की मौत हुई। इनमें से पांच मरीजों की मौत जम्मू में और तीन की मौत कश्मीर घाटी में हुई।







Unlock 5 के 61वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, स्वस्थ मरीजों और सक्रिय मामलों के बीच बढ़ रहा है अंतर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 30, 2020   21:50
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Unlock 5 के 61वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, स्वस्थ मरीजों और सक्रिय मामलों के बीच बढ़ रहा है अंतर
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मंत्रालय के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां प्रति दस लाख आबादी पर कम मौतें हुई। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में पिछले एक महीने में उपचाराधीन मामलों की संख्या घटी है, जबकि मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़ी है।

नयी दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश में कोविड-19 के 38,772 नए मामले आए तथा 45,333 और मरीज स्वस्थ हो गए। देश में अब तक 88,47,600 लोग संक्रमण से उबर चुके हैं। मंत्रालय ने कहा , ‘‘स्वस्थ होने वाले मरीजों और उपचाराधीन मरीजों की संख्या के बीच अंतर बढ़ रहा है।’’देश में 4,46,952 मरीजों का उपचार चल रहा है जो कि संक्रमण के कुल मामलों का महज 4.74 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘नए मामलों की तुलना में ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे ठीक होने की दर भी सुधरकर 93.81 प्रतिशत हो गयी है।’’ मंत्रालय के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां प्रति दस लाख आबादी पर कम मौतें हुई। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में पिछले एक महीने में उपचाराधीन मामलों की संख्या घटी है, जबकि मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़ी है। जांच की संख्या भी बढ़ी है। एक दिन में 8,76,173 जांच के साथ अब तक 14 करोड़ से ज्यादा नमूनों की जांच हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 78.31 प्रतिशत नए मामले केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु से आए। संक्रमण से ठीक होने के 76.94 प्रतिशत मामले दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक से आए। सबसे ज्यादा दिल्ली में 6325 लोगों ने संक्रमण को मात दी। मंत्रालय ने कहा कि 443 और मरीजों की मौत हो गयी। इनमें से 78.56 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। इनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब शामिल हैं। देश में कोविड-19 के 38,772 नए मामलों के साथ संक्रमितों की कुल संख्या 94,31,691 हो गयी। संक्रमण के कारण 443 और मरीजों की मौत हो जाने से मृतकों की संख्या 1,37,139 हो गयी।

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राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 20 और लोगों की मौत,2677 नये संक्रमित सामने आए

राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमण के राजधानी जयपुर में अब तक के सबसे अधिक 745 मरीजों सहित सोमवार को 2,677 नये मामले सामने आये है। इसके साथ ही अब तक राज्य में सामने आएसंक्रमितों की कुल संख्या 2,68,063 हो गई है। वहीं, राज्य में संक्रमण से 20 और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में कोविड-19 से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 2,312 तक पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान की पूर्व मंत्री व भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ विधायक किरण महेश्वरी का रविवार देर रात निधन हो गया। वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गयीं थीं और गुरुग्राम के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अधिकारियों ने बताया,‘‘ सोमवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से 20 और लोगों की मौत हुई हैं, जिससे महामारी में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2,312 हो गयी।’’ उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से जयपुर और जोधपुर में सोमवार को पांच-पांच, अजमेर में तीन और संक्रमित मरीजों की मौत होने से अब तक जयपुर में 435, जोधपुर में 239, अजमेर में 187, बीकानेर में 161, कोटा में 135, भरतपुर में 105, उदयपुर में 95, और पाली में 90 लोगों की कोविड-19 की वजह से जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,37,098 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। 

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महाराष्ट्र में कोविड-19 के 3837 नए मामले, केरल में 3382 नए मरीज मिले

महाराष्ट्र में सोमवार को कोविड-19 के 3,837 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 18,23,896 हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण से 80 लोगों की मौत हुई, जिसके बाद कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 47,151 हो गई। वहीं, स्वस्थ हुए लोगों की संख्या 16,85,122 है जबकि 90,557 लोगों का उपचार चल रहा है। केरल में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 3,382 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर छह लाख के पार हो गई। वहीं 21 लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 2,244 हो गई। मुख्यमंत्री पी विजयन ने बताया कि अब तक 5,38,713 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अक्टूबर के दौरान मामले बढ़े थे, जो अब घटने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल 61,894 लोगों का उपचार चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में संक्रमण के 370 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,10,224 हो गई। वहीं पिछले 24 घंटे में नौ लोगों की मौत हुई और मृतकों की संख्या 1,694 हो गई। राज्य में फिलहाल 4,965 लोगों का उपचार चल रहा है और अब तक 1,03,562 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

