वाराणसी में 'नमो घाट' बनकर तैयार, जानिये श्रद्धालुओं को यहां कौन-सी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी

वाराणसी में 'नमो घाट' बनकर तैयार, जानिये श्रद्धालुओं को यहां कौन-सी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी
Prabhasakshi

नमो घाट पर तीन जोड़ी हाथ की अभिवादन करती आकृतियां बनाई गई हैं। सूर्य का अभिवादन और गंगा को प्रणाम करते हाथों के इन तीनों शिल्पों की वजह से इस घाट को लोग ‘नमो’ घाट कहते हैं। खिड़किया घाट के प्रथम चरण का काम समाप्ति की ओर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को विकास की इतनी परियोजनाएं दी हैं कि विश्व की इस सबसे प्राचीन नगरी का कायाकल्प हो गया है। आधुनिकता का समावेश लिये हुए और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए शिवनगरी काशी आज जिस तरह चमक दमक रही है वह हर किसी के मन को प्रफुल्लित कर देता है। विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुके बनारस शहर में वैसे तो देखने के लिए बहुत कुछ है लेकिन अब इस सूची में एक और नाम जुड़ने जा रहा है। वाराणसी में, देश दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करने वाले गंगा नदी के घाटों में अब एक और नया घाट शामिल होने जा रहा है। इस नए घाट का नाम "खिड़किया घाट" है लेकिन इसे ‘‘नमो घाट’’ भी कहा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस घाट का उद्घाटन कर सकते हैं।

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नमो घाट पर तीन जोड़ी हाथ की अभिवादन करती आकृतियां बनाई गई हैं। सूर्य का अभिवादन और गंगा को प्रणाम करते हाथों के इन तीनों शिल्पों की वजह से इस घाट को लोग ‘नमो’ घाट कहते हैं। खिड़किया घाट के प्रथम चरण का काम समाप्ति की ओर है। इस पर करीब 34 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस घाट से जल मार्ग और वायु मार्ग को भी जोड़ा जाएगा ताकि पर्यटक अन्य शहरों तक जा सकें। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्राचीनता को संजोए हुए, आधुनिकता के साथ तालमेल कर आगे बढ़ती काशी के करीब 84 घाटों की श्रृंखला में यह नया घाट लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. डी. वासुदेवन ने बताया कि करीब 21000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहे इस घाट की लागत लगभग 34 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि यह लगभग आधा किलोमीटर लम्बा है और इसका पहला चरण बनकर तैयार हो गया है। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण में ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस घाट पर ‘वोकल फॉर लोकल’ भी दिखेगा। श्रद्धालु बनारस की सुबह देखने के बाद यहां शाम को गंगा आरती में शामिल हो सकेंगे।”

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यहां ओपन थियेटर, लाइब्रेरी, बनारसी खान पान के लिए फूड कोर्ट की व्यवस्था है। यहां एक बहुउद्देशीय प्लेटफार्म भी होगा, जहां हेलीकॉप्टर उतरने के साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हो सकता है। यहां श्रद्धालु काशी विश्वनाथ धाम सुगम दर्शन का टिकट ले सकते हैं। साथ ही श्रद्धालु जेटी से बोट द्वारा श्री काशी विश्वनाथ धाम भी जा सकेंगे। घाट के निर्माण में जिस सामग्री का इस्तेमाल किया गया है उससे बाढ़ में घाट सुरक्षित रहेगा। हालांकि देखने में खिड़किया घाट पुराने घाटों की तरह है, लेकिन यहां तक गाड़ियां जा सकती हैं और घाट पर ही वाहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी है।

नमो घाट पर पर्यटक वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा भी ले सकेंगे। यहां पर लोग मॉर्निंग वाक, व्यायाम और योग आदि कर सकेंगे। नमो घाट पर दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए मां गंगा के चरणों तक जाने के लिए रैंप भी बनाया गया है। यहां एक बहुउद्देश्यीय प्लेटफार्म होगा, जहां हेलीकॉप्टर उतरने के साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी हो सकता है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सीएनजी से चलने वाली नावों के लिए फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन भी खिड़किया घाट पर ही बनाया गया है। इसके अलावा अन्य गाड़ियों के लिए भी यहाँ अलग से सीएनजी स्टेशन बनाया गया है। खिड़किया घाट से क्रूज के जरिए पास के अन्य शहरों का भ्रमण करने की सुविधा भी यहीं से मिलेगी। वहीं बहुउद्देश्यीय प्लेटफार्म से हेलीकाप्टर द्वारा उड़ान भरकर अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक भी जाया जा सकता है।