चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हुआ था मां दुर्गा का जन्म

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हुआ था मां दुर्गा का जन्म

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों तक मां दुर्गा धरती पर रहती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

साल में दो नवरात्रि मनाई जाती है, एक चैत्र नवरात्र और दूसरा आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत में आती है। इस बार चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से शुरू हो रहा है। नवरात्र के नौ दिन उपवास रखकर देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों तक मां दुर्गा धरती पर रहती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। 

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चैत्र नवरात्र का महत्व

हिंदू धर्म में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसीलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू वर्ष शुरू होता है। इसके अलावा कहा जाता है भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्‍म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था। इसलिए धार्मिक दृष्टि से भी चैत्र नवरात्र का बहुत महत्व है।

इसलिए मनाई जाती है चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि मनाने के पीछे एक पुरानी कहानी है, जिसके अनुसार दस सिर वाले शिव भक्त रावण की ताकत के बारे में सभी देवी-देवताओं को पता था। इसलिए सीता को लंका से वापस लाने के लिए जब श्रीराम रावण से युद्ध करने जा रहे थे, तो उन्हें देवताओं ने मां शक्ति की आराधना करने और उनसे विजय का आर्शीवाद लेने की सलाह दी। भगवान राम ने ऐसा ही किया।

भगवान राम ने मां को चढ़ाने के लिए 108 नीलकमल की व्यवस्था की और पूजा शुरू कर दी। जब रावण को पता जला कि श्री राम मां चंडी की पूजा कर रहे हैं, तो उसने भी मां की पूजा शुरू कर दी। रावण किसी भी हाल में अपनी हार नहीं चाहता था, इसलिए उसने राम के 108 फूलों में से एक चुरा लिया और अपने राज्य में चंडी पाठ करने लगा। राम को इस बात का पता चला और उन्होंने कम पड़ रहे एक नीलकमल की जगह अपनी एक आंख मां को समर्पित करने की सोच ली, लेकिन जैसे ही श्रीराम अपनी आंखें निकालने जा रहे थे मां मां प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान राम को जीत का आशीर्वाद दिया। 

दूसरी ओर रावण चंडी पाठ कर रहा था। तभी हनुमान जी ब्राह्मण बालक के वेश में उसके पास गए और रावण से गलत मंत्र का उच्चारण करवा दिया जिससे मां चंडी क्रोधित हो गईं और रावण को श्राप दे दिया। जिसके परिणामस्वरूप राम-रावण युद्ध में रावण का अंत हो गया। नवरात्रि के आखिरी दिन को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।

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नवरात्र के नौ दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखें।

- मां दुर्गा को रोज़ लाल फूल चढ़ाएं।

- नौ दिनों तक बाल और दाढ़ी-मूंझ नहीं कटवाने चाहिए।

- नवरात्रि के दौरान नॉन वेज, प्याज, लहसुन आदि न खाएं। 

- नवरात्रि के दौरान नींबू काटना भी अशुभ माना जाता है। 

- इन दिनों काले कपड़े नहीं पहनने चाहिये। साथ ही चमड़े से बनी चीजें, जैसे- बेल्ट, बैग और जूते-चप्पल भी इस्तेमाल न करें।

- कंचन सिंह







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