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गुजरात में कोविड-19 के 1502 नए मामले, 20 मरीजों की मौत

गुजरात में सोमवार को कोविड-19 के 1502 नए मामले आने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,09,780 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण से 20 और मरीजों की मौत से मृतकों की संख्या बढ़कर 3989 पर पहुंच गयी। विभाग ने बताया कि स्वस्थ होने के बाद 1401 और मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी। राज्य में अब तक 1,90,820 लोग ठीक हो चुके हैं। विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य में कोविड-19 के ठीक होने की दर 90.96 प्रतिशत है।पिछले 24 घंटे में 69,875 नमूनों की जांच के साथ अब तक 78,25,615 जांच हो चुकी है।

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उत्तराखंड में 455 नए कोविड मामले

उत्तराखंड में सोमवार को 455 नए मरीजों में कोविड-19की पुष्टि हुई है जबकि प्रदेश में नौ अन्य मरीजों ने संक्रमण के कारण दम तोड दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 455 नए मरीजों के मिलने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 74795 हो गयी है। ताजा मामलों में से सर्वाधिक 185 देहरादून जिले में मिले जबकि नैनीताल में57,पिथौरागढ में 49, हरिद्वार में 23 और पौड़ी में 19 मरीज सामने आए। बुलेटिन के अनुसार सोमवार को प्रदेश में नौ और कोविड मरीजों ने दम तोड़ दिया। महामारी से अब तक प्रदेश में 1231 मरीज जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में सोमवार को 352 और मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो गए। अब तक कुल 67827 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या 5059 है। प्रदेश में कोविड 19 के 678 मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।

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त्रिपुरा में कोविड-19 के 21 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 32,695 हुई

त्रिपुरा में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के कम से कम 21 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 32,695 हो गई। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस दौरान संक्रमण से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई? जिससे मृतकों की संख्या 367 बनी हुई है। इनमें से 185 लोगों की मौत पश्चिमी त्रिपुरा जिले में हुई है और अगरतला इसी का हिस्सा है। त्रिपुरा में अभी 598 लोगों का उपचार चल रहा है और बीमारी से अब तक 31,707 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

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केंद्र ने राज्यों से कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान करने को कहा

केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे एक बार टीका उपलब्ध हो जाने की स्थिति में कोविड-19 टीकाकरण अभियान को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं, एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न सहित स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान करें। केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा है कि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न सहित नर्सों, सहायक नर्सों और दवा विक्रेताओं की टीकाकरण अभियान को अंजाम देने के लिए पहचान की जाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि राज्य उपरोक्त श्रेणियों से सेवानिवृत्त कर्मियों की भी पहचान कर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार कोरोना वायरस रोधी टीका उपलब्ध होने जाने की स्थिति में, इसे विशेष कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत वितरित किया जाएगा। इस काम में मौजूदा सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) से संबंधित प्रक्रिया, प्रौद्योगिकी और नेटवर्क का पालन किया जाएगा। यह यूआईपी के समानांतर चलेगा। सूत्रों के अनुसार टीकाकरण अभियान में स्वास्थ्यकर्मियों को प्राथमिकता दी जाएगी। डॉक्टरों, एमबीबीएस छात्रों, नर्सों और आशा वर्करों सहित अग्रिम पंक्ति के लगभग एक करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान की गई है जिन्हें उपलब्ध होते ही यह टीका लगाया जाएगा।

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कोविड-19: दिल्ली सरकार ने आरटी-पीसीआर जांच का शुल्क घटाकर 800 रुपये किया

