स्वेच्छा से, सुरक्षित रक्तदान के लिए प्रेरित करता है ‘विश्व रक्तदाता दिवस’

स्वेच्छा से, सुरक्षित रक्तदान के लिए प्रेरित करता है ‘विश्व रक्तदाता दिवस’

रक्त दान एक ऐसा महान कार्य है जिससे विभिन्न परिस्थितियों में रक्त की कमी होने पर एक इंसान दूसरे इंसान की मदद कर सकता है और कई केस में तो रक्त दान किसी मरीज के लिए जीवन दान भी बन जाता है। कहा गया है कि एक यूनिट रक्त कम से कम 3 जिंदगियां बचा सकता है।

हमारे शरीर में रक्त की भूमिका अहम है, जीवन के लिए महत्वपूर्ण ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को शरीर के अन्य भागों तक पहुंचाने, शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, बीमारियों से लड़ने, घाव भरने, जीवाणु और विषाणुओं से लड़ने इत्यादि में रक्त ही कार्य करता है। रक्त की कमी शरीर में कई घातक रोगों को जन्म देती है और कई मामलों में तो यह जानलेवा भी हो जाती है। 

कई दुर्घटनाओं और कई बीमारियों में मरीजों को रक्त की अत्याधिक कमी हो जाती है जिसके चलते ऑपरेशन करते वक्त उन्हें तुरंत ही बाहरी रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ब्लड कैंसर, हीमोफीलिया, थैलसीमिया इत्यादि बीमारियां तो ऐसी हैं जिनमें रक्त की जरूरत लगातार पड़ती है। इसके अलावा प्रसव या मिस कैरेज की स्थिति में भी मां या नवजात को खून की जरूरत पड़ सकती है, एक अनुमान के मुताबिक डेढ़ लाख महिलाओं की प्रसव के बाद रक्व स्त्राव की वजह से मौत हो जाती है।

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रक्त दान एक ऐसा महान कार्य है जिससे विभिन्न परिस्थितियों में रक्त की कमी होने पर एक इंसान दूसरे इंसान की मदद कर सकता है और कई केस में तो रक्त दान किसी मरीज के लिए जीवन दान भी बन जाता है। कहा गया है कि एक यूनिट रक्त कम से कम 3 जिंदगियां बचा सकता है। गौरतलब है कि रक्त की कमी की पूर्ति के लिए इंसान आज भी दूसरे इंसान के दिए रक्त पर ही निर्भर है। रक्त कृत्रिम रूप से तैयार करने के लिए हालांकि दुनिया भर में वैज्ञानिक लगातार प्रयास कर रहे है किन्तु इसमें अभी तक पूर्ण सफलता नहीं मिली है। 

रक्त दान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है, इस दिवस की शुरूआत 14 जून 2005 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रेड क्रॉस के सहयोग से की थी। ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ को मनाए जाने का उद्देश्य स्वेच्छा से नियमित तौर पर सुरक्षित रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना और रक्तदान से लोगों का जीवन बचाने वाले रक्तदाताओं का धन्यवाद करना है। ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ पर रक्तदान के लिए जगह-जगह कैंप का आयोजन किया जाता है। 

‘विश्व रक्तदाता दिवस’ नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर को समर्पित है, जिन्होंने ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी। कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म 14 जून 1868 को हुआ था, उनके जन्म दिन की तारीख 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। गौरतलब है कि कार्ल लैंडस्टीनर को एबीओ रक्त समूह प्रणाली की खोज पर फिजियोलॉजी के लिए प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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‘विश्व रक्तदाता दिवस’ प्रतिवर्ष एक विशेष थीम के साथ सैलिब्रेट किया जाता है, जो उन निस्वार्थ नागरिकों को समर्पित होती है जो अज्ञात लोगों के लिए अपनी स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं। पिछले साल वर्ष 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से विश्व रक्तदाता दिवस की थीम सेफ ब्लड सेव्स लाइफ रखी गई थी वहीं इस साल वर्ष 2021 के लिए थीम ‘गिव ब्लड एंड कीप द वर्ल्ड बीटिंग (Give blood and keep the world beating) रखी गई है। जिसका अर्थ है ‘रक्तदान करें और संसार की धड़कन चलने दें। विश्व रक्तदाता दिवस लोगों में रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रांति को दूर करने और उन्हें रक्तदान को प्रोत्साहित करने का काम करता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में जितनी मात्रा में बल्ड की जरूरत पड़ती है, ब्लड बैंकों में उतना ब्लड उपलब्ध नहीं है जिसके कारण कई लोगों को रक्त की कमी की वजह से जान भी गंवानी पड़ जाती है। बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है यदि अधिक संख्या में लोग ब्लड डोनेशन के लिए आगे आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हालांकि ब्लड डोनेशन के लिए आज लोगों में काफी जागरूकता देखी जा रही है किन्तु अभी भी बहुत लोगों में इसको लेकर भ्रांतिया हैं लेकिन सच्चाई यह है कि रक्तदान से किसी की जान तो बचाई ही जा सकती है, साथ ही रक्तदान रक्तदाता की सेहत भी दुरूस्त करता है।

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विश्व रक्तदाता दिवस पर आइए जानते हैं लोगों की कुछ ऐसी ही भ्रांतियों को और डाक्टर्स इसके बारे में क्या कहते हैं:

- रक्त दान को लेकर कई लोगों में भ्रांति है कि रक्त दान से शरीर में रक्त की कमी हो जाएगी किन्तु डाॅक्टर्स कहते है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है सच तो यह है कि मनुष्य के शरीर में रक्त बनने की प्रक्रिया सतत चलती रहती है और रक्तदान से उसे कोई भी नुकसान नहीं होता। कोई व्यक्ति यदि एक बार में 350 मिलीग्राम रक्त डोनेट करता है तो उसके शरीर में चैबीस घण्टे के भीतर ही यह पूर्ति हो जाती है । एक नियमित रक्तदाता, तीन महीने बाद दोबारा रक्तदान कर सकता है। 

- रक्तदान को लेकर लोगों में एक भ्रांति यह भी है कि रक्तदान से खून का थक्का जम जाता है किन्तु यह सच नहीं है, विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लड डोनेट करने से खून का सर्कुलेशन ठीक ढंग से होता है। जिसके कारण आर्टरीज में ब्लाकेज और क्लॉटिंग में समस्या नहीं होती है। ब्लड डोनेट करने से शरीर में नए टिशूज़ बनने लगते हैं जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बच सकते हैं।

- रक्तदान से दिल की सेहत में सुधार, वजन कंट्रोल, खून में आयरन की मात्रा नियंत्रित रखने में फायदा मिलता है। 

विशेषज्ञों के मुताबिक रक्तदान के लिए व्यक्ति की उम्र 16 से 60 साल के बीच और वजन 45 किलोग्राम से अधिक होना आवश्यक है। रक्तदान से पहले रक्तदाता की मेडिकल जांच कराई जाती है, ताकि किसी तरह के खतरे की संभावना न रहे। वह व्यक्ति जिसे एचआईवी, हेपाटिटिस बी या हेपाटिटिस सी जैसी बीमारी हो उसे रक्तदान की इजाजत नहीं दी जाती। रक्तदान से करीब 24 घंटे पहले रक्तदाता को बीड़ी या सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए, इसके अलावा रक्तदान करने के तीन घंटे बाद तक धूम्रपान न करें। रक्तदाता के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि रक्तदान से दो-तीन घंटे पहले वह पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं व भरपेट भोजन करें, जिससे खून में शुगर की मात्रा स्थिर रहती है। 

- अमृता गोस्वामी