दिल्ली सरकार ने कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच की कीमत 2400 रुपये से घटाकर 800 रुपये करने के लिए सोमवार को आदेश जारी कर दिया। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरटी-पीसीआर जांच की कीमत घटाने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निजी प्रयोगशालाओं से कहा गया है कि वे सरकारी टीमों द्वारा लिए गए नमूनों और जिलों एवं अस्पतालों के कहने पर नमूने वाले स्थल पर निजी प्रयोगशालाओं की ओर से लिए गए नमूनों की जांच करने के लिए 800 रुपये का शुल्क लें। बहरहाल, घर पर जाकर लिए गए नमूने की कोविड-19 जांच का शुल्क 1200 रुपये रहेगा। सभी प्रयोगशालाओं एवं अस्पतालों से जांच की संशोधित कीमत 24 घंटे के भीतर उचित स्थान पर प्रदर्शित करने को कहा गया है। निजी प्रयोगशालाओं से यह भी कहा गया है कि वे नमूनों की जांच कर रिपोर्ट को ग्राहक (सरकार या व्यक्ति) के साथ साझा करें और नमूने लेने के 24 घंटे के भीतर सभी रिपोर्टों को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पोर्टल पर अपडेट करें। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने पहले कहा था कि प्रयोगशालाओं को सभी जांचों की रिपोर्ट एक दिन में जारी करने में मुश्किल हो रही है।







Unlock 5 के 59वें दिन कोरोना वैक्‍सीन पर पीएम ने लिया तीन कंपनियों की तैयारियों का जायजा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   22:35
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Unlock 5 के 59वें दिन कोरोना वैक्‍सीन पर पीएम ने लिया तीन कंपनियों की तैयारियों का जायजा
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गहलोत ने शनिवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) अस्पताल, जयपुर में 70 बिस्तर वाले नए कोविड आईसीयू, छह जिलों में आरटी-पीसीआर जांच प्रयोगशाला तथा जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में अत्याधुनिक कैंसर उपचार वार्ड तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण भी किया।

अहमदाबाद/हैदराबाद/पुणे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के टीके के विकास कार्य की समीक्षा के लिए शनिवार को अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा कि दिन भर के दौरे का उद्देश्य नागरिकों के टीकाकरण में भारत के प्रयासों में आने वाली चुनौतियों, तैयारियों और रोडमैप जैसे पहलुओं की जानकारी हासिल करना था। मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत अहमदाबाद के नजदीक दवा कंपनी जाइडस कैडिला के संयंत्र के दौरे के साथ की। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘अहमदाबाद में जाइडस बायोटेक पार्क का दौरा किया और जाइडस कैडिला द्वारा विकसित किये जा रहे डीएनए आधारित स्वदेशी टीके के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। मैंने इस कार्य में लगी टीम के प्रयासों के लिए उसकी सराहना की। भारत सरकार इस यात्रा में उनका सहयोग करने के लिए उनके साथ सक्रियता से काम कर रही है।’’ प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद से करीब 20 किमी दूर स्थित जाइडस कैडिला के चांगोदर औद्योगिक क्षेत्र स्थित अनुसंधान केंद्र में टीके के विकास की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान मोदी ने पीपीई किट पहन रखी थी। एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री दिल्ली से करीब नौ बजे अहमदाबाद हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से वह जाइडस कैडिला के संयंत्र गए। उन्होंने वहां कंपनी के प्रमोटरों और अधिकारियों से बात की। उल्लेखनीय है कि जाइडस कैडिला ने कोविड-19 के खिलाफ जाइकोव-डी नामक संभावित टीके का विकास किया है जिसके पहले चरण का क्लिनिकल परीक्षण पूरा हो चुका है। कंपनी ने अगस्त में दूसरे चरण का परीक्षण शुरू किया है। एक अधिकारी के अनुसार कंपनी के अधिकारियों ने संयंत्र में टीका विकास कार्यों के बारे में मोदी को विस्तार से जानकारी दी। उन्हें टीका उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी गयी। प्रधानमंत्री ने वहां वैज्ञानिकों और टीका के विकास से जुड़े लोगों से बातचीत की। जाइडस कैडिला के अध्यक्ष पंकज पटेल ने हाल ही में कहा था कि कंपनी का उद्देश्य मार्च 2021 तक टीके का परीक्षण पूरा करना है और वह एक साल में 10 करोड़ तक खुराक का उत्पादन कर सकती है। मोदी करीब एक घंटे तक संयंत्र में रहे। इसके बाद वह हवाईअड्डे के लिए निकले और वहां से 11.40 बजे हैदराबाद रवाना हो गए।

मोदी हैदराबाद के नजदीक हकीमपेट वायु सेना हवाई अड्डे पर दोपहर करीब एक बजे पहुंचे। हैदराबाद के हकीमपेट वायु सेना हवाई अड्डे पर उतरने के बाद तेलंगाना के मुख्य सचिव सोमेश कुमार, पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री वायु सेना हवाई अड्डे से करीब 20 किलोमीटर दूर जीनोम वैली स्थित भारत बायोटेक की इकाई गए। भारत बायोटेक कोविड-19 की रोकथाम के लिए संभावित टीके कोवैक्सिन का विकास भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणुविज्ञान संस्थान के साथ मिलकर कर रहा है, जिसके तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। हैदराबाद में जीनोम वैली स्थित भारत बायोटेक की बीएसएल-3 (जैव-सुरक्षा स्तर 3) इकाई में टीके का विकास किया जा रहा है और यहीं इसका उत्पादन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से कोवैक्सिन के बारे में जानकारी प्राप्त की। घंटे भर के दौरे के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘हैदराबाद में भारत बायोटेक कंपनी में कोविड-19 के स्वदेशी टीके के बारे में जानकारी मिली। वैज्ञानिकों को अभी तक किए गए परीक्षण में प्रगति के लिए बधाई। उनकी टीम आईसीएमआर के साथ निकटता से काम कर रही है।’’ कंपनी से बाहर निकलने के बाद मोदी मुख्य द्वार पर अपने वाहन से उतर गए और मीडियाकर्मियों तथा पास खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। मोदी तीन बजकर 30 मिनट पर पुणे के लिए रवाना हो गए और वहां वह साढ़े चार बजे पहुंचे। हैदराबाद से पुणे हवाई अड्डे पर शाम करीब साढ़े चार बजे पहुंचने के बाद मोदी हेलीकॉप्टर से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के लिए रवाना हुए। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में मोदी ने वैज्ञानिकों से बातचीत की और वहां टीका विकास पर चल रहे कामकाज का जायजा लिया। वह दिल्ली जाने के लिए शाम छह बजे पुणे हवाई अड्डे रवाना हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि मोदी के एसआईआई दौरे का उद्देश्य कोरोना वायरस के लिए टीके की प्रगति की समीक्षा करना है और इसके लांच के समय, उत्पादन और वितरण व्यवस्था का जायजा लेना है। टीके के विकास के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैश्विक दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ भागीदारी की है।

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मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 1634 नए मामले, 13 लोगों की मौत

मध्यप्रदेश में शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1634 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या 2,03,231 तक पहुंच गयी। वहीं, राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से 13 और व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे मरने वालों की संख्या 3,237 हो गयी है। प्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से इंदौर में तीन, भोपाल, विदिशा व रतलाम में दो-दो, और जबलपुर, सागर, सतना एवं झाबुआ में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘राज्य में अब तक कोरोना वायरस से सबसे अधिक 752 मौत इंदौर में हुई हैं, जबकि भोपाल में 515, उज्जैन में 100, सागर में 139, जबलपुर में 222 एवं ग्वालियर में 180 लोगों की मौत हुई हैं। बाकी मौतें अन्य जिलों में हुई हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में शनिवार को कोविड-19 के 568 नये मामले इंदौर जिले में सामने आये हैं, जबकि भोपाल में 356, ग्वालियर में 86 और जबलपुर में 48 नये मामले आये हैं।

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दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 4,998 नये मामले, संक्रमित होने की दर 7.24 फीसदी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के4,998नये मामले सामने आये जिसके बाद संक्रमण की दर 7.24 प्रतिशत हो गयी है जो 23 अक्टूबर के बाद सबसे कम है। इस बीच राजधानी में रिकार्ड 69051 नमूनों की जांच की गयी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गयी है। बुलेटिन में कहा गया है कि संक्रमण से 89 और लोगों की मौत हो गयी है जिसके बाद राजधानी में इससे मरने वालों की संख्या बढ़ कर 8,998 हो गयी है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली में अब तक का सबसे कम संक्रमण दर 23 अक्टूबर को 6.98 फीसदी थी। शुक्रवार को यह दर 8.51 प्रतिशत जबकि बृहस्पतिवार को 8.65 प्रतिशत एवं बुधवार को 8.49 फीसदी थी। इसके अनुसार दिल्ली में कल 69,051 नमूनों की जांच की गयी है जो एक रिकॉर्ड है। इनमें 33,147 आरटी—पीसीआर जांच और 35,904 त्वरित एंटीजन जांच शामिल है। बृहस्पतिवार को 64,455 नमूनों की जांच की गयी थी।

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महाराष्ट्र में कोविड-19 के 5,965 नए मामले, 75 लोगों की मौत

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 5,965 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर शनिवार को 18,14,515 हो गई। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान कोविड-19 से 75 मरीजों की मौत हुई और कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 46,986 हो गई। कुल 3,937 मरीज इस दौरान स्वस्थ भी हुए और कुल ठीक हुए लोगों की संख्या बढ़कर 16,76,564 हो गई। राज्य में अभी 89,905 लोगों का इलाज चल रहा है। मुंबई में 1,063 नए मामले सामने आए हैं और शहर में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,81,881 हो गई। 

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राजस्थान में कोविड-19 की जांच 800 रुपये में होगी: गहलोत

राजस्थान में निजी प्रयोगशालाओं में कोरोना वायरस संक्रमण की जांच अब 1200 रुपये के बजाय 800 रुपये में होगी। राज्य सरकार ने शनिवार को इस बारे में आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि देश में जांच किट के दाम में गिरावट व उपलब्धता को देखते हुए राज्य सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण की आरटी-पीसीआर जांच का अधिकतम शुल्क 1200 रुपये से घटाकर 800 रुपये करने का फैसला किया है। शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इससे पहले दिन में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, किट की लागत में कमी को देखते हुए अब राज्य सरकार सभी निजी प्रयोगशालाओं को यह जांच 1200 रुपये के बजाय 800 रुपये में करने को पाबंद करेगी। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण की जांच केवल आरटी-पीसीआर के जरिए हो रही है, जो पूरी दुनिया में सबसे विश्वसनीय जांच प्रक्रिया है। गहलोत ने शनिवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) अस्पताल, जयपुर में 70 बिस्तर वाले नए कोविड आईसीयू, छह जिलों में आरटी-पीसीआर जांच प्रयोगशाला तथा जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में अत्याधुनिक कैंसर उपचार वार्ड तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण भी किया। 

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आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के 625 नए मामले

आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के 625 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर शनिवार को 8,67,063 हो गई। ताजा बुलेटिन में बताया गया कि पिछले 24 घंटे में सुबह नौ बजे तक पांच और लोगों की मौत हुई, जबकि 1,186 मरीज स्वस्थ हो गए। बुलेटिन के अनुसार अब 11,571 मरीजों का इलाज चल रहा है और अब तक 8,48,511 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में अभी कुल संक्रमण की पुष्टि दर 8.70 फीसदी है। राज्य में स्वस्थ होने की दर 97.86 फीसदी है जबकि मृत्यु दर 0.81 फीसदी है।

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कोविड टीके के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली तैयार कर रहा है विशेषज्ञ समूह: राघवन

देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर एक विशेषज्ञ समूह मौजूदा स्वास्थ्य सेवा से समझौता किए बिना कोविड-19 टीके के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली तैयार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी ने अनुसंधान प्रयोगशालाओं और उद्योग के बीच तथा उद्योग और समाज के बीच असाधारण सहयोग को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर एक विशेषज्ञ समूह ने टीकों के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को तैयार करने के लिए काफी काम किया है। विजय राघवन के हवाले से एक बयान में कहा गया, यह सब मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं से समझौता किए बिना किया जा रहा है, जिसमें हमारे राष्ट्रीय चुनाव, टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े हमारे सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के वृहद अनुभव का उपयोग किया जा रहा है। राघवन ने 26 नवंबर को ग्लोबल इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी एलायंस (जीआईटीए) के 9वें स्थापना दिवस पर आयोजित डिजिटल कार्यक्रम में यह बात की। विजयराघवन ने कहा कि विश्व स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं के संदर्भ में ‘आत्मनिर्भर भारत’ को देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘तीन स्तंभ हैं जिन्हें आत्मनिर्भरता की रूपरेखा तैयार करते समय ध्यान में रखने की आवश्यकता है, वह हैं- नीति, विनियमन, क्रियान्वयन और इसे तीव्रता और तालमेल के साथ किए जाने की आवश्यकता।